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उत्तराखंड खेल देहरादून

सीईओ, सलेक्टर और एंटी करप्शन टीम के चयन में राजीव शुक्ल ही सर्वेसर्वा!

आखिर किस मानक पर हुई नियुक्तियाँ? क्या प्रक्रिया अपनाई गई?

पूर्व अध्यक्ष बिष्ट व मौजूदा अध्यक्ष जोत सिंह को कोई जानकारी नहीं

एंटी करप्शन टीम में यूपी के पूर्व विवादित सलेक्टर के खास लोग!

बीसीसीआई सिर्फ बहाना, उत्तराखंड पर है कब्जा जमाना  

होटेल्स और ट्रांसपोर्ट चयन में भी पारदर्शिता पर अंगुली

उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन की सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में लगता है जल्दी ही भूचाल आ जाएगा। मान्यता मिले जुम्मा-जुम्मा महीना हुआ है और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के फैसलों तथा अहम नियुक्तियों को ले के घपलों को सूंघना लोग शुरू कर चुके हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), चयनकर्ताओं और क्रिकेट मैचों के लिए एंटी करप्शन टीम के सदस्यों के चयन किसने किए, ये साफ ही नहीं हो रहा है। अंदरखाने और बीसीसीआई से जुड़े लोगों का ईशारा यूपीसीए तथा BCCI के पदाधिकारी राजीव शुक्ल की ओर है। सभी अहम फैसलों को उन्होंने पर्दे के पीछे लिया। उत्तराखंड के अध्यक्ष को भनक तक नहीं लगी।

राजीव शुक्ल:यूपीसीए के साथ ही उत्तराखंड क्रिकेट के भी सर्वेसर्वा!

सीएयू ने अमृत माथुर को CEO बनाया है। आधिकारिक तौर पर उनको कितनी तनख्वाह पर रखा गया है, ये साफ नहीं है। कहा जा रहा है कि उनको महीने की तनख्वाह उतनी मिलेगी, जितनी पिछले साल बीसीसीआई की तरफ से पूरा कामकाज संभाले अमित पांडे को साल भर में मिली। अमित को अब पूर्वोत्तर का ऑब्जर्वर बना दिया गया है। CEO के साथ ही प्रशिक्षक और चयनकर्ता जितने भी रखे गए हैं, सभी को मोटा भत्ता वेतन के साथ मिल रहा है। इतना अहम फैसला CAU का कोई एक पदाधिकारी नहीं ले सकता है।

:CAU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला:किसी भी अहम फैसले से अनजान

CAU स्वायत्त संस्था है। बीसीसीआई सिर्फ अपने नियमों को ही उससे लागू करा सकती है। उसको निर्देश दे के चला नहीं सकती है। फिर अभी तक Vinod Roy वाली COA ही बीसीसीआई को चला रही है। ऐसे में ये कहा नहीं जा सकता कि उत्तराखंड से जुड़े एक से एक अहमतरीन फैसले बीसीसीआई ले रही है। ऐसे में पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट और वर्तमान अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला का इतने अहम फैसलों के बारे में एकदम अंजान और गुमराह होना हैरान करता है।

बिष्ट तब अध्यक्ष थे, जब ये सारी नियुक्तियाँ की गईं। उन्होंने `Newsspace’ से कहा-मुझे तो इसकी भनक तक नहीं लगी थी। कौन नियुक्त हो रहा और कौन उनको नियुक्त करने के फैसले ले रहा। उनके सामने ही गुनसोला से `Newsspace’ ने ये मसला उठाया। उनका कहना था कि मैं तो कुछ नहीं जानता। सारी नियुक्तियाँ बीसीसीआई ने की। बीसीसीआई सूत्रों के मुताबिक कहानी एकदम अलग है। बोर्ड खुद अभी निष्क्रिय है। विनोद रॉय वाली CoA ही सारे फैसले बीसीसीआई में ले रहा ऐसे में बीसीसीआई भला कैसे CAU को निर्देश दे सकती है? इसके साथ ही बीसीसीआई को कोई अख़्तियार ही नहीं है कि वह राज्यों में प्रशासनिक फैसलों के बारे में कोई दखल दे।

कभी भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर रहे और पूर्व रेलवे स्पोर्ट्स बोर्ड और SAI के सचिव अमृत माथुर को सीधे नियुक्ति कैसे मिल गई? ये सवाल लोगों के जेहन में तैरने लगे हैं। क्या इस पद के लिए और नामों पर भी विचार किया गया? आवेदन मंगाए गए या नहीं? किसी के पास जवाब नहीं है। चयनकर्ता किसने तय किए? किसने एंटी करप्शन विंग बनाई? किस आधार पर ये नाम तय हुए? सूत्रों का कहना है कि ये सभी फैसले पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ल ने लिए। उनके ही विश्वासपात्र यूपी के एक पूर्व विवादित चयनकर्ता के लोगों को इस विंग में रखा गया है। ये सभी यूपी के ही हैं। इस पूर्व चयनकर्ता को वैसे स्टेडियम में घुसने भी नहीं दिया जाना चाहिए था, लेकिन CAU ने उसका गुलदस्ता दे के विजय हज़ारे मैच के दौरान सम्मान किया।

शुक्ल का उत्तराखंड क्रिकेट में शुरू से ही काफी दखल रहा। यहाँ की क्रिकेट में वह शुरू से ही बेहद दिलचस्पी दिखाते रहे हैं। बिष्ट, गुनसोला, पूर्व सचिव पीसी वर्मा और उनके बेटे माहिम जो सचिव बने हैं, शुक्ला के खासमखास रहे हैं। ये बात अलग है कि अब बिष्ट CAU में शुक्ल के ज्यादा दखल के कारण नाखुश हैं। शुक्ल को बीसीसीआई की सियासत करनी है। इसलिए वह उत्तराखंड का वोट हासिल करने के लिए इस राज्य की क्रिकेट पर अपना वर्चस्व रखना चाहते हैं। यहाँ के पदाधिकारियों को अपनी कठपुतली बनाना चाहेंगे। CAU से जुड़े और दशकों से देहरादून क्रिकेट को सींचने-सँवारने में अहम योगदान देने वाले कई पूर्व खिलाड़ी इस बात पर नाराज हैं कि विजय हज़ारे समेत कई अन्य ट्रॉफी के लिए चयन में पक्षपात के आरोप लग रहे हैं।

एक पूर्व CAU पदाधिकारी ने `Newsspace’ से कहा-`मनोज मुद्गल सबसे बेहतर चयनकर्ता थे। वह किसी की सिफ़ारिश सुन कर राजी नहीं थे। इसलिए उनको बीच में ही चयन का काम छोड़ के जाने के लिए मजबूर कर दिया गया। इस बात की जांच होनी चाहिए कि कौन लोग थे, जिनके दबाव के कारण मुद्गल को लौटना पड़ा’। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन बना कर कई साल काम करने वाले पूर्व क्रिकेटर चन्द्रकान्त आर्य CAU को CoA से मान्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने वाले हैं। उनके मुताबिक उनके पास कई बिन्दु हैं, जिनके आधार पर UCA सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।

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