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UTU में एडिशनल चार्ज में भी घालमेल!

उत्तराखंड देहरादून

सिर्फ UTU-THDC-IHET के नियमित लोग ही एलीजिबल!

ना-इंसाफ़ी के खिलाफ राज्यपाल-मुख्यमंत्री से मिलेंगे प्रो.अरविंद

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद जॉइनिंग क्यों नहीं सरकार?

कौन है जो CM को गुमराह कर रहा?

Chetan Gurung

उत्तराखंड तकनीकी विवि में अतिरिक्त चार्ज दिए जाने को ले कर भी सरकार पर अंगुली उठाई जा रही है। ये आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार जिसे चाहे उसको अतिरिक्त चार्ज दे रही, जो कि यूटीयू एक्ट-2005 का साफ उल्लंघन है। एक्ट के मुताबिक सिर्फ THDC-IHET, टिहरी के वे 12 स्टाफ ही विवि में अतिरिक्त चार्ज के पात्र हैं, जो नियमित कार्मिक का दर्जा रखते हैं। इस बारे में कॉलेज से बर्खास्तगी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जीत चुके एसोसिएस्ट प्रोफेसर डॉ.अरविंद कुमार सिंह ने आवाज उठाते हुए इस कुप्रथा को रोकने की दरकार जताई है।

विवि के रजिस्ट्रार को इस संबंध में चिट्ठी लिख के प्रो. अरविंद ने कहा कि ऐसा देखने में आया है कि स्वायत्त और सोसाइटी एक्ट से संचालित कॉलेजों के लोगों को भी विवि में अतिरिक्त चार्ज में लाया जा रहा है। जो पूरी तरह एक्ट का घनघोर उल्लंघन है। इन कॉलेजों में पौड़ी, पंतनगर और द्वाराहाट के इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं। एक्ट के मुताबिक सिर्फ विवि और इसके संघटक कॉलेजों के ही नियमित लोगों को विवि में अतिरिक्त चार्ज दिया जा सकता है। THDC-IHET संघटक कॉलेज है। THDC के सीएमडी की चिट्ठी से भी साफ हो चुका है कि कॉलेज का दर्जा आज भी संघटक का है न कि सम्बद्ध का। ऐसे में सिर्फ THDC-IHET में जिन 15 लोगों में से बचे रह गए 12 लोगों को नियमित स्टाफ का दर्जा हासिल है, वे ही विवि में अतिरिक्त चार्ज हासिल करने के पात्र हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी ये साफ हो चुका है कि ये सभी कार्यरत 12 लोगों को नियमित कर्मचारियों का दर्जा प्राप्त है। सरकार एक्ट के खिलाफ जा के किसी को भी यूटीयू में जिस तरह अतिरिक्त चार्ज दे रही है, वह गंभीर है।

UTU से सम्बद्ध कॉलेजों में गेस्ट फ़ैकल्टी और 11 महीने के अनुबंध पर रखे गए लोगों को भी अहम जिम्मेदारियाँ दिए जाने के चलते भी सरकार पर अंगुली उठाई जा रही है। रजिस्ट्रार का ध्यान चिट्ठी में इस बारे में भी खींचा गया है। प्रो.अरविंद को THDC-IHET में विश्व बैंक प्रोजेक्ट के लिए गठित बोर्ड ऑफ गवर्नर की बैठक में बिना एजेंडा प्रस्ताव ला के उन आरोपों में बर्खास्त कर दिया गया है, जिसको खुद प्रबंधन ने आरोपों की सूची से हटाने की गुजारिश हाई कोर्ट से की है। खास बात ये है कि खुद BoG के अध्यक्ष प्रो. पीडी कोठारी मान चुके हैं कि उनसे बर्खास्तगी के मामले में गलत फैसला हो गया।

`Newsspace’ से बातचीत में भी प्रो.कोठारी ने इस गलती को स्वीकार किया। हाई कोर्ट में भी जब सरकार और कॉलेज प्रबंधन को झाड़ पड़ी तो उन आरोपों को वापिस लेने की गुजारिश हुई, जिनके आधार पर प्रो. अरविंद की नौकरी ले ली गई थी। इसके बाद प्रो.अरविंद को बर्खास्त करने का कोई आधार अब कॉलेज प्रशासन या फिर यूटीयू प्रशासन के पास नहीं रह जाता है। इसके बावजूद प्रो. अरविंद को बहाल नहीं किए जाने से यूटीयू-कॉलेज प्रशासन पर तमाम आरोप लग रहे हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से इस बारे में प्रो.अरविंद अब मिलके अपनी ना-इंसाफ़ी की दास्तान सुनाना चाहते हैं। वह अपर मुख्य सचिव (तकनीकी शिक्षा) ओमप्रकाश और राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से भी मुलाक़ात का वक्त मांग रहे हैं। एक खास बात ये भी है कि जिस BoG ने प्रो.सिंह को बर्खास्त किया, उसको ये अधिकार हासिल ही नहीं है। इस बोर्ड को सिर्फ विश्व बैंक से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए गठित किया गया है।

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1 comment

Dr A K Singh November 18, 2019 at 5:37 pm

UTU में नियमित रूप से कार्यरत लोगों को ही केवल कार्यकारी का चार्ज दिया जा सकता है। इस उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) में आज की तिथि में माननीय कुलपति महोदय द्वारा दिया गया कार्यकारी अधिकारी का चार्ज सिर्फ वे लोग हैं जो इस विश्वविद्यालय के नियमित या स्थाई कर्मचारी नहीं हैं। मैंने स्वयं माननीय कुलपति जी से मिलकर इस विषय में ज्ञापन सौंप दिया है व बात भी की है। मैंने स्वयं पूछा है कि आप C O E या TEQIP-III प्रोजेक्ट का चार्ज किसी और को कैसे से सकते हैं जबकि इस विश्वविद्यालय के एक संघटक संस्थान में 12 लोग नियमित/स्थाई पद पर कार्यरत हैं ? इस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने उनसे आग्रह किया है कि आप उन लोगों को ही प्रभारी या कार्यकारी पद दें जो नियमित पद पर हों अन्यथा utu act खुला उलंघन होगा। परन्तु अब पता चला है कि विश्वविद्यालय कि कार्यकारी परिषद में भी नियमों का बहाना लेकर उन्हिंलोगों में से दो लोगों को बैठाया गया था। मैं इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया के माध्यम से उत्तराखंड सरकार से आग्रह करता हूं कि विश्वविद्यालय पर एक्ट के अनुरूप ही कार्य करने का आदेश जारी करें। और साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित करें कि भविष्य में भी नियमों के मुताबिक ही कार्यकारी का चार्ज दिया जाय।

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