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उत्तराखंड देहरादून

जहरीली शराब से कितनी मौत होने पर डीईओ के खिलाफ कार्रवाई का मानक

CM अपनी प्रतिष्ठा बचाते हैं या मनोज उपाध्याय को

आखिर कौन सी मजबूरी है जो सरकार हर बार लॉबी के सामने झुक रही!

एसएसपी अरुण मोहन जोशी का धमाका:कोतवाल और चौकी इंचार्ज को किया निलंबित, आबकारी में सरकार कब दिखाएगी हिम्मत?

Chetan Gurung

देहरादून में जहरीली शराब पी कर कल तीन और आज तीन अभी तक काल-कालवित हो चुके हैं। 40 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं। एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने कोतवाल शिशुपाल सिंह नेगी और धारा चौकी इंचार्ज कुलवंत सिंह को शाम ढलते-ढलते निलंबित भी कर दिया। इसके बावजूद बेहोशी में पड़े देहरादून के जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय और उनके मातहतों के खिलाफ आबकारी मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संकेत इस बात के मिल रहे हैं कि पूरी शराब लॉबी और आबकारी महकमे को अपने इशारों से चला रही लॉबी अपने अफसर को बचाने के लिए घोड़े खोल चुके हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि फिर महकमे के मंत्री और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का जीरो टालरेंस और डंडे का खौफ कहाँ है?

एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने कोतवाल-चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिखा दी हिम्मत

देहरादून के डीईओ पिछले साल से ही लगातार अपने कारनामों से चर्चाओं में हैं और मशहूरी लूट रहे हैं। माना जाता है कि उनके ऊपर उस संयुक्त आयुक्त का हाथ है, जो अपने महकमे के तीन अपर आयुक्तों को हाथ के मैल से ज्यादा नहीं समझते हैं। ऐसा शायद ही किसी और महकमे में देखा गया हो, जहां तीन वरिष्ठ अफसरों को पैदल कर उनसे कनिष्ठ से ही शासन और HoD वास्ता रखते हों। जाहिर है कि बिना सियासी सरपरस्ती के ये मुमकिन नहीं है। सियासी सरपरस्ती कोई यूं ही तो हासिल नहीं हो जाती।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत:आखिर कब शराब महकमे पर चाबुक फटकारेंगे?

पिछले साल बैंक गारंटी, सिक्योरिटी, एमएमजीटी समेत तमाम घोटालों, जिनमें दुकानें सस्ती लुटवा देना और फिर तय से ज्यादा शराब की निकासी करवाना शामिल है, के चलते देहरादून के डीईओ के साथ ही हरिद्वार के डीईओ प्रशांत कुमार और चंपावत के डीईओ राजेन्द्र कुमार को सरकार ने निलंबित कर दिया था। राजेन्द्र को जबरन फंसाया गया। इसके पीछे अदालत से स्टे लेने में आसानी हासिल करना था। तीनों डीईओ के नाम की फ़ाइल एक ही थी। केस भी एक ही बनाया गया था। देहरादून-हरिद्वार में वाकई करोड़ों के घोटाले हुए थे। उनका स्टे हासिल करना आसान न होता, अगर राजेन्द्र का नाम भी फ़ाइल में एक साथ न होता।

प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन को प्रतिष्ठा के मुताबिक कठोर कार्रवाई करना होगा

इस साल भी देहरादून में फिर से शराब घोटाला थमा नहीं। ये लॉबी का जलवा है कि उपायुक्त और संयुक्त आयुक्त की संयुक्त जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद डीईओ उपाध्याय के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की हिम्मत सरकार नहीं कर पा रही। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने भी कारण बताओ नोटिस दिया। जब मामला तूल पकड़ने लगा तो एक और जांच बिठा दी गई। आखिर दागी को देहरादून का डीईओ बनाने और तमाम आरोपों के साबित होने के बावजूद कोई कार्रवाई न कर पाने के पीछे की मजबूरी सरकार बता सकती है?

