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उत्तराखंड क्रिकेट:दो दिन हुए नहीं और सीएयू में दो फाड़!

उत्तराखंड खेल देहरादून

लड़कों की अंडर-16 टीम में दो बिना बताए बाहर

गुनसोला-बिष्ट एक तरफ और वर्मा गुट दूसरी तरफ

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में ये पहला साल है, जब खिलाड़ी-टीमें क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के बैनर के नीचे चुनौतियाँ पेश कर रही हैं। जब दो महीने पहले BCCI के मान्यता उत्तराखंड को मिली तो गज़ब की खुशी और उत्साह का माहौल राजधानी से ले के चीन-नेपाल की सरहद तक था। आज अचानक ही उत्तराखंड क्रिकेट लगता है गहरे समुंदर में गोते खा रही है। अंधेरी काल कोठरी में धकेल दी गई है। घूसख़ोरी से ले के टीम चयन-नियुक्तियों को ले के आरोपों की बौछार हो गई है। आलम ये है कि CAU में ही दो फाड़ की नौबत आ गई है। मौजूदा और पूर्व अध्यक्ष एक तरफ हैं और बाकी दूसरी तरफ। इस बीच अंडर-16 की लड़कों की टीम के चयन को ले के भी तमाम सवाल उठ रहे हैं। टीम में जिन दो खिलाड़ियों को शामिल किया गया था, उनको खामोशी संग बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। उनकी जगह दो ऐसे खिलाड़ी लिए गए हैं, जो स्टैंड बाई में थे।

CAU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला
हीरा सिंह बिष्ट (पूर्व CAU अध्यक्ष)

CAU के पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट और पहले अधिकृत अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला से `Newsspace’ लगातार बात कर रहा है। हकीकत ये है कि दोनों को ही एसोसिएशन में क्या चल रहा, टीमों का चयन कैसे हो रहा या फिर किस तरह क्रिकेट को अंजाम दिया जा रहा, कुछ नहीं पता है। अब क्रिकेट सिर्फ और सिर्फ उत्तर प्रदेश के जुम्मा-जुम्मा दो-तीन लोगों के ईशारों पर चल रही है। सूत्रों का कहना है कि राजीव शुक्ला के खासमखास पूर्व सचिव पीसी वर्मा और उनके बेटे वर्तमान सचिव माहिम वर्मा ही एसोसिएशन को चला रहे हैं। उनको निर्देश यूपी से मिल रहे हैं।

इसका नतीजा ही है कि सीईओ की नियुक्ति से ले के टीमों के चयन तक में विवादों की भरमार हो गई है। यूपी के एक पूर्व रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी ने फोन कर के `Newsspace’ से कहा-जिन लोगों ने यूपी की क्रिकेट का सत्यानाश किया, वे अब उत्तराखंड पर गिद्ध दृष्टि जमाए हुए हैं। उनको लगता है कि उत्तराखंड भी उनकी ही घर की खेती है। यूपी का उपनिवेश है। उत्तराखंड के लोगों ने अभी से सजगता नहीं दिखाई तो उठने से पहले ही उत्तराखंड लड़खड़ा के गिर पड़ेगा। जिस तरह CAU के काम करने का ढर्रा चल रहा, उससे उत्तराखंड की बदनामी देश भर में हो रही है। एक अन्य पूर्व रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी, जो यूपी का स्तम्भ रहा, ने कहा-इस वक्त देश भर में सिर्फ दो मुद्दे चर्चाओं में हैं। एक BCCI चुनाव। दूसरा उत्तराखंड क्रिकेट में जो भी मनमानी एसोसिएशन की ओर से हो रही है।

सूत्रों का कहना है कि पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट और अभी अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला सचिव माहिम और उनके पीछे खड़े पीसी वर्मा के ऊल-जुलूल और एसोसिएशन के बदनामी धोने वाले कदमों से बेहद खफा हैं। ये दो धड़े के तौर पर अलग-अलग हो गए हैं। बिष्ट और गुनसोला को सचिव के काम करने का तरीका और पारदर्शिता के बिना काम करने पर नाराजगी है। इतनी जल्दी एसोसिएशन में धड़ेबाजी उत्तराखंड क्रिकेट के लिए खतरे की घंटी है। ये ही आलम रहा तो सुप्रीम कोर्ट यहाँ रिसीवर बैठा सकता है। अभी पूरी निगरानी सुप्रीम कोर्ट ही CoA के जरिये कर रही है।

जहां तक सवाल विवादों का है। अंडर-16 लड़कों की जो टीम CAU ने घोषित की थी, उसमें 15 सदस्यों में विप्लव नौटियाल और रवि सिंह भी थे। आज जब BCCI ने अपनी अधिकृत सूची को वेबसाइट पर डाला तो दोनों के नाम रजिस्टर्ड खिलाड़ियों की सूची में नहीं हैं। उनकी जगह आरुष को रजिस्टर्ड खिलाड़ी की सूची में रखा है। वह आज मध्य प्रदेश के खिलाफ टीम में है। कोई ये बताने वाला नहीं है कि आखिर जिन दो खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया गया था, उनको किस वजह से बाहर कर दिया गया। जिन दो को भीतर किया, उनको किस बिना पर अंदर किया? अभी CAU चुनाव को ले के भी सवालिया निशान लग रहे हैं। विरोधी गुट चुनावों को अवैध या फिर नियमों के विरुद्ध करार दे रहे हैं। वे इस दिशा में भी जुटे हुए हैं।

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