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उत्तराखंड देहरादून

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने अपनाया सख्त रुख

कौन है जो दागियों को बचाने में जुटा है

बहुचर्चित संयुक्त आयुक्त पर कार्रवाई का सीएम का फरमान

जांच रिपोर्ट में देहरादून के DEO उपाध्याय दोषी

आयुक्त सुशील ने दिए चार्जशीट के आदेश

Chetan Gurung

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सरकार की बदनामी का सबब बने शराब महकमे के दागी अफसरों पर डंडे-चाबुक बरसाने का फैसला कर लिया है। उन्होंने आबकारी आयुक्त सुशील कुमार को इस बारे में फौरन कार्रवाई के लिए सख्त फरमान जारी किया है। मुख्यालय बैठ के सरकार को अरबों के राजस्व का चूना लगाने वाले बहुचर्चित संयुक्त आयुक्त को अहम ज़िम्मेदारी से हटाने और देहरादून के जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय पर कार्रवाई के भी उन्होंने निर्देश दिए हैं। आयुक्त के अनुसार उपाध्याय के खिलाफ जांच रिपोर्ट मिल गई है। उसके तथ्यों के आधार पर उपाध्याय को चार्ज शीट दी जा रही है।

त्रिवेन्द्र पर आम तौर पर धीमी गति से कार्रवाई करने और सख्त रुख अपनाने में हिचकने के आरोप लगते रहते हैं। उन पर भ्रष्टाचार के बड़े स्थापित आरोप नहीं लगे हैं। फिर भी कामकाज हो या फिर भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई का मामला हो, उसमें वह तेजी नहीं दिखा पाए हैं। शराब के अफसरों और तकनीकी शिक्षा महकमे को तबाह करने के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई में बेहद वक्त लगने से भी सरकार पर अंगुली उठी है। पीडबल्यूडी के इंजीनियरों पर सख्त कार्रवाई कर के मुख्यमंत्री ने अपनी छवि को सुधारने और बदलने का फैसला किया है।

इस कड़ी में उन्होंने शराब के उन अफसरों को भी सबक सिखाने का फैसला किया है, जिन्होंने सरकार की नहीं बल्कि खुद के राजस्व की फिक्र की। सरकारी खजाने को दोनों हाथों से लूटा। इसके लिए कई रास्ते अपनाए। भ्रष्टाचार में डूबे होने और सरकारी खजाने को चोट पहुंचाने की फेर में वे लोगों के प्राणों से भी खेलने से नहीं हिचक रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अब ऐसे अफसरों को न बख्शने का फैसला किया ही नहीं है, बल्कि फटाफट कार्रवाई के लिए आला अफसरों को हिदायत भी दे डाली है।

आबकारी आयुक्त सुशील ने पूछे जाने पर `Newsspace’ को बताया कि मुख्यमंत्री ने ऐसे सभी अफसरों को चिहनित कर कार्रवाई करने का फरमान सुनाया है, जिनके कारण सरकार का खजाना और प्रतिष्ठा लुट रही है। देहरादून के डीईओ उपाध्याय के खिलाफ मुख्यमंत्री के आदेश पर ही जांच बिठाई गई थी। अपर आयुक्त स्तर पर की गई जांच रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट में उपाध्याय पर तमाम संगीन आरोप तथ्यों के साथ लगाए गए हैं।

सुशील ने कहा कि जो आरोप जांच रिपोर्ट में लगाए गए हैं, उनके आधार पर उपाध्याय को चार्ज शीट दी जा रही है। चार्जशीट एक अन्य अपर आयुक्त तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस बारे में कोई लिहाज आरोपी का न करने का हुक्म सुनाया है।

उपाध्याय पर तमाम आरोप हैं। इनमें शराब की दुकानों को सस्ते में देने, दुकानें बंद कराने, लाइसेन्स फीस लिए बिना दुकानें आवंटित करने, बिना बैंक गारंटी और सिक्योरिटी के दुकानें चहेतों को सौंप देने और एमएमजीटी तक न लेने के आरोप भी शामिल हैं। राजधानी के पथरिया पीर इलाके में जहरीली शराब पी के 7 लोगों की मौत होने के कारण पुलिस के ही नहीं बल्कि आबकारी महकमे के भी इंस्पेक्टर समेत कई लोग निलंबित कर दिए गए थे। इसके बावजूद डीईओ को उनके आकाओं ने सफाई से बचा लिया।

रायवाला में एक ट्रक में 465 पेटी अँग्रेजी शराब पुलिस ने पकड़ी थी। आबकारी महकमे ने इस पर कोई कार्रवाई करने के बजाए माल कोर्ट से छुड़वाने में मदद की। पुलिस के एक आला अफसर के अनुसार ये माल पूरी तरह अवैध था। वैध माल उतार के इस माल को ले जाया जा रहा था। बिना रवन्ना बदले। इसके बावजूद डीईओ उपाध्याय का बाल भी बांका नहीं हुआ। ये सारी रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पास पहुँच चुकी है।

सूत्रों के अनुसार उन्होंने आयुक्त को तलब कर पूरी रिपोर्ट ली है।  आरोपों का सामना कर रहे उपाध्याय के साथ ही मुख्यालय में कई अहम कार्यों को खुद ले के बैठे संयुक्त आयुक्त के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। अन्य जिलों में भी तैनात दागियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यालय में तैनात तथा सभी अहम व सरकार को झटके देने वाले फैसलों के लिए जिम्मेदार संयुक्त आयुक्त से भी तत्काल उनकी अहम ज़िम्मेदारी छीन के किसी और को देने के निर्देश दिए हैं। अभी ये भी देखने वाली बात होगी कि जो चार्ज शीट डीईओ उपाध्याय के खिलाफ मुख्यालय से जारी किया जाएगा, उसमें शासन स्तर पर पिछले साल की तरह छेड़छाड़ न हो।

पिछले साल न सिर्फ शासन स्तर पर उपाध्याय के खिलाफ चार्जशीट में आरोप बदल दिए गए थे, बल्कि महकमे के उस वक्त के एसीएस डॉ. रणवीर सिंह ने उल्टा शासन को ही घेरे में ले लिया था। उन्होंने लिख दिया था कि आरोपों में बल नहीं है। ये कहते हुए जांच को रद्द कर दिया था। गज़ब की बात ये है कि आरोप भी सरकार ने लगाया था। डॉ. सिंह ने ये निष्कर्ष बिना किसी जांच के निकाला था। ताज्जुब की बात ये है कि उपाध्याय के खिलाफ इतने आरोपों के बावजूद अभी तक उसको कुर्सी से हटाया तक नहीं गया है। कार्रवाई करना तो दूर की बात है। मुख्यमंत्री के नए तेवरों के बाद जल्दी ही कुछ न कुछ कठोर कदम शराब के दागी अफसरों पर नजर आएंगे।

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