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WIC के स्वामी सचिन उपाध्याय 420 में गिरफ्तार

उत्तराखंड देहरादून

मुख्यमंत्री के SIT जांच आदेश के बाद हुई कार्रवाई

विवादों की बढ़ती फेहरिस्त से सुर्खियों में पूर्व काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के भाई

Chetan Gurung

राजधानी के शौकीन किस्म के नव धनाड्यों के पसंदीदा क्लब World Integrated Centre (WIC) के स्वामी सचिन उपाध्याय लंबे समय से पुलिस और कानून संग लुका-छिपी खेलने के बाद आखिरकार IPC की धारा-420 में गिरफ्तार कर लिए गए। राजपुर थाना की पुलिस ने उनको उनके घर से तब गिरफ्तार किया, जब मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को स्पेशल इंवेस्टिगेटिव टीम (SIT) से धोखाधड़ी के आरोप में सचिन के खिलाफ जांच कराने की फरमान को तकरीबन आधा साल गुजर चुका है। सचिन पर चल रहे मामलों पर अभी तक कोई खास कार्रवाई नहीं हो रही थी। वह काँग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के छोटे भाई हैं। किशोर ND Tiwari की अगुवाई वाली काँग्रेस सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं।

सचिन के खिलाफ पुलिस और मुख्यमंत्री से शिकायत करने वाले मुकेश जोशी के मुताबिक वह लंबे समय से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन नौकरशाही और सरकार से उनको कोई मदद नहीं मिल पा रही थी। MDDA-आयुक्त अदालत में भी निराशा हाथ लगी थी। मजबूर हो के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द से गुहार की थी। उनको हकीकत बताई। इंसाफ की गुहार की। मामले की  गंभीरता देख मुख्यमंत्री ने विशेष जांच दल को जांच सौंप दी थी। सचिन और मुकेश कभी साथ मिल के काम करते थे।

मुकेश के मुताबिक सचिन और उनकी पत्नी नाजिया युसुफ ने उनके साथ जालसाजी की। उनकी कंपनी को फर्जी दस्तावेजों और कूट रचना के जरिये पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रख दिया। इस मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ। सियासी रसूख के चलते काँग्रेस सरकार में इस मामली को बंद कर दिया गया। अदालत ने इसकी हकीकत को समझ के फिर से जांच करने के आदेश दिए थे। दोनों पति-पत्नी ने अपनी कंपनी SM Hospitality में उनके शेयर फर्जी तरीके से स्थानांतरित करा लिए थे। इनकी कीमत 1.71 करोड़ रुपए थी। 17 जनवरी 2011 में इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस  की आर्थिक शाखा में भी की गई थी।

मुख्यमंत्री ने मामले को अत्यंत गंभीर पाते हुए पिछले साल 9 जून को इसकी SIT जांच के आदेश दे दिए थे। इस मामले में MDDA और गढ़वाल मण्डल आयुक्त की अदालत पर भी लगातार अंगुली उठती रही है। हैरानी की बात ये है कि रेकॉर्ड में WIC club सीज्ड है। इसके बावजूद क्लब धड़ल्ले से चल रहा है। ये भी आरोप है कि जो हिस्सा सचिन ने अपनी रिहाइश के लिए खोलने का अनुरोध किया था, उसमें भी क्लब ही चल रहा है। व्यावसायिक गतिविधि चलने के बावजूद प्राधिकरण आँखें मूँदे बैठा हुआ है।  

पुलिस के ताजा कदम और सचिन की गिरफ्तारी से राजपुर रोड स्थित WIC पर भी संकट के बादल मंडरा गए हैं। MDDA पर भी अब क्लब के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दबाव होगा। दूसरी ओर क्लब के पास सैकड़ों आजीवन और अन्य किस्म के सदस्य हैं। जो लाखों की मोटी फीस भर के क्लब के सदस्य बने हैं। क्लब पर किसी प्रकार की कार्रवाई होती है, और इसके संचालन में संकट आता है तो सदस्य खुद भी अदालत की शरण में जाने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

सचिन पिछले काफी समय से लगातार किसी न किसी किस्म के विवाद से घिरे हुए हैं। राजपुर रोड पर एक साल पहले हुई लूट मामले में भी WIC का नाम सुर्खियों में आया था। इस मामले में पुलिस वालों पर आंच आ गई थी।

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