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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिका उत्तराखंड क्रिकेट का भविष्य

खेल देहरादून

CAU  की मान्यता को UCA ने दी है चुनौती

माहिम के साथ हर जगह राजीव शुक्ला साए की तरह

बिष्ट-गुनसोला लॉबी को सचिव की लड़ाई में फतह मिलेगी?

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिक गया है। UCA ने उत्तराखंड क्रिकेट की कमान संभाल रहे क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को मिली मान्यता के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत की शरण ली है। इसको सुप्रीम कोर्ट ने लिस्ट भी कर दिया गया है। दूसरी तरफ बीसीसीआई उपाध्यक्ष बनने से पहले से ले कर बाद तक भी यूपीसीए के क्रिकेट नेता राजीव शुक्ला साए की तरह माहिम वर्मा के साथ नजर आ रहे हैं। इससे ये आरोप पुख्ता हो चुके हैं कि माहिम एक तरह से शुक्ला के मोहरे की तरह बीसीसीआई में फिट किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में UCA ने जो आरोप CAU पर लगाते हुए वाद दायर किया है, वह बहुत गंभीर और खलबली मचा सकता है। CAU पर पहले ही इतने आरोप लग चुके हैं कि ताज्जुब होता है। देश में शायद ही किसी अन्य राज्य एसोसिएशन ऐसे पुख्ता और गंभीर आरोपों में घिरी हुई है। माहिम और उनके पिता पीसी वर्मा आरोपों के साए में जी रहे हैं। माहिम को राजीव शुक्ला की मेहरबानी से बीसीसीआई उपाध्यक्ष की कुर्सी मिल गई है। फिर भी UCA के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने वाकई संज्ञान ले लिया और कार्रवाई का फरमान सुना दिया तो कुछ भी हो सकता है।

माहिम और पीसी पर आरोप हैं कि उन्होंने एसोसिएशन को परचून या पान की दुकान की तरह चलाया और आज भी चला रहे हैं। वे किसी भी अहम फैसले में एसोसिएशन के ही अन्य लोगों को न तो विश्वास में लेते हैं न ही उनको हकीकत से वाकिफ कराना पसंद करते हैं। UCA ने जो आरोप CAU पर लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है, उसमें IDAS अफसर अजय प्रद्योत के उत्तराखंड के खेल सचिव रहने के दौरान CAU को सरकारी अनुदान मिलना भी शामिल है। UCA का आरोप है कि प्रद्योत तब CAU में पदाधिकारी भी थे। ऐसे में उनके खेल सचिव रहते सरकार की मदद CAU को दिया जाना अनैतिक था। इसके साथ ही ये सवाल भी उठाया जा रहा है कि माहिम साल 2009 में CAU के सदस्य बने। वह साल 2004 में और बाद में भी कई अहम दस्तावेजों पर किस हैसियत से दस्तखत कर रहे थे? ये सीधे फर्जीवाड़ा की ओर ईशारा करता है।

CAU को मान्यता मिलने के बाद ही CEO के तौर पर अमृत माथुर की नियुक्ति बिना एपेक्स काउंसिल के गठन के ही कर दिए जाने और इसकी जानकारी अध्यक्ष को भी न होने से सवाल उठ रहे हैं। टीमों के चयन को ले कर घूसख़ोरी के आरोप भी खूब लगे। ये आरोप विजय हज़ारे ट्रॉफी, महिला और आयु वर्ग टीम के चयन में लगे। खिलाड़ियों ने आरोप लगाए कि ट्रायल में बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद उनकी उपेक्षा की गई। वहीं ऐसे खिलाड़ियों को टीम में लिया गया, जो ट्रायल में बेनूर साबित हुए थे। इस बारे में पूछे जाने पर अध्यक्ष गुनसोला शिकायतों को पता करने की बात करते हैं। वहीं चयनकर्ताओं का कहना है कि उनको जो फोन सिफ़ारिश के आए उनमें फोन करने वाले सचिव माहिम का नाम ले रहे थे। `Newsspace’ के पास ऐसे ऑडियो रेकॉर्ड भी हैं। इसके साथ ही रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी में CAU के जो दस्तावेज़ जमा हैं, उनमें भी तमाम विरोधाभास हैं।

UCA के एक पदाधिकारी के मुताबिक अगर सुप्रीम कोर्ट ने अगर इनकी जांच करा दी तो CAU का रजिस्ट्रेशन ही रद्द होना तय है। उस सूरत में BCCI में CAU का प्रतिनिधित्व भी खत्म हो जाएगा। उत्तराखंड क्रिकेट का भविष्य और सियासत भी बदल जाएगी। CAU में अब नया सचिव आना है। सूत्रों की मानी जाए तो धीरज भण्डारी के नाम पर अंतिम राय बन चुकी है। देहरादून के और पूर्व सैनिक धीरज को पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट का खासमखास माना जाता है। बिष्ट वर्मा पिता-पुत्र के रवैये से खासे नाराज हैं। दोनों के तानाशाही पूर्ण तरीके से काम करने और किसी को भरोसे में लिए बगैर सिर्फ यूपी लॉबी और राजीव शुक्ला के ईशारे पर काम करने से खफा हैं। भण्डारी सचिव बनते हैं तो बिष्ट एक बार फिर किंग मेकर बन के उभरेंगे। अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला भी उनके ही खासमखास हैं।

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