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Cricket association of Uttarakhand के परोक्ष बॉस राजीव शुक्ला का BCCI चुनाव में वोटिंग अधिकार रद्द

उत्तराखंड खेल देहरादून

तमाम आरोपों और `Newsspace’ की खबरों का चुनाव अधिकारी ने लिया संज्ञान

उत्तराखंड में भी आरोपों-विवादों के बाद CAU पर COA की तिरछी नजर

विरोधियों ने चुनाव से पहले आपत्तिजनक दस्तावेजों का संग्रह बनाया

अध्यक्ष-कोषाध्यक्ष पर अंगुली, सदस्य न होने के आरोप  

हरिद्वार के क्रिकेटर से 5 लाख की घूस मांगने के आरोपों की होगी जांच

BCCI के एंटी करप्शन विंग-ऑब्जर्वर ने आज मैचों पर रखी नजर,रिपोर्ट जुटाई

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में उथल-पुथल के पीछे जिम्मेदार समझे जा रहे राजीव शुक्ला की अगुवाई में चल रही उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के BCCI चुनाव में वोट देने के अधिकार को आज रद्द कर दिया गया। चुनाव 23 अक्तूबर को होने हैं। निर्वाचन अधिकारी N गोपालास्वामी ने आज वोट देने के अधिकारी राज्यों और ईकाइयों के नामों की सूची जारी कर दी। इसमें उत्तर प्रदेश के साथ ही नौ राज्यों के नाम बाहर हैं। खास पहलू इस बिग ब्रेकिंग का ये है कि शुक्ला के उत्तराखंड क्रिकेट में अति सक्रियता और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के तमाम विवादित फैसलों पर `Newsspace’ ने एक के बाद एक धमाकेदार खबरें दुनिया के सामने पेश की। ये खबरें COA और BCCI के पास नियमित रूप से तत्काल पहुँचती रहीं। UPCA को चुनाव से बाहर करने के फैसले का असर क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड पर भी पड़ेगा। BCCI और COA के पास शिकायत जा रही है कि चुने गए अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला और कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी एसोसिएशन के सदस्य ही नहीं थे। आज ही गुनसोला ने `Newsspace’ से कहा कि हरिद्वार के एक खिलाड़ी से विजय हज़ारे ट्रॉफी चयन के लिए पाँच लाख रुपए घूस के तौर पर मांगने के आरोपों की जांच कराई जाएगी।

इन एसोसिएशन-ईकाइयों को ही वोट देने का अधिकार है। UPCA का नाम चुनाव अधिकारी ने वोटर लिस्ट से हटा दिया है।

शुक्ला को ले कर तमाम शिकायतों के चलते UPCA को इस कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ा। शुक्ला UPCA में निदेशक थे। अध्यक्ष और सचिव से ज्यादा उनकी ही चलती थी। BCCI चुनाव के लिए वोटिंग का अधिकार भी उन्होंने खुद ले लिया था। उनके ही ईशारे पर उत्तराखंड में भी वोट देने का अधिकार अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला को न दे कर सचिव माहिम वर्मा को दिया गया। माहिम और उनके पिता पीसी वर्मा शुक्ला के विश्वासपात्रों में शुमार हैं। शुक्ला उत्तराखंड में कितना दखल रखते हैं, इसको समझने के लिए ये काफी है कि CAU के CEO अमृत माथुर और चयनकर्ताओं के चयन तक की भनक न पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट और न ही मौजूदा अध्यक्ष गुनसोला को हुई। दोनों यही कहते रहे कि बीसीसीआई ने उनका चयन किया। जो पूरी तरह निराधार साबित हो चुका है।

शुक्ला और उत्तराखंड में उनके अत्यधिक दखल पर `Newsspace’ ने बिना नागा स्टोरी चलाई। क्रिकेट सियासत से जुड़ी किसी भी स्टोरी को वायरल होने में देर नहीं लग रही है। COA और BCCI चुनाव अधिकारी ने भी तथ्यों के साथ प्रकाशित इन स्टोरी को पूरी गंभीरता से लिया। शुक्ला के लिए अब BCCI ही नहीं UPCA में भी सियासत करना ख्वाब होने की नौबत आ गई है। वह आईपीएल चेयरमैन भी नहीं हैं और UPCA-BCCI से बाहर हैं। UPCA के खिलाफ चुनाव अधिकारी के फैसले से ये साफ हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट क्रिकेट को एकदम साफ-सुथरा देखना चाहती है।

इस फैसले के बाद अब उत्तराखंड में भी सियासत-पेशबंदी और भ्रष्टाचार के आरोपों से ग्रस्त हो चुके CAU के खिलाफ COA निशाना तान चुका है। आज उसके ऑब्जर्वर तारिकउर्ररहमान और एंटी करप्शन विंग के बी लोकेश सभी क्रिकेट मैचों को देखने पहुंचे और रिपोर्ट जुटाई। कई लोगों ने उनसे शिकायतें भी कीं। ये रिपोर्ट बीसीसीआई चुनाव से पहले COA और चुनाव अधिकारी के सम्मुख पेश कर दी जाएंगी। ऐसी प्रबल उम्मीद है। CAU पर उत्तराखंड के वरिष्ठ खिलाड़ियों की अनदेखी करने और UP के खिलाड़ियों और लोगों को ही अहम ज़िम्मेदारी देने के गंभीर आरोप हैं।

एक आरोप ये भी है कि न तो CAU का संविधान रजिस्टर्ड है, न ही अध्यक्ष गुनसोला और कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी एसोसिएशन के प्राथमिक या सामान्य सदस्य ही हैं। ये आरोप अगर साबित हो गए तो उत्तराखंड क्रिकेट को ले कर भी COA या BCCI या फिर चुनाव अधिकारी का उत्तराखंड क्रिकेट में भूचाल लाने वाला फैसला आ सकता है। CAU की विवादित कार्यशैली पर विरोधी भी पैनी नजर गड़ाए हुए हैं। उनको फिलहाल पूरा मौका शिकायत करने और अपने एजेंडा पर चलने का खुद CAU दे रहा है। हरिद्वार के एक खिलाड़ी से विजय हज़ारे ट्रॉफी में खिलाने के लिए पाँच लाख रुपए की घूस मांगे जाने के आरोपों से उत्तराखंड में कल से ही काफी बवाल मचा हुआ है।

इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और पुलिस के साथ ही सतर्कता महकमे में भी की गई है। अध्यक्ष गुनसोला ने कहा कि उनके पास पहले कोई भी शिकायत इस बारे में नहीं आई थी। अब जब मामला उनके संज्ञान में आ गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। वैसे `Newsspace’ के पास वह audiyo उपलब्ध है, जिसमें हरिद्वार के क्रिकेट सचिव खिलाड़ी के पिता को खुद फोन कर के उनके बेटे का चयन होने और अगले दिन 3 बजे देहरादून में राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम पहुँचने के लिए कह रहे हैं।

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