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CAU संशोधित संविधान पर छीछालेदर,समयसीमा से सिर्फ एक दिन पहले हुआ रजिस्टर्ड

उत्तराखंड खेल देहरादून

हल्द्वानी अंडर-23 ट्रायल में सलेक्टर,को-ऑर्डिनेटर मोबाइल ले के मौजूद

उत्तराखंड क्रिकेट में बढ़ता जा रहा यूपी का दखल

गैर पेशेवर-अपरिपक्व प्रबंधन के हाथों क्रिकेट  

नियुक्तियों पर अंदरखाने बवाल,नए लोग हुए खास लॉबी के करीबी  

पिछले साल दागी रहे भी समन्वयक बना दिए गए हैं

Chetan Gurung

शोर और आरोपों के बावजूद उत्तराखंड क्रिकेट की हर गतिविधियों में उत्तर प्रदेश की जबर्दस्त घुसपैठ और बढ़ी है। हर रोज ऐसे नए नाम सामने आ रहे, जिनका उत्तराखंड से कोई वास्ता नहीं रहा है। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड का हाल ये है कि संविधान का रजिस्ट्रेशन CoA की तल्खी की तल्खी के बाद आज छुट्टी के दिन रजिस्टर्ड हुआ। CoA के विनोद राय ने साफ कहा कि देश के जिन तीन राज्यों ने संविधान रजिस्ट्रेशन कर उनको नहीं भेजा है, उनमें उत्तराखंड भी शामिल है। CAU पर चंदेक ने एकाधिकार कर लिया है। उनके करीबियों को ही चयनकर्ता के साथ ही समन्वयक और प्रबन्धक बनाया जा रहा है। अब अंडर-23 के ट्रायल के दौरान एक समन्वयक और दो चयनकर्ताओं के मोबाइल फोन के साथ मौजूद रहने का गंभीर मामला सामने आया है। एसोसिएशन में सभी गैर पेशेवर हैं। वे अनुभवहीन हैं। क्रिकेट से दूर-दूर तक वास्ता नहीं रखते।

CAU के एक पूर्व आला पदाधिकारी ने `Newsspace’ को बताया-`मुझे बताया गया है कि हल्द्वानी में जिस शख्स को समन्वयक बनाया गया है, वह ट्रायल के दौरान मोबाइल ले के मौजूद था। इतना ही नहीं दो चयनकर्ता भी मोबाइल लिए हुए थे। ये एकदम गंभीर मसला तो है ही BCCI के निर्देशों की खुली नाफरमानी है’। उन्होंने एक और गंभीर आरोप लगाया कि समन्वयक ने चयनकर्ताओं को पाँच नाम भी सौंपे। जिनके चयन के लिए उसकी तरफ से सिफ़ारिश की गई है। उनके पास इस मामले में शिकायत आई है। उनको नहीं मालूम कि कौन चयनकर्ता नियुक्त कर रहा। कैसे समन्वयकों की नियुक्ति कर रहा? हालात ये है कि जिन लोगों ने अपने कई दशक क्रिकेट और इसके संचालकों को दिए, जवानी दी, आज वे दरकिनार कर दिए गए हैं।

ऐसे कई हैं, जो ये कहने से नहीं हिचकते कि उनकी महीने भर से ज्यादा हो गए, CAU के अध्यक्ष, सचिव या उनसे पहले के पदाधिकारियों से बात नहीं हुई है। उनको कोई याद ही नहीं कर रहा। रोज UP के लोग उत्तराखंड आ के क्रिकेट पर कब्जा जमा रहे हैं। उत्तराखंड क्रिकेट में उत्तर प्रदेश के परोक्ष कब्जे और मनमानियों के साथ ही CAU के गैर पेशेवर रुख से बवाल चल रहा है। संघ के अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला काँग्रेस के पूर्व विधायक और मसूरी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष हैं। सचिव माहिम वर्मा और उपाध्यक्ष संजय रावत, कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी का की भी क्रिकेट पृष्ठ भूमि नहीं है। अवनीश वर्मा जिला स्तर के खिलाड़ी ही रहे। काउन्सलर दीपक मेहरा की भी कोई पहचान क्रिकेट की दुनिया में नहीं है।

काउन्सलर का चुनाव कैसे और कब हुआ, ये भी किसी को नहीं पता। परिपक्वता के अभाव, अनुभवहीनता और जानकारी की कमी के कारण CAU की छीछालेदारी CoA के सामने हो चुकी है। CoA के बॉस विनोद राय ने कल साफ कहा कि उत्तराखंड भी उन तीन राज्यों में है, जिसका संविधान पहुंचा नहीं है। उन्होंने 13 अक्तूबर शाम पाँच बजे की समयसीमा उत्तराखंड के लिए रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज़ सौंपने के लिए तय की थी। आज द्वितीय शनिवार के दिन गुजारिश और मिन्नतें कर रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज़ ऑफिस खुलवाया गया। तब जा के सावनिधान रजिस्टर्ड हुआ। रजिस्ट्रार भूपेश तिवारी ने इस पर `Newsspace’ से कहा कि CAU के कामकाज का तरीका बहुत गैर पेशेवर रहा। आखिर पलों में रजिस्ट्रेशन के लिए दबाव डालना उचित नहीं।

पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने भी रजिस्ट्रेशन के लिए ज़ोर लगाया। बिष्ट ने CAU को ले कर मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स पर कहा कि वह भी इस तरह की नकारात्मक रिपोर्ट् से फिक्रमंद हैं। उनके अनुसार चार दशक से ज्यादा वक्त उन्होंने क्रिकेट को दिए। महीने भर से भी कम समय के भीतर CAU से जुड़े आरोपों से राज्य की छवि खराब हो रही है। CAU के पदाधिकारियों के रुख से बहुत खफा बताए जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक हल्द्वानी में जिस शख्स को ट्रायल में समन्वयक बनाया गया है, वह पिछले साल गलत कारणों से बहुत विवादों और आरोपों में घिरा था। इसके बावजूद CAU का उसको एक बार फिर समन्वयक बनाया जाना हैरत भरा फैसला समझा जा रहा है। ये सवाल भी तैर रहे हैं कि सारे प्रशिक्षक, चयनकर्ता, मैनेजर, ट्रेनर आखिर कौन और किस बिना पर नियुक्त कर रहा है? उनको अनुबंध में क्या कहा गया है? क्या शर्तें और फीस तय की गई है?

प्रमाण तो नहीं हैं लेकिन इन सभी के पीछे UPCA-BCCI के पूर्व अधिकारी और उसके खासमखास के हाथ हैं। CAU के कुछ पदाधिकारी उनसे ही निर्देश ले रहे हैं। चुनाव अधिकारी रहे सुबर्द्धन ने `Newsspace’ से कहा कि उनके पास जो लिस्ट आई थी, उसमें अध्यक्ष गुनसोला और कोषाध्यक्ष नेगी के नाम लिस्ट में थे। दूसरी तरफ RTI में ली गई सदस्यों की सूची (2018-19) में दोनों के नाम शामिल नहीं हैं। इससे भी विवाद खड़ा हो रहा है कि क्या किसी को तत्काल सदस्य बना के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसी अहम कुर्सी सौंपी जा सकती है? `Newsspace’ इस पर अभी जानकारी जुटा रहा है।  

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