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अवैध रूप से संचालित हो रहा THDC-IHET!

उत्तराखंड

BoG अध्यक्ष पर गलत रूप से दस्तखत करने के आरोप

प्रो.अरविंद ने सरकार से मांगी पुलिस सुरक्षा और इंसाफ

नॉन टीचिंग स्टाफ अब राज्य व्यापी आंदोलन करेगा

Chetan Gurung

टीएचडीसी-आईएचईटी टिहरी कॉलेज का संचालन क्या अवैध रूप से हो रहा? क्या खुद सरकार और उत्तराखंड तकनीकी विवि इस कृत्य को जान-बूझ के अंजाम दे रही? क्या TEQUIP-111 के बोर्ड ऑफ गवर्नर जो फैसले कॉलेज के मुताल्लिक ले रही, वे पूरी तरह अवैध हैं? क्या एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अरविंद कुमार सिंह को BoG ने दुराग्रह-साजिश के चलते न्यायालय की अवमानना करते हुए बर्खास्त किया? ये ऐसे सवाल हैं, जो बहुत मजबूत लगते हैं? खास तौर पर जब दस्तावेज़ सामने रख के पढ़ने बैठे। डॉ.सिंह ने न सिर्फ इस मुद्दे और अनीतिपूर्ण व्यवस्था को मुद्दा बना के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से इंसाफ की गुहार की है, बल्कि खुद के और परिवार के लिए प्राण भय को देखते हुए पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार भी की है। दूसरी तरफ कॉलेज के नॉन टीचिंग स्टाफ से जुड़े लोग कॉलेज के काम चलाऊ निदेशक और सरकार के खिलाफ बेमियादी हड़ताल पर जाने वाले हैं।

डॉ.सिंह ने चिट्ठी में लिखा है कि उनको तीन बार अवैध रूप से बर्खास्त किया जा चुका है। हर बार वह अदालतों से विजयी हो के लौटे। सरकार को हाई कोर्ट से ले के सुप्रीम कोर्ट तक में असम्मानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद सरकार में बैठे अफसर और कॉलेज के खास लॉबी से जुड़े लोग बाज नहीं आ रहे हैं। कॉलेज का संचालन TEQUIP-3 की BoG के जरिये किया जा रहा है। इस BoG के अध्यक्ष डॉ.डीपी कोठारी न सिर्फ प्रशासनिक बल्कि वित्तीय फैसलों से जुड़े दस्तावेजों पर भी दस्तखत कर रहे हैं। जिस BoG बैठक में उनको नियम विरुद्ध बर्खास्त किया गया, वह भी TEQUIP की ही थी। अहम पहलू ये है कि खुद डॉ.कोठारी स्वीकार करने से नहीं हिचक रहे कि उनकी BoG में डॉ.अरविंद की बर्खास्तगी का फैसला गलत हुआ और इसमें अगली बोर्ड बैठक में सुधार किया जाएगा।

कायदे से कॉलेज प्रबंधन यूटीयू के आधीन है। वह यूटीयू का संघटक कॉलेज है। इसकी BoG के अध्यक्ष कुलपति होने चाहिए। ये नियमों से खिलवाड़ है कि एक प्राइवेट शख्स डॉ.कोठारी अध्यक्ष हैं और सरकारी विवि का कुलपति तथा एसीएस ओमप्रकाश उनकी अध्यक्षता वाली बैठक में सिर्फ सदस्य के तौर पर बैठ रहे हैं। ये कुलपति और शासन के पद की गरिमा का भी ह्रास है। डॉ॰ अरविंद के चुभते सवाल वाकई सरकार को कटघरे में खड़े कर रहे हैं। उनका सवाल है कि जब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मान लिया कि उनकी नियुक्ति कोई मुद्दा नहीं है। उनको नियमित किया जा चुका है। फिर क्यों कर के उनको बहाल नहीं किया जा रहा है?

डॉ॰ सिंह के मुताबिक THDC प्रबंधन ने भी माना है कि कॉलेज MoU से संचालित होता है। सरकार इसमें गैर वाजिब ढंग से दखल दे रही है। सरकार के दखल का नतीजा है कि कभी शीर्ष पर जा रहा THDC-IHET आज गर्त की ओर है। कॉलेज के कामचलाऊ निदेशक केकेएस मेर चार महीनों में चार दिन कॉलेज आए। सरकार को फिर भी कोई परवाह नहीं है। सरकार के रुख के कारण ही THDC प्रबंधन बहुत खफा है। वह कॉलेज को सीधे अपने नियंत्रण में लेने जा रहा है। इसकी प्रक्रिया चालू हो चुकी है। यूटीयू की भूमिका भी इस कॉलेज को तबाह करने में अधिक दिख रही है। ये आलम तब है, जब वह खुद PhD से जुड़े मुद्दों को ले कर विवादों के घेरे में है। कुलपति नरेंद्र चौधरी कुलाधिपति राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से बुरी तरह फटकार सह चुके हैं।

ये देखने वाली बात होगी कि तकनीकी शिक्षा के मंत्री की ज़िम्मेदारी भी निभा रहे मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत आखिर THDC-IHET को तबाह होने दे कर नाकामी का सेहरा बांधना पसंद करेंगे, या जरूरी कदम उठा के कॉलेज को बचाएंगे? वह प्रो॰ अरविंद के मामले में कोई दिलचस्पी और पहल का प्रदर्शन कर इस मामले का पटाक्षेप कर अदालत में सरकार के छिछालेदर रोकेंगे या चलते रहने देंगे? इस पर भी सभी की नजरें गड़ी हुई हैं। खास तौर पर ये देखते हुए कि कॉलेज के नॉन टीचिंग स्टाफ की मेर से अब बहुत ही खराब रिश्ते हैं और वे कॉलेज की बरबादी में मेर को अधिक दोषी ठहरा रहे हैं। वे जल्द ही अपनी मांगों, जिसमें मेर को तत्काल हटाना भी शामिल है, को ले के राज्य व्यापी आंदोलन शुरू करनी की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसा हुआ तो सरकार के लिए ये एक और सिर दर्द होगा।

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1 comment

Dr A K Singh October 30, 2019 at 11:55 pm

माननीय मुख्यमंत्री जी से विशेष बार बार आग्रह करता हूं कि मुझे मेरे परिवार की सुरक्षा की गुहार सुनें तथा टिहरी गढ़वाल प्रशाशन को भी आदेश दिन कि मुझे परिवार सहित संरक्षण सुरक्षा तत्काल प्रदान करें। मेरे जीवन के लिए कुछ नौकरशाह उनकी बीवियां, निदेशक व कुलपति तथा विशेष रूप से पूर्व निदेशक गीतम सिंह तोमर अब भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ……माननीय मुख्यमंत्री जी तत्काल प्रभाव से ध्यान दें आदेश करें यही मेरी प्रार्थना है।

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