News Space

उत्तराखंड क्रिकेट:CAU के घोटालेबाज-फर्जी लोगों ने कर दिया बंटाधार!

उत्तराखंड खेल देहरादून

टिहरी में CAU का क्रिकेट सचिव है छात्रवृत्ति घोटाले में गिरफ्तार राजवीर भण्डारी

विजय हज़ारे के बाद विजय मर्चेन्ट में भी डूबी नौका

टीम चयन में घोटाले-सिफ़ारिशों के आरोपों को खराब प्रदर्शन से मिली ताकत

अविरल कोचिंग क्लास के दफ्तर से आखिर एसोसिएशन का क्या रिश्ता

फर्जी दस्तावेजों पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब देने के लिए एसोसिएशन के रास्ते हुए मुश्किल

Chetan Gurung

विजय हज़ारे ट्रॉफी में खराब प्रदर्शन के बाद विजय मर्चेन्ट में भी बदतर प्रदर्शन के बाद क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड पर लग रहे तमाम आरोपों को और ताकत मिली है। टिहरी के क्रिकेट सचिव राजबीर सिंह भण्डारी प्रदेश के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में गिरफ्तार हो के जेल भेज दिया गया है। अध्यक्ष विनोद कुड़ियाल भी इसी घोटाले में स्पेशल टास्क फोर्स के राडार पर है। सीईओ-चयनकर्ताओं और प्रशिक्षकों-वेन्यू मैनेजरों की नियुक्तियों को ले कर सीधे ही CAU के सचिव माहिम वर्मा और उनके पिता पीसी वर्मा की लॉबी आरोपों-शक के घेरे में पहले से है।

घोटाले में भण्डारी की स्पेशल टास्क फोर्स के हाथों गिरफ्तारी ने साफ कर दिया है कि CAU में अपराधियों और साजिशकर्ताओं की भी जबर्दस्त घुसपैठ है। हैरानी की बात ये है कि अपने जिला सचिव की घोटाले में गिरफ्तारी के बावजूद CAU ने उसको निलंबित तक नहीं किया है। अहम पहलों ये भी है कि टीम में खिलाड़ियों के चयन को ले कर CAU पर जबर्दस्त पक्षपात की अंगुली उठ रही है। साथ ही रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी (चिट्स) में कई फर्जी दस्तावेजों और जानकारियों के जमा करने के कारण ये साफ है कि सुप्रीम कोर्ट में इसी महीने 27-28 तारीख को सुनवाई में वर्मा लॉबी और उसके गॉड फादरों को कठिन पलों का सामना करना पड़ेगा।

माहिम ने खुद को रजिस्ट्रार ऑफिस में सरकारी अधिकारी दिखाया है। भले वह सरकारी मानव संसाधन एजेंसी `उपनल’ से उत्तराखंड टेक्निकल विवि में क्लर्क है। अधिकारी होने पर BCCI जाने में दिक्कत है। झूठी सूचना देना तो जुर्म है है। न्यायिक हिरासत में जेल में बंद भण्डारी टिहरी में अन्नपूर्णा फूडक्राफ्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में मैनेजर था। इस कॉलेज का मालिकाना हक कुड़ियाल के पास बताया जाता है। ऐसे में वह भी पुलिस के निशाने पर है। CAU ने सिर्फ अपने शिष्य और भरोसेमंद होने की कसौटी देख के जिलों में अध्यक्ष-सचिव बनाए। बिल्कुल उसी अंदाज में। जिस अंदाज में माहिम को राजीव शुक्ला ने बीसीसीआई और CAU में गद्दी दे के खुद राज करने का फॉर्मूला निकाला।

