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पिथौरागढ़ ट्यूलिप गार्डन:नौकरशाही-तंत्र ने बर्बाद की योजना!

उत्तराखंड देहरादून सम्पादकीय

नौजवान IFS अफसर विनय की बरसों की मेहनत पर पानी

CM की तारीफ के बावजूद खूबसूरत परियोजना पर ताले की नौबत

Chetan Gurung

पिथौरागढ़ में ट्यूलिप गार्डन प्रोजेक्ट के लिए युवा IFS अफसर विनय भार्गव ने दो साल तक खूब दौड़-धूप की। सरकार से ले के ONGC तक के धक्के खाए। बजट और CSR फंड के लिए। मदद तो मिली नहीं उल्टे नौकरशाहों और सरकारी तंत्र ने ही इस बेहद खूबसूरत और अभिनव योजना को तकरीबन ठिकाने लगा डाला है।

सबसे पहला धक्का तो इस योजना को तब लगा जब वन विभाग से इसको पर्यटन विभाग के हवाले कर दिया गया। ये फैसला हालांकि मुख्य सचिव स्तर पर हुआ। खुद वन विभाग के मुखिया ने हाथ खड़े कर दिए कि ये योजना उनके वश में नहीं है और न ही उनके प्याले की चाय ही है। इसके बाद शासन को ये फैसला करना पड़ा। पहले इसको उद्यान विभाग के हवाले करने पर भी विचार हुआ, लेकिन उसने भी इस पर काम कर पाने में असमर्थता जता डाली। मजबूरन पर्यटन विभाग को ये योजना सौंप दी गई।

पर्यटन विभाग के पास भी इस योजना पर अमल के लिए कोई ब्लू प्रिंट नहीं है। दरअसल ये योजना पिथौरागढ़ के DFO विनय भार्गव की सोच का नतीजा है। उन्होंने इसका ब्लू प्रिंट तैयार करने के साथ ही इसको पिथौरागढ़ के पर्यटन के नक्शे में प्रमुख स्थान दिलाने की कोशिश की। सरकार से पैसा न मिलने की सूरत में ONGC से CSR फंड में पैसा हासिल करने के लिए जम के मेहनत की। ONGC के अफसरों से मुलाकातें कीं। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसके प्रेजेंटेशन को देखने के बाद खुद विनय की भरपूर तारीफ की थी। योजना को बहुत खूबसूरत और महत्वाकांक्षी करार दिया था।

इसमे शक नहीं कि ये योजना साकार हो जाए तो पिथौरागढ़ के लिए ये बहुत बड़ी नेमत साबित होती। अंदरखाने की छन कर आती खबरों के मुताबिक खुद वन विभाग के ही वरिष्ठ अफसरों ने इस योजना पर पाला डालने में अहम भूमिका निभाई। अहम कुर्सी पर बैठे एक आला IFS ने इस योजना के बारे में शासन के आगे हाथ खड़े कर दिए। बिना उस अफसर की राय लिए, जो इसको अंजाम देने के लिए लंबे समय से मेहनत और भाग दौड़ कर रहे थे। शासन से भी इस मामले में कोई खास मदद नहीं मिली।

दिवंगत मंत्री और स्थानीय विधायक प्रकाश पंत की बड़ी इच्छा थी कि ट्यूलिप गार्डन साकार हो। उन्होंने खुद कई बार DFO विनय से इस बारे में चर्चा कर उनको जरूरी निर्देश दिए थे। फिलहाल, ये परियोजना उस पर्यटन विभाग के हवाले है, जिसके विभागीय अधिकारियों को न इस योजना में दिलचस्पी है न ही इस बारे में कुछ जानकारी ही रखते हैं। वे इसको बोझ की तरह ले के चल रहे हैं। सरकारी तंत्र में वैसे ही नौकरशाह-बाबू काम करने को राजी नहीं है। ऐसे में काम करने की इच्छा-जिजीविषा रखने वाले नौकरशाहों को हतोत्साहित कर दिया जाना राज्य के हक में बिल्कुल नहीं है।

2009 बैच के विनय अपने जोश और काम के चलते पहचान बना रहे हैं। ट्यूलिप गार्डन उनका बेबी है, लेकिन अब उनको इससे पूरी तरह अलग कर दिया गया है। पर्यटन विभाग फिलहाल सिर्फ एक हेक्टेयर जमीन पर इस योजना को उतारना चाहता है। मूल योजना में ये गार्डन 50 हेक्टेयर जमीन पर तैयार होना था। अभी तक का आलम तो खुद वन विभाग की उदासीनता और तंत्र के ढर्रे के चलते इस खूबसूरत योजना पर ताले लगाने वाला है।

विनय ने मुन्श्यारी और पिथौरागढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी अपने स्तर पर खासा काम किया है। चंडाक रोड पर बना शानदार-खूबसूरत गेस्ट हाउस हो या फिर मुन्श्यारी में बनाए गए स्विस हट, पर्यटकों के लिए ये बेहतरीन सुविधा है। मुन्श्यारी में पर्यटकों के लिए रहने के लिए शानदार व्यवस्था हो चुकी है। ये हैरत-विडम्बना है कि एक अफसर जो इस योजना पर काम कर रहा था, उसके महकमे से ही काम वापिस हो गया और उस महकमे को सौंप दिया गया, जो इसको करना ही नहीं चाहता।

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