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अच्छी खबर:बीजेपी के अनिल बलूनी के कैंसर ईलाज में पहली बार सुधार

उत्तराखंड देहरादून राजनीती

रोग प्रतिरोधक क्षमता में उम्मीदों के मुताबिक इजाफा

दृढ़ इच्छाशक्ति आ सकती है काम

Chetan Gurung  

डेढ़ महीने से ज्यादा अरसा गुजरने के बाद मुंबई में कैंसर का इलाज करा रहे बीजेपी प्रवक्ता-मीडिया प्रमुख राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के स्वास्थ्य में चिकित्सकों ने आज बृहस्पतिवार को पहली बार सुधार बताया। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर बताई गई। इसके लिए बलूनी की दृढ़ इच्छाशक्ति को जिम्मेदार बताया गया।

बलूनी की दोनों फेफड़ों के बीच दिल के पास ट्यूमर बताया जा रहा है। कल तक उनकी दशा में सुधार नहीं दिखाई दे रहा था। विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल की मेहनत आखिर रंग लाती दिख रही है। इतने लंबे समय से रिलायंस कंपनी के अस्पताल में इलाज कराने के बाद पहली बार सुधार के लक्षण दिखने से खुद बलूनी का हौसला बढ़ा है। पार्टी हाई कमान के लोग भी खुश बताए जा रहे हैं। बलूनी के साथ हर पल रहने वाले करीबियों ने `Newsspace’ को बताया कि बलूनी के स्वास्थ्य में उत्साहवर्धक सुधार के लिए चिकित्सकों ने उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति की सराहना की।

खास बात ये है कि कीमो थेरेपी के शुरू होने से ही जो रोग प्रतिरोधक क्षमता में चिंताजनक गिरावट आई थी, उसमें भी सुधार दिखाई दे रहा है। इससे चिकित्सक भी संतोष की सांस ले रहे हैं। बलूनी की बीजेपी में हैसियत का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि टीवी चैनलों में कौन प्रवक्ता या नेता-मंत्री सरकार और पार्टी की बात रखने जाएंगे, ये वही तय करते हैं। डिबेट में पार्टी-सरकार के लोग किस लाइन पर बात रखेंगे, ये भी बलूनी तय करते हैं। बेशक इसके लिए वह पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मंजूरी ले लेते हैं।

बलूनी के बीमार होने की खबर मिलने पर हर बड़े न्यूज़ चैनल और अखबारों के प्रमुख लोग अस्पताल जा के उनसे मिल आए। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, डॉ. अनिल, पीयूष गोयल, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल, सांसद तीरथ सिंह रावत उनसे अस्पताल में मिल के आ चुके हैं। मोदी-शाह उनकी बीमारी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में उतार-चढ़ाव की पूरी रिपोर्ट नियमित रूप से ले रहे हैं। बलूनी जहां केन्द्रीय नेताओं के खासमखास हैं, वही उत्तराखंड में विकास योजनाओं के जनक के तौर पर तेजी से उभर के आए हैं। उनके गंभीर रूप से बीमार और अस्पताल में मुंबई में होने के बावजूद लोगों ने उनकी आलोचना भी की। उनको क्षेत्र से गायब करार दिया गया।    

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