इसमें कोई शक नहीं कि जिस दिन शुक्ला पर BCCI में प्रवेश का रास्ता खुल जाएगा, उस दिन माहिम को उपाध्यक्ष की कुर्सी से इस्तीफा देना पड़ेगा। फिर शुक्ला उस कुर्सी पर बैठेंगे, ये तय है। `Newsspace’ को कई चयनकर्ताओं और CAU से जुड़े लोगों की बातचीत के रेकॉर्ड भी मुहैया कराए गए हैं। जो साबित करते हैं कि टीमों के चयन में किस तरह के खेल किए गए। किस तरह पुरुष-महिला और जूनियर टीमों में चयन का पैमाना तय किया गया। राजपुर रोड पर अविरल कोचिंग क्लास के दफ्तर में माहिम का बैठना और EC रोड पर Ida होटल में CEO अमृत माथुर का बैठना, संदिग्ध है। आखिर दोनों ही CAU के कान्वेंट रोड स्थित दफ्तर में क्यों नहीं बैठ रहे? अविरल के मालिक डीके मिश्रा के भाई और बेटे दोनों क्रिकेट से जुड़े हैं। ऐसे में CAU सचिव का उसके दफ्तर में बैठना गंभीर आरोपों की श्रेणी में आता है।

CAU पर एक निजी कॉलेज के मालिक के बेटे को भी अंडर-23 टीम में महज सिफ़ारिश के चलते शामिल करने के आरोप हैं। एक पूर्व शीर्ष क्रिकेटर के मुताबिक इस खिलाड़ी को ठीक से खेलना तक नहीं आता है। उसको पिछले साल अफगानिस्तान के साथ अभ्यास मैच में भी टीम में शामिल किया गया था। अब वह उत्तराखंड की टीम में है। CAU पर प्लेयर्स एसोसिएशन की तरफ से जिन दो खिलाड़ियों को एपेक्स काउंसिल में लिया गया है, उसके चलते भी आरोप हैं। राजधानी में भी पूर्व वरिष्ठ क्रिकेटर मीनक्षी घिल्डियाल उपलब्ध हैं। उनके स्थान पर बेहद जूनियर निष्ठा फ़रासी को शामिल करने से एसोसिएशन की क्रिकेट विकास के प्रति निष्ठा भी संदिग्ध मानी जा रही है।

एसोसिएशन में इतनी जल्दी तीन धड़े हो चुके हैं। पूर्व अध्यक्ष और क्रिकेट को 40 सालों से खाद-पानी देने वाले पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को BCCI मान्यता मिलने के बाद किनारे कर दिया गया है। उनके साथ मौजूदा अध्यक्ष गुनसोला हैं, जो कि अप्रभावी समझे जाते हैं। वर्मा लॉबी उनको किसी बात के भनक तक नहीं लगने देती है। माथुर की लॉबी अलग है। अभी टीमों की किट की गुणवत्ता को ले के भी अंगुली उठ रही है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CAU को निश्चित रूप से कई कठिन सवालों के जवाब देने पड़ेंगे। जो उसके पास दिख नहीं रहे। उसकी वोटर लिस्ट भी पूरी तरह फर्जी साबित होने के आसार है।

बीजेपी विधायक हरबंस कपूर ने `Newsspace’ से साफ कहा कि उनको पूछे बिना आजीवन सदस्य बनाया गया और इसकी जानकारी उनको नहीं दी गई। उनको चुनाव में बुलाया भी नहीं गया। वे अब CAU में हैं या नहीं, ये भी नहीं बताया गया है। कई नौकरशाहों को भी इसी तरह CAU में सिर्फ अपना वजूद भारी दिखाने के लिए शामिल किया गया। जबकि वे तब उत्तराखंड में ही नहीं थे। हरिद्वार के एक खिलाड़ी को टीम में चयनित होने की सूचना दे के बुलाने और फिर घूस की मांग पूरी न होने पर टीम में न रखने की शिकायत मुख्यमंत्री और पुलिस तक में हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट CAU पर क्या फैसला करती है, इसका सभी का बेसब्री से इंतजार है।

Related posts

बरसे CM लेकिन DEO पर नजरें इनायत कायम!

Chetan Gurung

देहरादून DEO दफ्तर में भारी गड़बड़ियाँ!

Chetan Gurung

CoA-विनोद राय:CAU चुनाव में रहा UPCA-राजीव शुक्ला का भारी दखल

Chetan Gurung

Leave a Comment