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BCCI उपाध्यक्ष की कुर्सी पर क्या मोहरा भर होंगे माहिम?

उत्तराखंड खेल देहरादून

इस पोस्टिंग में भी पर्दे के पीछे राजीव शुक्ला !

CAU में भी भाई के साथ सदस्य हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री

CAU सचिव की कुर्सी फिर होगी खाली

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Chetan Gurung

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के निदेशक और सर्वेसर्वा राजीव शुक्ला BCCI चुनाव से बाहर होने के बावजूद बहुत सफाई से अपनी गोटियाँ खेल रहे हैं। ये उनकी ही मास्टर चाल या ट्रम्प कार्ड कहिए कि उत्तराखंड क्रिकेट के नए सेनापति माहिम वर्मा अगर सब कुछ उम्मीदों के मुताबिक रहा तो बोर्ड ऑफ क्रिकेट फॉर इंडिया (BCCI) के उपाध्यक्ष बन जाएंगे। माहिम को तब क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU) के सचिव की शक्तिशाली कुर्सी से इस्तीफा देना होगा। BCCI संविधान के मुताबिक कोई भी शख्स सिर्फ एक जगह पदाधिकारी रह सकता है।

लोढ़ा समिति की रिपोर्ट-दोहरे पदों (BCCI-राज्य ईकाइयों के बाबत)

माहिम के लिए इन दिनों खट्टे-मीठे दोनों तरह के दिन चल रहे हैं। वह CAU के सचिव बन गए हैं, जिसके बारे में खुद उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा। फिर BCCI उपाध्यक्ष की कुर्सी सपनों सरीखी है। दोनों ही कुर्सी उनको हालात और सियासी गणित के चलते मिल रही या मिली है। CAU सचिव की कुर्सी पर उनके पिता पीसी वर्मा तय आयुसीमा पार कर लिए जाने के कारण नहीं बन पाए। सो उन्होंने बेटे को इस कुर्सी पर बैठा दिया। इसको ले के अब CAU में लोग दबी जुबान आवाज उठाने लगे हैं। खास तौर पर माहिम की कार्यशैली और उत्तर प्रदेश वालों को तरजीह देने, उत्तराखंड वालों को दरकिनार करने के चलते। इसके साथ ही उन पर टीमों के चयन में दखल को ले के भी आरोप लग रहे हैं। भले उनकी पुष्टि नहीं हुई है।

BCCI उपाध्यक्ष की कुर्सी के साथ सचिव जैसी ताकत नहीं होती है लेकिन इस कंपनी का पदाधिकारी होना खुद में बड़ी बात है। लोग हैरान हैं कि आखिर इस कुर्सी पर माहिम कैसे करीब पहुँच गए या फिर तकरीबन बैठ गए। 23 अक्टूबर को मुंबई में BCCI चुनाव हैं। उसमें माहिम का सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष चुनाव जाना सुनिश्चित है। सिवाय इस संभावना के कि कोई कहीं से सुप्रीम कोर्ट का आदेश न ले के आ जाए और चुनाव स्थगित हो जाए। सूत्रों के मुताबिक माहिम के पीछे राजीव शुक्ला का परोक्ष संरक्षण है।

यही माना जाता है कि उनके ईशारे पर ही माहिम CAU सचिव बने और अब BCCI उपाध्यक्ष बनेंगे। कानपुर पृष्ठभूमि वाले माहिम और उनके पिता दशकों से शुक्ला के विश्वासपात्रों में से हैं। कानपुर में उनके पारिवारिक आवास शुक्ला के आवास के करीब बताए जाते हैं। RTI से मिली सूचना के मुताबिक शुक्ला छोटे भाई सुधीर के साथ उत्तराखंड में भी CAU के बाकायदा सदस्य हैं। ये साफ नहीं हुआ है कि आखिर एक शख्स कितने राज्यों में सदस्य रह सकता है। अंदरखाने की खबर ये भी है कि शुक्ला DDCA में भी सदस्य हैं। उत्तराखंड में वह चीफ पैट्रन हैं।

ये सवाल तेजी से उठ रहा है कि माहिम को ही BCCI चुनाव के लिए वोटिंग प्रतिनिधि क्यों बनाया गया या फिर उपाध्यक्ष क्यों बनाया जा रहा है? शुक्ला को इसमें क्या लाभ होगा? इसका जवाब ये है कि माहिम उनका अपना विश्वासपात्र है। शुक्ला के किसी फरमान या इच्छा को वह मानेंगे नहीं, ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता है। दूसरा ये कि शुक्ला UPCA के वोटिंग अधिकार खत्म किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। वहाँ से अधिकार बहाली का फैसला आता है तो माहिम से वह BCCI उपाध्यक्ष की कुर्सी इस्तीफा दे के खाली करवा सकते हैं। फिर उस सीट पर वह आराम से काबिज हो जाएंगे। माहिम बिना हिचक ऐसा कर देंगे। ये शीर्ष स्तर पर भीतरखाने आम राय है।

माहिम के स्थान पर अगर CAU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला को BCCI उपाध्यक्ष बनाया जाता तो उनसे सीट खाली कराना किसी के लिए भी आसान न रहता। एक और पहलू है। माहिम BCCI उपाध्यक्ष बन जाते हैं तो उनको शायद अगले दिन ही CAU के सचिव पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। लोढ़ा समिति यही कहती है। तब सचिव के प्रभावशाली कुर्सी पर फिर किसको बिठाया जाए, इस पर भी CAU के पर्दे के पीछे के उस्ताद अभी से जुटे हुए हैं। ऐसा न हो कि तब इस कुर्सी पर कोई चौंकाने वाला और यूपी पृष्ठभूमि वाला आ के बैठे।

वैसे देखा जाए तो BCCI उपाध्यक्ष से ज्यादा असरदार कुर्सी CAU सचिव की है। इसको इस तरह देखा जा सकता है। जैसे IAS अफसर केंद्र में अपर सचिव बनने से ज्यादा अपने कैडर राज्य में मुख्य सचिव बनना पसंद करते हैं। मुख्य सचिव के पास अथाह शक्तियाँ होती हैं। केंद्र में शक्तियाँ सचिव या फिर संयुक्त सचिव के हाथों में रहती है। आने वाले दिन उत्तराखंड क्रिकेट में धुआंधार रहने वाले हैं। ये तय है। इस बीच CAU की कुर्सियों पर सत्तारूढ़ बीजेपी के नेताओं की भी नजर जा लगी है। वे भी इन कुर्सियों पर बैठने के तलबगार हैं।  

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