देहरादून में अब जबकि जहरीली शराब पी के छह लोगों की मौत हो गई है, तो भी सरकार शायद सोच में है कि इसके लिए बलि का बकरा किसको बनाया जाए? हो सकता है कि किसी प्रवर्तन वाले की गर्दन ले ली जाए। बहुत हुआ तो इन्स्प्तेक्टर को टांग दे। डीईओ के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है तो ये माना जाएगा कि मुख्यमंत्री जीरो टालरेंस पर जाग गए हैं। सरकार और मुखिया त्रिवेन्द्र अपनी प्रतिष्ठा बचाने की फिक्र करते हैं या फिर डीईओ की गर्दन! इस पर करीबी नजर सभी की है।

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1 comment

अमित September 20, 2019 at 8:10 pm

Who is responsible POLICE or TRIVENDRA GOVERNMENT??
देहरादून में अब तक 6 लोगों की जहरीली शराब पीने से मृत्यु, कई गम्भीर। त्रिवेंद्र सरकार दलाली तक सीमित??
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के पास आबकारी विभाग है तब भी ज़िम्मेदारी लेने के बजाय कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारियों को ससपेंड कर दिया गया?? क्यो??
गत दो दिनों में बीजेपी के कुख्यात विधायक गणेश जोशी के पड़ोस में अब तक जहरीली शराब पीने से 6 लोग मर चुके है और लगभग इतने ही गंभीर स्थिति में हॉस्पिटल में एडमिट है। नैतिकता ऐसी इन सरकारी गुंडो की कि जो कुख्यात शराब माफिया अजय सोनकर था उसे बीजेपी का बड़ा दायित्व प्राप्त है। त्रिवेंद्र सरकार लगातार पुलिस को शोषण कर रही है। हरिद्वार कांड तो भूले नही होंगे?? सैंकड़ो बेगुनाह इसी साल जहरीली सरकार की भेंट चढ़ गए थे पर क्या हुआ?? गाज पुलिस पर गिरी और फ़ेसबुकिया DM दीपक रावत को कुम्भ मेले की मलाईदार पोस्टिंग मिली जबकि उन सभी हत्याओं के लिए DM जिम्मेदार था ना कि पुलिस।
पुलिस का शोषण कोई नई बात नही। जब नेताओ के चूल्हे हिलने लगते है तो वो पुलिस को बकरा बना देते है।
ऐसी की कुछ आज हुआ। देहरादून के कर्तव्यनिष्ठ कोतवाल आदरणीय शिशुपाल सिंह नेगी को बिना कारण हटाया गया। ऐसा अधिकारी जिसने अपने कार्यकाल में सदा ईमानदारी से नौकरी की और 100% रिजल्ट दिया। शिशुपाल जी को साधारण अफसर नही अपितु एक ऐसे अफसर है जिनकी जनता पूजा करती है क्योंकि कभी किसी गरीब पर अन्याय नही होने दिया। ऐसे ही धारा चौकी प्रभारी कुलवंत सिंह है जो 100% कर्तव्यनिष्ठ बन अपना दायित्व निभा रहे थे।
चाहते क्या हो दलाल नेताओ??
20 लाख है देहरादून जिले की जनता और 21 पुलिस थानों में बस 1500 पुलिसकर्मी?? पुलिस क्या करेंगी?? तुम नेताओ की सुरक्षा, तुम्हारे बच्चो की सुरक्षा, कोर्ट के समन-वारंट तामील, यातायात, तुम्हारे घटिया धरने-प्रदर्शन-पुतला दहन।
चाहते क्यो हो नेताओ??
और तब भी बिना संसाधनों के हमारी यह अजय दून पुलिस 100% नतीजे देती है। देखो पिछले 3 साल के क्राइम रिकॉर्ड। पूछो खुद से कि पुलिस ने क्या किया। एक-एक अपराधी को पाताल से ढूंढ लाये।
और आज तुम नेता पुलिस का मनोबल तोड़ने को पुलिस के कर्तव्यनिष्ट अधिकारियों को ससपेंड कर रहे??
धिक्कार है।
कोई नेता शिशुपाल जी या कुलवंत भाई के नाखून जैसा कर्तव्यनिष्ट बनकर दिखाए।
घिन्न आती है इस सिस्टम से यहां जिम्मेदार नेता मजे ले और पुलिस का शोषण करे।
थूकता हूँ ऐसे सिस्टम पर जो इतना अंधा, बहरा और गूँगा बन गया। अगर किसी को ससपेंड होना चाहिए तो वो है मुख्यमंत्री!

जानता हूँ इस पोस्ट के बाद साहब मुझे भी राजद्रोही सिद्ध करेंगे। पर मैं नही डरता। तैयार हूं।

#विरुद्ध
8006001350

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