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हादसा है या हमला?सोई है पुलिस!

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खड़ी कार के परखच्चे उड़ा गायब हो गए हमलावर

रेकॉर्ड में ट्रैक्टर निकला UP के नंबर का वाहन

चेतन गुरुंग


इंदर बाबा मार्ग पर था आज मैं। (जो रास्ता राजपुर पैसिफिक मॉल से कैनल रोड को मिलाता है-ढलान) दोपहर को। दोस्त के घर। कार खड़ी थी चौड़ी सड़क के एकदम किनारे। कुछ देर बाद ज़ोरदार धमाके की आवाज आई। कुछ देर बाद दोस्त का कर्मचारी आया और बताया। आपकी कार तो नहीं। एक सिल्वर ग्रे कलर की कार, जो राजपुर रोड से नीचे आ रही थी, ने आपकी कार को भीषण टक्कर मार दी है। मैं, दोस्त और उनका स्टाफ दौड़ कर पहुंचे। खड़ी गाड़ी को पीछे से ठोंकने वाले दोनों बंदे रफूचक्कर हो चुके थे। टक्कर इतनी भयंकर थी कि मेरी कार का पिछला हिस्सा तबाह हो चुका था। टक्कर मारने वाली कार (स्विफ्ट डिजायर..यूपी-11-9484) के भी अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए थे। उस कार के भी बोनट से धुआँ निकल रहा था। कार किनारे की नाली में घुस गई थी। ये सब प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया। हम जब पहुंचे तो कार निकाल के दोनों सवार कैनल रोड पर बाएँ हाथ की दिशा (या तो वहाँ से सिडकुल या फिर राजपुर-सहस्त्रधारा की ओर गई होगी) ओर भाग खड़े हुए थे। ऐसा भी लोगों ने बताया। जो वहीं थे। हमने उनकी तलाश में दूसरी गाड़ी से काफी चक्कर लगाए। वर्क शॉप भी देखे। कुछ नहीं मिला।साथ ही DGLO Ashok Kumar..परिवहन सचिव शैलेश बगौली को भी फौरन सूचित किया। उन्होंने RTO से गाड़ी का पता करने को कहा। उनसे पहले ARTO अरविंद पांडे को कॉल किया..उनका मैसेज आया-मीटिंग में बिजी हूँ। हालांकि काल आई नहीं फिर.उनकी। मैसेज ही आया कि दिये हुए नंबर पर तो सहारनपुर में ट्रैक्टर है। कार नहीं। ये और गंभीर मामला हो गया। वैसे भी जिंदगी में खूब धमकियाँ मिली हैं। जब सिख आतंकवाद चरम पर था। देहरादून में। जब फर्जी कॉलेजों की पोल खोली थी। डर कभी फटका नहीं। अपने करीब। आज भी ऐसे ही अप्रिय किस्म की पत्रकारिता करता हूँ..जिसको ब्लैक मेलिंग बोलते हैं न..वह वाली..सो नाखुश और नाराज लोग ज्यादा हैं..मुझसे..वरना खुली-चौड़ी-खाली सड़क पर एकदम किनारे खड़ी कार पर ऐसा दमदार प्रहार! क्या गाड़ीं वालों ने नशा किया हुआ था? बहरहाल, पुलिस को लड़कों के भागने के 10 मिनट के भीतर सूचित कर दिया गया था। रिपोर्ट सिर्फ परिवहन वालों से आई कि नंबर प्लेट फर्जी है। मैंने Ashok Kumar (DGLO) को बता दिया ये भी। हैरान हूँ कि दिन-दहाड़े एक कार पागलों की तरह चलाई जाती है..तूफानी रफ्तार से..(एक दो पहिया वाले बंदे ने बताया-कार उसको भी तकरीबन कुचल देती), न जेम्स बॉन्ड CPU..न ट्रैफिक पुलिस न चीते की ही नजर में वे इस हादसे या साजिश के पहले या बाद में नजर आए। 32 हजार पुलिस वाले हैं। हमारे पास। होमगार्ड्स-PRD छोड़ के। अभी 1700 और भर्ती कर रहे। कई देशों की फौज नहीं है इतनी। फिर भी ये हाल।!बहरहाल, कार को गैरज छोड़ आया हूँ। कुछ दिन अब पैदल। जय उत्तराखंड पुलिस-RTO.

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