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अफसरों के खेल से `Scotch World’ में छिड़ा Price War

उत्तराखंड देहरादून

बहुत सस्ते हो गए Johnnie Walker ब्रांड    

Black Dog-100 Pipers के दामों में भी गिरावट

सरकारी खजाने को फिर करोड़ों का झटका

Chetan Gurung

शराब महकमे में साज़िशों के कारण अरबों के घाटे से गुजर रही उत्तराखंड सरकार को अफसरों ने बेहद खामोशी से एक और जबर्दस्त झटका दे डाला है। Johnnie Walker ब्रांड से संसार भर में मशहूर स्कॉच बनाने वाली दिग्गज कंपनी Diageo ने अपने सारे Labels की कीमतों में भारी गिरावट ला दी। इससे बड़े ब्रांड की सुरा के शौकीनों की तो मौज हो गई, लेकिन वित्तीय वर्ष के जाते-जाते सरकार को फिर अरबों का घाटा तय हो चुका है।

Diageo कंपनी के साथ ही United Spirit Limited ने भी अपने उत्पादों की कीमत में कमी कर दी है। इससे स्कॉच और सामान्य व्हिस्की-रम के बाजार की दुनिया में Price War छिड़ना अवश्यंभावी है। ऐसा हुआ तो सरकार के खजाने को जो नुक्सान होगा, उसकी सिर्फ कल्पना की जा सकती है। ये सभी ब्रांड ऐसे हैं, जो अमीरों और रसूखदारों के बेहद पसंदीदा हैं। इनका बहुत शानदार बाजार और मांग है।

Diageo के सुपर हिट उत्पाद ब्ल्यू लेबल, गोल्ड लेबल, ब्लैक लेबल, रेड लेबल को शायद ही कोई शराब का शौकीन नहीं जानता हो। USL का Black Dog भी बेहद लोकप्रिय ब्रांड है। इन कंपनियों ने अपने ब्रांड की कीमत इतनी कम कर दी है कि उसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ के रहेगा। Gold lebal जहां 7 हजार रुपए में आ रही थी, अब चार हजार के करीब में मिल रही है। इसके बैनर दुकानों के बाहर लग गए हैं।

कीमत कम तो दिसंबर में ही हो गई थी। नए साल में मांग रहने के कारण पुरानी कीमतों पर ही उनको बेचा गया। कीमत अब कम की। Black Lebal का जलवा पूरी दुनिया में है। कुछ दिनों पहले तक ये तकरीबन 4 हजार में मिल रही थी। अब ये 2800 में मिल रही है। Red Lebal तो 2300 से सीधे 1600 में आ गिरा है। सबसे ज्यादा गिरावट Diageo के ब्रांड में ही आई है। इसके साथ ही बाकी कंपनियों ने भी अपने उत्पादों की कीमत कम करना शुरू कर दिया है। बाजार में टिके रहने के लिए ऐसा करना उनकी मजबूरी है।

जो कंपनियां बाजार में टिके रहना चाहती हैं, उनको अपने ब्रांड की कीमत Diageo के उत्पादों से कम करना होगा। इसका मतलब 100 Pipers (Pernod Ricord कंपनी), Black Dog (USL कंपनी), Teachers (Beam Suntory कंपनी) जैसे ब्रांड भी बेहद सस्ते हो जाएंगे। ये सभी स्कॉच हैं। जब ये सस्ते होंगे तो फिर ब्लेंडर्स प्राइड, रॉयल चैलेंज, रॉयल स्टेग और उनसे छोटे वाले ब्रांड भी और सस्ते होंगे।

शराब की दुनिया के विशेषज्ञों के मुताबिक ये प्राइस वॉर लंबा खिंच गया तो सरकार को निश्चित रूप से बहुत नुक्सान पहुंचेगा। महकमे के अफसरों के मुताबिक कीमतों में गिरावट को रोक पाना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है। कंपनियों के साथ राज्य सरकार का अनुबंध है कि जो EDP (एक्स डिस्टलरी प्राइस) दिल्ली की होगी, वही उत्तराखंड में भी होगी। सरकार ने ये जो करार किया है, वही शक के दायरे में है।

ये सवाल बनता है कि उत्तराखंड सरकार आखिर क्यों किसी अन्य राज्य को EDP के लिए मानक माने। इसके पीछे महकमे के अफसरों और कंपनियों का खेल है। EDP के साथ ही टैक्स अर्जन के मामले में स्लैब बनाए गए हैं। ये स्लैब अगर बदल जाते हैं तो सरकार को टैक्स में 50 फीसदी से अधिक तक का नुक्सान उठाना पड़ सकता है। Diageo ने दिल्ली में अपनी EDP कम कर दी है। इसके कारण ही उत्तराखंड में भी शराब सस्ती हो गई है।

अब शराब सस्ती बिकेगी तो उस पर मिलने वाला मिनिमम गारेंटेड ड्यूटी (MGD) यानि टैक्स भी सरकार को कम मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक करार के बावजूद उत्तराखंड में दिल्ली वाली EDP पर शराब सीधे नहीं बेची जा सकती है। इसके लिए सरकार का अनुमोदन अनिवार्य है। ये बात अलग है कि सरकार को चूना लगाने वाली फ़ाइल को लटकाने की सेकंड भर भी कोशिश अफसरों ने नहीं की।

शराब के अफसर यूं तो फ़ाइल लटकाने और खराब करने के लिए चर्चित रहते हैं। ये समझा जा रहा है कि कंपनियों ने वित्तीय वर्ष खत्म होने के करीब होने और आर्थिक मंदी  के कारण उनके कारोबार में भी कमी आने के कारण दामों में गिरावट का फैसला किया है। उम्मीद ये भी जताई जा रही है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद सभी ब्रांड फिर महंगे होंगे।

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