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ऑडियो पर कार्रवाई,वीडियो पर खामोश क्यों सरकार?

उत्तराखंड देहरादून

DEO उपाध्याय की चार्जशीट शासन में कहाँ दब गई त्रिवेन्द्र जी?

आबकारी के सहायक आयुक्त के वायरल वीडियो में गंभीर आरोप

आबकारी आयुक्त सुशील को भी हटवाने में जुटी लॉबी!

Chetan Gurung

शराब महकमे में पिक एंड चूज और खास लॉबी को हर मुमकिन बचाने का जबर्दस्त खेल चल रहा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की इच्छा और आदेश के बावजूद उनकी जीरो टालरेंस नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही। जो खास लॉबी से नहीं, उसको निबटाया जा रहा। जो खास लॉबी का है, उसको बचाने और आगे बढ़ाने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। ताजा मामला खास लॉबी से जुड़े दो सहायक आयुक्तों से जुड़ा है। देहरादून के जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय की चार्जशीट सरकार में न जाने क्यों दबी हुई है, जबकि एक और सहायक आयुक्त प्रशांत मिश्र के खिलाफ एक वीडियो वायरल हुआ है। उस पर कोई कार्रवाई सरकार ने अभी तक नहीं की है।

त्रिवेन्द्र सरकार की नीतियों का इसे मज़ाक कहा जाएगा कि देहरादून के DEO के खिलाफ हर गुनाह माफ है। कलेक्टर सी रविशंकर के स्तर पर गड़बड़ियों को ले कर जांच कराई गई। इस जांच की रिपोर्ट बहुत ही संदिग्ध है। कलेक्टर को बताया गया कि जो मामले उठे थे, वे सुल्टा लिए गए हैं। ये मामले शराब की दुकानों को नाजायज लाभ देने और सरकार खजाने में राजस्व जमा न करने से जुड़े थे।

इसके बाद महकमे के स्तर पर संयुक्त आयुक्त और अपर आयुक्त स्तर पर जांच हुई। दोनों में उपाध्याय बुरी तरह घिरे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार चार्जशीट तैयार हो गई है। आबकारी आयुक्त सुशील कुमार इसको शासन को संस्तुति के साथ भेज चुके हैं। उन्होंने उपाध्याय के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की सिफ़ारिश की है। इसके बावजूद शासन चार्जशीट देने के बजाए, ले के बैठ गया है। ये वही शासन है जिसने एक महिला इंस्पेक्टर विष्णु को इस बिना पर ही बिना जांच के मुख्यालय से अटैच कर दिया कि उनके खिलाफ कोई ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो की पुष्टि भी नहीं हुई। विष्णु इस कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट चली गई हैं।

विष्णु के खिलाफ कार्रवाई तब मज़ाक लगती है, जब सहायक आयुक्त प्रशांत के खिलाफ वीडियो वायरल होने के बावजूद शासन आँखों-मुंह पर पट्टी बांधे बैठा है। वीडियो देख के लगता है कि उनके हरिद्वार में कार्यकाल के दौरान किस कदर शराब ठेकेदारों की जमात उनसे त्रस्त थी। विष्णु के खिलाफ कार्रवाई बिना सुबूत करने वाली सरकार अब वीडियो सामने आने पर क्यों कार्रवाई करने के बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठी है? आयुक्त सुशील के अनुसार उनके पास वीडियो की शिकायत आई है। वह इसका परीक्षण कराएंगे।

इस बीच अंदरखाने के खबर ये भी है कि महकमे की शक्तिशाली लॉबी को आयुक्त जांच नहीं रहे। सो उनको हटवाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाया जा रहा है। उनकी जगह अपने लिए मुफीद आयुक्त लाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए बीजेपी के बाद नेताओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये बात अलग है कि सुशील पर मुख्यमंत्री काफी यकीन करते हैं। आयुक्त से जुड़े निजी मसलों को भी सार्वजनिक करने के लिए इसी लॉबी को जिम्मेदार माना जा रहा है।

सुशील ने हाल ही में मुख्यालय में फेरबदल कर खास लॉबी को तगड़ा झटका दिया है। उनको हटा के ये लॉबी ऐसे नौकरशाहों को आयुक्त लाने की कोशिश में है, जो पहले भी इसी ज़िम्मेदारी पर रह चुके हैं। डीएम रह चुके हैं। मुख्यमंत्री इस लॉबी के फेर में फँसते हैं या उनको दंडित करते हैं, इस पर नजर सभी की है।

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