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कोषाध्यक्ष को भनक नहीं और करोड़ों के बिल BCCI चले गए

उत्तराखंड खेल

वित्तीय घोटाले की आहट और CaU की धींगा-मुश्ती की मिसाल!

आखिर किसके दस्तखत से करोड़ों के बिलों को दी गई मंजूरी?

अभिनंदन और बयानों में व्यस्त BCCI उपाध्यक्ष पर अंगुली

Chetan Gurung

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के करोड़ों के बिलों पर आखिर कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी के दस्तखत क्यों नहीं कराए गए हैं? नेगी ने `Newsspace’ से कहा-`मुझे नहीं पता कि BCCI मान्यता मिलने के बाद कितना खर्च हुआ और कितने का बिल BCCI भेजा गया? मुझे नहीं पता कि बिलों पर किसके दस्तखत हुए हैं।’ कमाल के बात ये है कि खुद BCCI उपाध्यक्ष माहिम वर्मा कुछ समय पहले तक CaU के सचिव थे। सूत्रों के मुताबिक बिलों पर वर्मा और अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला के दस्तखत हैं।

सरकार के वित्त विभाग के अफसरों के मुताबिक, किसी भी सोसायटी या कंपनी में कोषाध्यक्ष के दस्तखत अनिवार्य हैं। अध्यक्ष और सचिव में से एक के दस्तखत हों तो चलेगा। CaU सूत्रों के मुताबिक BCCI ने 30 नवंबर 2019 तक का खर्च खुद देखने की व्यवस्था की थी। मान्यता के बाद हुए विजय हज़ारे, सीके नायडू, मुश्ताक अली समेत तमाम बीसीसीआई टूर्नामेंट्स के खर्चों से जुड़े बिल बीसीसीआई को भेजे गए। इन बिलों को बोर्ड ने वापिस भेज दिया है। ऐसा एसोसिएशन के सूत्रों ने खुद `Newsspace’ को बताया।

शुरुआती दौर में CaU के अध्यक्ष रहे हीरा सिंह बिष्ट ने पूछे जाने पर कहा कि इन बिलों में उनके कोई दस्तखत नहीं हैं। न ही दफ्तर स्थापित करने या फिर CEO समेत अन्य तमाम नियुक्तियों पर हुए खर्चों की फ़ाइल ही उनके पास मंजूरी या दस्तखत के लिए आए। उनको ये भी नहीं मालूम कि ये नियुक्तियाँ और खरीद का काम किसने किया और इसमें क्या खर्च आया। मौजूदा CaU अध्यक्ष गुनसोला अब अपना फोन बंद ही रखते हैं। उनको सिर्फ नाम का अध्यक्ष माना जा रहा है। वह सिर्फ उतना ही करते हैं, जितना कानपुर लॉबी से ईशारा मिलता है।

ऐसे में सारे खर्चों की फ़ाइल किसने तैयार के और किसने करोड़ों खर्च किए? इस पर अंगुली उठाई जा रही है। इसको उत्तराखंड खेलों की दुनिया में अभी से सबसे बड़ा घोटाला माना जाने लगा है। खुद CaU के कोषाध्यक्ष नेगी का ये कहना इस ओर ईशारा करता है कि उनके पास आज तक एक भी फ़ाइल और बिल दस्तखत के लिए नहीं आए। ये वित्तीय घोटाले की गंध कही जा सकती है। `Newsspace’ के पूछने पर नेगी ने कहा कि `मुझे नहीं पता अब तक कितना खर्च हो चुका है। कौन खर्च कर रहा है। कैसे खर्च हो रहा है। कौन बिलों पर दस्तखत कर रहा है।’

नेगी के मुताबिक अगर बिलों में गड़बड़ी हुई है और किसी किस्म का घोटाला हुआ है, तो उनको कोई फर्क इसलिए नहीं पड़ेगा कि उनके दस्तखत ही नहीं हैं। कायदे के मुताबिक अध्यक्ष और सचिव में से एक और कोषाध्यक्ष के दस्तखत बिलों में होने होते हैं। नेगी के बयानों से साबित होता है कि ऐसा न तो हुआ है न ही हो रहा है। ये सब इसलिए बहुत अहम हैं कि BCCI उपाध्यक्ष बनने से पहले माहिम के पास ही CaU सचिव का जिम्मा था। अभी भी नया सचिव नहीं बनाया गया है।

ऐसे में अंगुली उठाई जा रही है कि बिलों में कहीं बैक डेटों पर दस्तखत तो नहीं हो रहे हैं। गुनसोला कठपुतली अध्यक्ष कहे जा रहे हैं। तेज-तर्रार बिष्ट को वर्मा-कानपुर लॉबी की तरफ से अब दरकिनार कर दिया गया है। वर्मा और CaU चुनाव के बारे में खुद सुप्रीम कोर्ट की कमेटी CoA ने सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में ये सब मुद्दे प्रमुखता के साथ उठेंगे। ऐसा माना जा रहा है।  

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