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THDC-IHET टिहरी में सरकार की मनमानी से CMD खफा

उत्तराखंड

TEQUIP BoG को अवैध करार दे फैसलों पर अंगुली उठाई

राज्यपाल को MoU की शर्तें याद दिलाईं

तकनीकी शिक्षा महकमे ने एक बार फिर कराई सरकार की किरकिरी

प्रोफेसर अरविंद की बर्खास्तगी पर इस पत्र से भी उठी अंगुली

Chetan Gurung

विवादों में घिरी एशिया की इकलौती हाइड्रो पावर आधारित इंजीनियरिंग कॉलेज THDC-IHET,टिहरी के UTU के संघटक कॉलेज के दर्जे को बदलने की सरकार की कोशिशों ने टीएचडीसी प्रबंधन को खफा कर दिया है। कंपनी के सीएमडी DV सिंह ने कुलाधिपति राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को पत्र लिख के साफ किया है कि कॉलेज का दर्जा बदलने का प्रस्ताव न सिर्फ अवैधानिक है, बल्कि कंपनी इसको कई बार ठुकरा भी चुकी है। सरकार का इस मामले में अनुचित दखल ठीक नहीं है।

कंपनी के इस कड़क फैसले से न सिर्फ कॉलेज के फर्जी TEQUIP BoG के फैसलों पर अंगुली उठ गई है, बल्कि सरकार की ख़ासी किरकिरी हो गई है। खास बात ये है कि तकनीकी शिक्षा मंत्री का प्रभार भी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के पास है। ऐसा लगता है कि शासन में बैठे अफसर मुख्यमंत्री तक सही तथ्य पहुंचा ही नहीं पा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए और अपनी धांधलियों-नाकामियों को छिपाने के लिए वे मुख्यमंत्री और सरकार का ध्यान गलत मसलों की ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं। हाई कोर्ट में अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ गए एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अरविंद कुमार सिंह को इस पत्र के जारी होने से निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।

नियमों के मुताबिक कॉलेज की BoG यूटीयू के कुलपति की अध्यक्षता में होनी चाहिए। उसको ही कॉलेज से मुताल्लिक अहम और छोटे फैसले लेने का हक है। इसके बजाए विश्व बैंक की BoG, जिसके अध्यक्ष डॉ.डीपी कोठारी हैं, कॉलेज का प्रबंधन देख रही है। इतना ही नहीं, इसी BoG ने डॉ. अरविंद को एजेंडे में शामिल न होने के बावजूद प्रस्ताव ला के सीधे बर्खास्त कर दिया। खुद कोठारी ने इस फैसले को बाद में उनको गुमराह कर के लिया गया करार दिया। हास्यास्पद और ताज्जुब की बात ये है कि रिटायर्ड़ प्रोफेसर कोठारी की अध्यक्षता में जिस बैठक में डॉ. अरविंद को बर्खास्त किया गया, उसमें खुद अपर मुख्य सचिव (तकनीकी शिक्षा) ओमप्रकाश और कुलपति नरेंद्र चौधरी भी मौजूद थे।

ऐसा पूर्व में कभी नहीं हुआ था। अरविंद की बर्खास्तगी के पीछे सोची-समझी चाल-साजिश को भी देखा जा रहा है। खास पहलू ये है कि गलत तथ्यों के बूते नौकरी में आए और बर्खास्त हो के गए निदेशक डॉ. गीतम सिंह तोमर ने भी इसी BoG के बूते तमाम उल्टे-सीधे फैसले और नियुक्तियाँ की थीं। उनकी परंपरा को मौजूदा काम चलाऊ और बेहद विवादित निदेशक केकेएस मेर ने कायम रखा। डॉ. अरविंद को बर्खास्त करने के प्रस्ताव को वही ले के आए। वह न कॉलेज आते हैं न ही कॉलेज स्टाफ और शिक्षकों के साथ उनका रिश्ता ही अच्छा है। उनके खिलाफ कॉलेज में इतनी जल्दी असंतोष और आंदोलन होना उनकी अकुशलता को दर्शाता है।

THDC के सीएमडी ने अपनी चिट्ठी में राज्यपाल को कॉलेज के गठन के उद्देश्य को बताने के साथ ही सरकार के दखल, कॉलेज के नियमित फ़ैकल्टी और स्टाफ के साथ हो रहे बर्ताव तथा इसके खिलाफ फ़ैकल्टी के हाई कोर्ट जाने के मसलों को जगह दी है। पत्र में कहा गया है कि कॉलेज के लिए कंपनी ने CSR के अंतर्गत 20 एकड़ जमीन दी और एकमुश्त खर्च कॉलेज निर्माण में किया। इसी का करार (MoU) उत्तराखंड तकनीकी विवि से THDC का हुआ है। आगे का खर्च कॉलेज को खुद ही सेल्फ फायनेंसिंग मोड में खुद उठाना है। सरकार अब इस कॉलेज का दर्जा बदलना चाह रही। इसको वह संबद्ध कॉलेज का दर्जा देने की कोशिश कर रही है। जो करार (MoU) का उल्लंघन है। कंपनी इसके हक में नहीं है।

CMD ने तल्खी वाले तेवर में कहा है कि करार के खिलाफ दर्जे को बदलने के सरकार के प्रस्ताव को THDC खारिज कर चुका है। फिर भी सरकार करार के खिलाफ दर्जे को बदलना चाह रही है। डॉ. सिंह ने राज्यपाल से गुजारिश की है कि वह जरूरी कदम इस बारे में उठाएँ। THDC चेयरमैन कम मैनेजिंग डाइरेक्टर के इस पत्र की कॉपी `Newsspace’ के पास है। इस पत्र को आधार माना जाए तो डॉ. अरविंद को बर्खास्त करने का फैसला अवैध साबित होना तय है। साथ ही TEQUIP BoG ने जो भी फैसले लिए हैं और नयी भर्तियाँ की हैं, वे सभी सवालों के दायरे में आ गई हैं।  

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