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क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड:गुप्ता बंधु भी चाहते थे घुसना

उत्तराखंड खेल

चुनाव में शामिल वोटर्स पर भी उठ रहे सवाल

हरबंस कपूर बोले-मुझे न सदस्य बनाने की जानकारी न हटाए जाने की

माहिम राजकीय अधिकारी हैं तो फिर BCCI-CAU में कैसे!

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में सुनामी आने के आसार दिख रहे हैं। एक के बाद एक नए विवादों की ज्वालामुखी विस्फोट हो रहे हैं। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड वोटर सूची और चुनाव में शामिल वोटरों की सूची में भी बहुत अंतर सामने आया है। आजीवन सदस्य और BJP विधायक हरबंस कपूर ने `Newsspace’ से कहा-मुझे न आजीवन सदस्य बनाए जाने, न चुनाव होने और न ही सदस्यता खत्म करने की सूचना है’। अंदरखाने की खबर ये भी है कि दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपति जैकब जुमा को अपनी करतूतों से तबाह करने वाले कुख्यात गुप्ता बंधुओं (अतुल-अजय) भी CAU के जरिये BCCI में घुसने की कोशिश कर रहे थे। हालात विपरीत हो जाने के बाद उनको निराश होना पड़ा। दोनों को पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला का भी करीबी कहा जाता है।

BCCI का जलवा दुनिया की क्रिकेट में है। बड़े से बड़ा नाम भी इसमें घुसने को बेकरार रहता है। गुप्ता बंधुओं को भी CAU के जरिये ही BCCI में लाने की कोशिश खास लॉबी ने की थी। जब तक CAU को BCCI की मान्यता मिलती तब तक गुप्ता बंधुओं का खेल चौपट हो गया। सहारनपुर के गुप्ता बंधुओं की शुक्ला से करीबी बताई जाती है। शुक्ला का एक खास चेला भी सहारनपुर का ही है। उसका नाम यूपी क्रिकेट में बहुत विवादास्पद रहा है। अब उत्तराखंड क्रिकेट में भी उसका नाम रह-रह के सामने आ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में 27 और 28 नवंबर को उत्तराखंड और अन्य कई राज्यों को ले कर सुनवाई होनी है। ऐसे में जिस तरह CAU की गड़बड़ियों को ले के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं, वह हैरतनाक हैं। सूत्रों के मुताबिक रजिस्ट्रार ऑफिस में सदस्यों की जो सूची जमा है, उसमें सिर्फ 22 नाम शामिल हैं। रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी भूपेश तिवारी ने `Newsspace’ से बातचीत में साफ किया कि नियमों के मुताबिक चुनाव में सिर्फ रजिस्टर्ड सदस्य ही वोट दे सकते हैं। RTI में जो सूची मिली है, उसमें सीएयू में सिर्फ 22 सदस्य ही शामिल हैं।

अहम पहलू चुनाव का ये है कि इसमें जो मतदाता सूची सामने आई, उसमें 54 सदस्य थे। 13 लोग जिलों से और बाकी CAU स्टेट ईकाई से। एक तथ्य ये भी है कि इस सूची में हरबंस कपूर समेत कई नाम, जो 22 के सूची में थे, गायब थे। कपूर ने पूछे जाने पर कहा कि उनको ये नहीं मालूम कि वे इसके सदस्य थे। उनको CAU ने न तो कभी सूचित किया या मंजूरी मांगी कि उनको सदस्य बनाया जा रहा है। उनको हटाने या फिर चुनाव के बारे में भी सूचित नहीं किया गया। इससे चुनाव प्रक्रिया ही शक के दायरे में आ गई है।

इस बीच कानाफूसी ये भी है कि BCCI उपाध्यक्ष बनने के बावजूद माहिम वर्मा का CAU सचिव का पद न छोड़ना रणनीति का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट से अगर कोई फैसला दो-ढाई महीने में ऐसा आ जाता है, जो राजीव शुक्ला को फायदा पहुंचाता है तो वह फिर से BCCI में आना चाहेंगे। माहिम से इस्तीफा दिला के उनकी ही कुर्सी पर वह आ सकते हैं। माहिम और उनके पिता पीसी वर्मा उनकी शुक्ला लॉबी के हैं। तब माहिम फिर से CAU सचिव की कुर्सी ही संभालेंगे। वैसे ये सब अभी चर्चाओं के स्तर पर ही है। कोई ठोस इस मामले में सामने नहीं आया है। अलबत्ता, दोहरी भूमिका में माहिम की मौजूदगी पर जरूर सवाल उठने लगे हैं।

माहिम के राजकीय अधिकारी के तौर पर रजिस्ट्रार ऑफिस में उल्लिखित होना भी लोढ़ा कमेटी की सिफ़ारिशों का उल्लंघन है। इस सिफ़ारिश के मुताबिक कोई भी सरकारी अधिकारी BCCI या फिर राज्य ईकाइयों में अहम पदों पर नहीं रह सकते हैं। ये बात अलग है कि माहिम उपनल के कर्मचारी हैं। CAU के विरोधी इसके उपाध्यक्ष की कुर्सी पर आला IDAS अफसर अजय प्रद्योत के चुनाव पर भी ये कहते हुए अंगुली उठा रहे हैं कि वह राज्य सरकार में खेल सचिव और निदेशक रहते हुए कैसे अपनी ही एसोसिएशन को सरकारी अनुदान जारी कर सकते थे?  

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