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कोतवाल तो बहाल भी हो गया,शराब वालों को बख्श दिया गया क्या!

खेल देश देहरादून

मुख्यमंत्री के सामने आखिर कौन सी मजबूरी है कार्रवाई न करने की

खुद के जीरो टालरेंस के नारे से खिलवाड़ को मजबूर क्यों?

फर्जी इंस्पेक्टर्स पर भी निजाम की नजरें ईनायत बरकरार

Chetan Gurung  

इससे बड़ा ताज्जुब और क्या होगा कि पुलिस महकमे ने जांच में बेदाग पाए जाने पर अपने शहर कोतवाल और धारा चौकी इंचार्ज को बहाल भी कर दिया और मुख्यमंत्री के स्तर पर रुकी शराब के अफसरों पर कार्रवाई की फ़ाइल का अता-पता तक नहीं चल रहा। अब ये शक की सुई तेजी से घूमने लगी है कि सरकार खुद नहीं चाहती है कि शराब महकमे के दागी और सात लोगों की मौत के गुनहगार अफसरों पर कोई कार्रवाई हो। इस कयास को बल मिलने की वजह हफ्तों से कार्रवाई और शराब के अफसरों-इंस्पेक्टर्स के तबादलों तक की फ़ाइल मुख्यमंत्री दरबार में लटकी हुई है। 

इसके पीछे ये माना गया कि पंचायत चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण सरकार इस मामले में किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती थी। ये बात वैसे गले नहीं उतरती। इसी मामले मे पुलिस ने अपने संबन्धित कोतवाल और चौकी प्रभारी को तत्काल निलंबित कर दिया था। दो और कॉन्स्टेबल निलंबित कर दिए गए। क्या मजाल जो सरकार देहरादून के जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय के खिलाफ एक इंच भी कार्रवाई की राह पर आगे बढ़ी हो। साफ लग रहा है कि सरकार का पूरा संरक्षण दागी अफसरों को मिला हुआ है।

पौड़ी, अल्मोड़ा, उधम सिंह नगर और नैनीताल के जिला आबकारी अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। इन सभी पर कुछ न कुछ बड़े आरोप हैं। देहरादून के उपाध्याय तो कई धांधलियों से जुड़े आरोपों से दबे हुए हैं। सरकार को दुकानें स्थाई रूप से बंद करने और दुकानों की कीमत का निर्धारण कम करने के साथ ही बैंक गारंटी के मुद्दे पर बहुत बड़ा नुकसान हो चुका है। जो 10 अरब के करीब जाएगा। फर्जी ढंग से इंस्पेक्टर बन चुके लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने तक का हौसला सरकार नहीं दिखा पा रही है। इस पर लोग हैरान हैं।  

पुलिस महकमे ने अपने लोगों के खिलाफ सिर्फ फटाफट कार्रवाई ही नहीं की बल्कि शहर कोतवाल और धारा चौकी इंचार्ज को जांच में निर्दोष पाए जाने के कारण बहाल भी कर दिया गया है। इसका मतलब ये हुआ कि शराब महकमे के कर्मचारी जहरीली शराब की बिक्री में जुड़े हुए थे। पुलिस के नहीं। आखिर जो शराब माफिया पुलिस कॉन्स्टेबलों को खरीद सकते हैं, उनके लिए शराब महकमे के लोगों को खरीदना कौन सी बड़ी बात है। अब जबकि पंचायत चुनाव आचार संहिता खत्म हो चुकी है, तो हर एक दिन, एक पल देखा जा रहा है कि कब शराब के दोषी अफसरों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करती है।

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