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उत्तराखंड क्रिकेट टीम में चयन के लिए सिफ़ारिशों-घूस का सहारा!

उत्तराखंड खेल देहरादून

`Newsspace’ के पास हैं आरोपों से जुड़ी कई ऑडियो रिकॉर्डिंग

CAU के रुख और उपेक्षा से नाराज कई पूर्व खिलाड़ी

जो साथ चले काँटों की राह पर,मंजिल मिलने पर उनको सीएयू ने दिया धक्का!

Chetan Gurung

CAU को जिन लोगों ने जन्म दिया, खड़ा किया, मान्यता दिला मुकाम तक पहुंचाया, वे मौजूदा प्रबंधन से नाखुश ही नहीं नाराज हैं। जो लोग संघर्ष के दिनों में साथ थे, सब कुछ छोड़-छाड़ के वे उपेक्षित हैं। जिन क्रिकेटर्स ने जिंदगी इसी खेल को समर्पित की और हर अच्छे-बुरे दिनों में CAU के साथ रहे, वे अपमानित महसूस कर रहे। मौज में कौन? खुश कौन? सिर्फ एक धड़ा। जिसका न तो क्रिकेट में न ही खेलों की दुनिया में कभी कोई योगदान रहा। एसोसिएशन को अब लोग पांडव संचालित या फिर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी करार दे रहे। सबसे गंभीर बात! विजय हज़ारे ट्रॉफी को ले कर अगर हरिद्वार के जिला सचिव का नाम चयन धांधली में आया है तो आयु वर्ग प्रतियोगिताओं (अंडर-23, अंडर-16, अंडर-19) में संघ के सचिव का नाम चयन में सिफ़ारिशों के बाबत लिया जा रहा है। पूर्व सचिव पर भी आरोप है कि वह एक खास शख्स को CAU में शामिल करने के लिए दबाव बना रहे हैं। ये सब निराधार नहीं है। `Newsspace’ के पास कई ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं। जो कई लोगों ने मुहैया कराई है। इसमें चयनकर्ता सचिव माहिम वर्मा का नाम चयन के लिए दबाव बनाने या फिर निर्देश मिलने की बात कह रहे हैं।

`Newsspace’ के पास CAU की बेहद गंभीर शिकायतों से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग और व्हाट्सएप संदेशों-मेल्स की भरमार हो रही है। निजी तौर पर भी मुलाक़ात कर अनेक किस्म की अनियमितताओं और घपलों की जानकारी सुबूतों के साथ दे रहे हैं। बेहद अहम एसोसिएशन के संविधान संशोधन का काम छुट्टी के दिन और समय सीमा से सिर्फ एक दिन पहले कराए जाने से CAU की प्रशासनिक अक्षमता और लापरवाही उभर कर आई है। सोसाइटी के रजिस्ट्रार भूपेश तिवारी ने `Newsspace’ के साथ पुष्टि की कि दूसरे शनिवार के बावजूद दफ्तर खोल के CAU के रजिस्ट्रेशन को अंजाम दिया गया। क्रिकेटर्स का नुकसान न होने देने के लिए। उत्तराखंड का नाम CoA बॉस विनोद राय ने बिहार और उड़ीसा के साथ लिया था। तीनों ने संविधान CoA को परसों तक नहीं भेजा था। कल रजिस्ट्रेशन न होता तो BCCI चुनाव में उत्तराखंड कीमती वोट डालने से वंचित रहता। साथ ही देश भर में छीछालेदर अलग होती।

डमी से हो गए हैं CAU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला

CAU के चयन ट्रायल्स में धांधली और पक्षपात, घूसख़ोरी के आरोपों से सिर्फ उत्तराखंड नहीं देश भर में माहौल गरम है। UP के ही लोगों को चयनकर्ता तथा अन्य ज़िम्मेदारी दिए जाने से ये आरोप CAU पर लग रहा है कि वह पहाड़ के लोगों का अपमान कर रहा। सिर्फ कानपुर लॉबी के ईशारे पर अहम फैसले लिए जा रहे हैं। अब पूर्व खिलाड़ी अन्य किस्म के आरोप भी ले कर सामने आ रहे हैं। स्थानीय पूर्व वरिष्ठ खिलाड़ियों को सिर्फ जिलों में चयनकर्ता बनाया जा रहा है। एक चयनकर्ता एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में कह रहा है कि उसको एक जिले के संघ के अध्यक्ष का फोन ट्रायल के दौरान आया था। वह एक खास खिलाड़ी का नाम ले के कह रहा था कि उसका चयन होना है। हर हाल में। सचिव माहिम वर्मा का निर्देश है। इस चयनकर्ता ने ये कहते हुए इस फरमान को मानने से इंकार कर दिया कि सचिव को बोल देना, मैं ये सब गलत काम बिल्कुल नहीं करूंगा। हैरानी की बात ये है कि जिस खिलाड़ी को लेने की सिफ़ारिश हुई या फरमान मिला, वह उत्तराखंड का नहीं था। उसके पास जरूरी दस्तावेज़ भी पूरे नहीं थे।

पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट भी खुश नहीं मौजूदा CAU प्रबंधन से..

एक अन्य ऑडियो रिकॉर्डिंग में अंडर-19 के एक खिलाड़ी का नाम लेते हुए एक चयनकर्ता कह रहा कि उसका चयन ही गलत हुआ। अच्छा हुआ उसका चयन दूसरे दौर में नहीं किया गया। उसको अंतिम 11 में खिलाना बहुत गलत फैसला था। उसकी जगह जिसको अब लिया गया है, वह बहुत अच्छा खेलता है। उसको हटा के कमजोर खिलाड़ी को टीम में लिया जाना बहुत गलत फैसला था। एक महिला खिलाड़ी के लिए एक चयनकर्ता कह रहे कि वह टीम में चुने जाने लायक नहीं। उसको अभी ढंग से बल्ला ले के खड़ा होना भी नहीं आता है। पूर्व खिलाड़ी अभी तक CAU की तरफ से प्लेयर्स एसोसिएशन का गठन न करने से भी खफा हैं। उनको अंदेशा है कि प्लेयर्स एसोसिएशन के गठन में भी खेल कर दिया जाएगा। CAU में अहम कुर्सियों पर मौजूद लोगों का कोई क्रिकेट बैक ग्राउंड न होना भी कुख्याति दिला रहा है।

उत्तराखंड में भी पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ला की ही चल रही

ये आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि माहिम, धीरज खरे, नेगी, रोहित चौहान जैसे बिना क्रिकेट पृष्ठभूमि वाले CAU को चला रहे हैं। इनमें कोई शराब, कोई शराब बार, कोई वकालत कारोबार से जुड़ा है तो कोई फुटबाल से। क्रिकेट सिर्फ उनका शौक भर रहा। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के एक चर्चित शख्स के ईशारे पर वे तमाम उल्टे-सीधे कदम उठा रहे हैं। जिस शख्स के ईशारे पर वे नाच रहे, वह राजीव शुक्ला का दायाँ हाथ बताया जाता है। उस पर यूपी में ही चयन और IPL फ्रेंचायजी के लिए खिलाड़ियों को जुगाड़ से मौका दिलाने के गंभीर आरोप लगे हैं। ज़्यादातर पूर्व खिलाड़ियों की नाराजगी इस बात पर है कि उनको टीमों के साथ सहायक प्रशिक्षक तक नहीं बनाया जा रहा है। छोटे-मोटे कार्य-ज़िम्मेदारी भी यूपी के लोग ले उड़ रहे हैं।

एक बेहिसाब ख्याति वाले स्थानीय क्रिकेटर ने अपना गुस्सा इस तरह बयां किया-`हम जब ट्रायल देने यूपी जाया करते थे तो उपेक्षा के साथ अपमान मिलता था। ये कहा जाता था कि अरे ये पहाड़ के लड़के क्या क्रिकेट खेलेंगे। ट्रायल का मौका ढंग से मिलता ही नहीं था। आज यूपी वाले उत्तराखंड में शहंशाह बना दिए गए हैं। ये उत्तराखंड के पहाड़ी खिलाड़ियों के साथ ना-इंसाफ़ी है’। इस खिलाड़ी ने कहा कि CAU के पूर्व और मौजूदा सचिव भी कानपुर पृष्ठभूमि से हैं. ये महज संयोग हो सकता है कि कानपुर वालों का जलवा उत्तराखंड में चल रहा है। पहाड़ के लोग सिर्फ उम्मीदें लगाए यूपी वालों का मुंह ताक रहे। हाल में CoA ने देहरादून में एंटी करप्शन वाले और ऑब्जर्वर भेजे थे। उनको क्या खामियां मिली। शिकायतें कितने उनके पास पहुंची, इसका असर भी जल्दी पता चल जाएगा।

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