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शीर्ष चिकित्सकों के निगरानी में जूझ रहे सांसद बलूनी

उत्तराखंड राजनीती

सबको रिवर्स पलायन की प्रेरणा दी, खुद मुंबई अस्पताल में कर रहे संघर्ष

ईगास पर्व गाँव-पहाड़ लौट के मनाने की दावत दी थी

युवा बीजेपी प्रवक्ता को दुआओं का सहारा भी चाहिए

Chetan Gurung

उत्तराखंड के प्रतिभावान और मृदुभाषी सांसद अनिल बलूनी ने पहाड़ से बढ़ते पलायन को थामने और लोगों को वापिस अपनी जड़ से जुड़ने के लिए लौटने का नारा कुछ महीने पहले दिया था, और आज इसका असर नजर आ रहा है। ये विडम्बना है कि खुद बलूनी दुर्भाग्यपूर्ण रूप से असाध्य रोग की चपेट में गंभीर रूप से आ गए। वह इन दिनों मुंबई के एक प्रसिद्ध और बड़े अस्पताल में दुनिया की नजरों से दूर शीर्ष चिकित्सकों की सघन देख-रेख में ईलाज करा रहे हैं।

बीजेपी के प्रवक्ता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के बेहद विश्वासपात्र बलूनी को इस योगदान-उपलब्धि के लिए श्रेय दिया जा रहा है कि उन्होंने गढ़वाल और कुमायूं के लोगों को वापिस अपने गाँव-पहाड़ लौट कर आने के लिए प्रेरित किया। ये उनका ही कमाल है कि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत बार-बार पहाड़ और अपने गाँव आ रहे हैं। उनके साथ ही अन्य क्षेत्रों के युवा, जो देश के अन्य हिस्सों और विदेशों में रोजगार के लिए हैं, भी उत्तराखंड आ रहे हैं।

ईगास पर्व के प्रति भी बलूनी ने देश भर के उत्तराखंडियों को काफी हद तक प्रेरित किया। इस मौके पर अपने गाँव-पहाड़ आने और प्राचीन परंपरा व संस्कृति को बचाने की दिशा में जुटने के लिए भी उनको आमंत्रित किया गया। ईगास तो आ गया, लेकिन बलूनी देश की कारोबारी राजधानी के एक बड़े अस्पताल में पिछले एक महीने से गंभीरतम बीमारी से संघर्ष कर रहे हैं। `Newsspace’ के पास जो पुष्ट सूचना है, उसके मुताबिक बलूनी को पिछले कुछ महीनों से खांसी की शिकायत थी।

इसको उन्होंने सामान्य ढंग से लिया था। वह वातानुकूलित कमरे-दफ्तर और ठंडे पानी को पीने से बचते थे, तो खांसी रुकती सी थी। एक दिन बीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा के साथ वह दिल्ली के अस्पताल में गए। वहाँ शक होने पर जरूरी और व्यापक परीक्षण कराए गए। इसके बाद उनको तत्काल मुंबई ले जाया गया। वहाँ देश के चार बड़े अस्पतालों के दिग्गज चिकित्सकों के पैनल ने उनका परीक्षण किया। इसमें गंभीर रोग होने की पुष्टि हो गई। इस वक्त उनको गहन परीक्षण और निरीक्षण में रखा गया है। किसी को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं है। सिवाय बहुत जरूरी लोगों के।

युवा और प्रतिभावान सियासतदाँ बलूनी के ईलाज में कोई कमी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक फिक्र की बात ये है कि उनकी दशा में उत्साहवर्धक सुधार के लक्षण नहीं हैं। उनको दवाओं के साथ ही दुआओं की भी दरकार है। `Newsspace’ भी उनके लिए दुआएँ करता है। उम्मीद करता है कि वह जल्द ठीक हो कर सभी के बीच नजर आएंगे। ईगास पर्व के मौके पर उनके स्थान पर उनके गाँव अब पात्रा आ रहे हैं। और भी कई लोग अपनी मिट्टी की सोंधी खुशबू सूंघने आ रहे हैं, लेकिन इसके प्रणेता बलूनी दवाओं और उपकरणों के बीच मुंबई में अपने स्वास्थ्य से जूझ रहे होंगे।

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