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उत्तराखंड क्रिकेट:सुप्रीम कोर्ट में पहली ही सुनवाई होगी अहम

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CAU पर छल-साजिश के आरोपों की बौछार

अमित कपूर सचिव कब बने और कब हटे? किसी को भनक नहीं

जब चाहे रेवड़ी की तरह बांटी-छीनी कुर्सियाँ  

सचिव की जंग में बिष्ट-शुक्ला वर्मा लॉबी लगा रही ज़ोर  

Chetan Gurung

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की BCCI मान्यता को ले कर उठे जबर्दस्त बवंडर के साथ ही कई नए बवाल और उठ खड़े हो रहे हैं। 27 नवंबर 19 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पहली सुनवाई होनी है। मान्यता की लड़ाई में पिछड़े अन्य संघों के लोग इससे बहुत उत्साहित हैं। वे पहली सुनवाई को ही CAU के लिए बहुत मुश्किल और दुष्कर जंग बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। इस बीच ऐसे दस्तावेज़ `Newsspace’ के पास आए हैं, जिसमें BCCI ने CAU के सचिव के तौर पर अमित कपूर को चिट्ठी लिखी है। हैरानी इस पर है कि जब CAU को मान्यता मिली तो सचिव के नाम पर अमित का जिक्र तक नहीं हुआ। उनको कब बनाया और कब हटाया, किसी को भनक तक नहीं लगी।

इतना तय है कि सुप्रीम कोर्ट में CAU के लिए जवाब देना आसान नहीं रहेगा। खास तौर पर ये देखते हुए कि उसके दस्तावेजों में बहुत ज्यादा हेर-फेर सामने आ रहे हैं। अमित कपूर को 12 जुलाई 16 को BCCI की तरफ से जो चिट्ठी भेजी गई थी, उसमें सचिव (CAU) लिखा गया है। अब ये तो मुमकिन नहीं है कि BCCI से गलती हो गई होगी। BCCI की ओर से महाप्रबंधक (खेल विकास) रत्नाकर शेट्टी के दस्तखत से जारी इस पत्र में अमित को कहा गया था कि बोर्ड की मान्यता देने संबंधी टीम देहरादून आ रही है। 15 जुलाई को मिलने का वक्त आवंटित किया गया था। टीम Four Points होटल में ठहरी थी।

अमित ने टीम से मुलाक़ात भी की थी। बाद में जब मान्यता हुई तो अमित को दूध से मक्खी की तरह निकाल दिया गया। अमित को उस वक्त तवज्जो देने की एक वजह तब बोर्ड अध्यक्ष की कुर्सी पर अनुराग ठाकुर का होना कहा जा सकता है। ठाकुर BJP युवा मोर्चा से हैं। अमित भी बीजेपी युवा मोर्चा से होने के साथ ही पूर्व मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर के पुत्र भी हैं। अब ठाकुर बोर्ड में कुछ नहीं रहे तो अमित को भी किनारे कर दिया गया। ताज्जुब की बात ये भी है कि जिस वक्त अमित को सचिव बताया जा रहा था, तब राजधानी में CAU जो ऑल इंडिया क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित करती थी, उसमें सचिव के तौर पर पीसी वर्मा का नाम लिखती थी। उसी दौरान माहिम वर्मा, जो पीसी के बेटे हैं और आज CAU के सचिव और BCCI उपाध्यक्ष हैं, भी सचिव बताए जाते थे।

सुप्रीम कोर्ट में वादी एसोसिएशन के एक पदाधिकारी के मुताबिक उनके पास कई दस्तावेज़ हैं, जो साबित करते हैं कि CAU ने कदम-कदम पर न सिर्फ सरकार के साथ छल किया बल्कि पूर्व CoA और BCCI की भी आँखों में धूल झोंकी। ये दस्तावेज़ साबित कर देंगे कि CAU शुरुआत से ही छल-फरेब का सहारा लेती रही। वे मामले को जालसाजी के साथ ही आपराधिक साबित करने की पूरी कोशिश करेंगे। उनको यकीन है कि उनके पास मौजूद दस्तावेज़ इसमें अहम साबित होंगे। वे ये भी साबित करने की कोशिश करेंगे कि CAU के पहले ही चुनाव में क्या-क्या गड़बड़ियाँ रहीं। किस तरह चुनाव अधिकारी सुबर्द्धन को भी अंधेरे में रखा गया। वे चुनाव अधिकारी को भी सुप्रीम कोर्ट में पेश कराने की कोशिश करेंगे। इससे चुनाव संबंधी कई घपले भी सामने आ सकेंगे।

इस बीच CAU में कई नए नाम सचिव की कुर्सी के लिए दावा ठोंकने लगे हैं। माहिम के BCCI चले जाने के बाद सचिव की कुर्सी खाली होनी है। ये बात अलग है कि अभी तक माहिम ने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा नहीं की है। वह दोहरी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। सचिव की कुर्सी पर अभी तक सिर्फ धीरज भण्डारी का नाम फ़ाइनल दिख रहा है, लेकिन चुनाव घोषित होने से पहले ही कई लोगों की महत्वाकांक्षाएँ सचिव पद के लिए ज़ोर मारने लगी हैं। CAU में भी अब वर्चस्व की लड़ाई छिड़ चुकी है। शुरू में खामोश बैठे पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट अब सचिव की कुर्सी पर अपना आदमी देखना चाहते हैं। भण्डारी और मौजूदा अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला उनकी ही लॉबी के समझे जाते हैं। दूसरी ओर राजीव शुक्ला-PC-माहिम वर्मा लॉबी अपने ही खास आदमी को सचिव की कुर्सी पर बिठा के उत्तराखंड क्रिकेट में निर्बाध राज जारी रखना चाहते हैं। ऐसे में ये भी संभावना है कि यूपी के सुधीर शुक्ला, जो आजीवन सदस्य हैं, को ही सचिव के ले सामने लाया जाए।

ताज्जुब इस पर भी है कि जब फिर से सचिव चुना जाना है तो अमित कपूर का नाम दूर-दूर तक कहीं नहीं नजर आ रहा है। जिस कपूर को अनुराग ठाकुर दौर में सचिव तक बनाया गया, उनको कब हटाया और क्यों हटाया ये किसी को न तो पता है न ही उनको अब CAU में तरजीह ही दी जा रही है। क्रिकेट में लंबे समय से जुड़े रहने के बावजूद उनको CAU कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया गया। अलबत्ता, यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के संजय रावत को जरूर उपाध्यक्ष बना दिया गया। रावत मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के करीबी रिश्तेदार हैं, लेकिन उनकी पहचान क्रिकेट की दुनिया में कभी नहीं रही है। इस बीच सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के चयन में भी तमाम शिकायतों का झोला भर के `Newsspace’ के पास आ रहा है।

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