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उत्तराखंड क्रिकेट:बाहरी दखल-शर्मनाक प्रदर्शन पर गरम रहा माहौल

उत्तराखंड खेल देहरादून

माहिम और धनंजय मिश्रा के दखल पर भी जम के बहस

उपाध्यक्ष संजय रावत-कोषाध्यक्ष पृथ्वी ने उठाए कड़े सवाल

आज फिर बुलाई गई है एपेक्स काउंसिल बैठक

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट की कमान थामे बैठी क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में बाहरी लोगों के दखल और रणजी ट्रॉफी में बदतरीन-शर्मनाक प्रदर्शन पर एपेक्स काउंसिल की अहम बैठक में माहौल बेहद गर्म रहा। खास तौर पर उपाध्यक्ष संजय रावत और कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी ने न सिर्फ गहन नाराजगी जताई बल्कि बैठक का तापमान खूब गर्म रखते हुए फिक्र जताई कि क्रिकेट के विकास और एसोसिएशन को बेदाग रखने के लिए ठोस कार्रवाई करनी होगी। बैठक आज फिर होगी।

बैठक का एजेंडा CAU बताने से बच रही और आखिरी पलों तक खुद एसोसिएशन के ओहदेदार भी नहीं जानते थे कि एपेक्स काउंसिल में आखिर किन बिन्दुओं पर चर्चा होनी है। अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला की अध्यक्षता में EC road पर IDA होटल में हुई बैठक में उपाध्यक्ष संजय और कोषाध्यक्ष पृथ्वी ने इस बात पर भी ऐतराज जताया कि कैसे काउंसिल या एसोसिएशन में अहम भूमिका न रखने वाले या फिर बाहरी लोग उत्तराखंड क्रिकेट को अपने इशारे से चलाने में जुटे हुए हैं? उन्होंने कहा कि इसके चलते न सिर्फ उत्तराखंड क्रिकेट का सत्यानाश हो रहा बल्कि बदनामी भी हो रही है।

संजय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के भतीजे हैं। इसके चलते सरकार पर भी क्रिकेट में धांधली से छींटे पड़ रहे हैं। संजय-पृथ्वी बैठक में बहुत आक्रामक दिखे। अध्यक्ष खामोशी से सिर्फ सुनते रहे। बैठक में ये मुद्दा जम के उठा कि कोचिंग सेंटर चलाने वाले धनंजय कुमार मिश्र आखिर किस हैसियत से एसोसिएशन के दफ्तर में आते हैं और अहम मामलों में दखल देते हैं? मिश्र को सिर्फ एक टूर्नामेंट का निदेशक बनाया गया था। एसोसिएशन में वह कुछ नहीं हैं। ये फैसला हुआ कि मिश्र के CAU दफ्तर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए। इसके साथ ही UP के लोगों के भी CAU की गतिविधियों में गैर जरूरी दिलचस्पी दिखाने को ले कर मुद्दा उठा। इस पर आज भी बैठक में चर्चा होगी।

UPCA के सचिव युद्धवीर सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला के खासमखास अकरम सैफी के खिलाफ क्रिकेट में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में मुकदमे हो चुके हैं। दोनों के साथ CAU के रिश्तों पर भी अंगुली बैठक में उठाई गई। CAU के ही सदस्यों की तरफ से मिले ज्ञापन पर भी खूब चर्चा हुई। ज्ञापन में गुरचरण सिंह, राजीव जिंदल समेत कई लोगों के दस्तखत हैं। ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि उत्तराखंड क्रिकेट न सिर्फ इतनी जल्दी विवादों में फंस गई है, बल्कि खेल का स्तर भी गिर गया है। तमाम आरोप एसोसिएशन पर लग रहे हैं, जो उचित नहीं है। बैठक में खास बात ये रही कि BCCI उपाध्यक्ष माहिम मौजूद नहीं थे। वह पिछली बार बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर एपेक्स काउंसिल बैठक में आए थे।

इस बारे में काउंसिल के एक प्रमुख ओहदेदार ने कहा कि माहिम का CAU से कोई वास्ता क्यों रहना चाहिए? वह देश की क्रिकेट देखें। उत्तराखंड की कोई दिक्कत होगी तो हम बता देंगे। वह तब समाधान BCCI से कराएं। विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर उनको एक बार एपेक्स काउंसिल बैठक में मौजूद रहने दिया था, जो सम्मान स्वरूप था। आगे इसकी जरूरत नहीं। बैठक लंबी खिंचने के कारण इसको आज के लिए भी रख लिया गया है। अभी सचिव की खाली कुर्सी के बारे में भी फैसला होना है। इस ज़िम्मेदारी को भी अभी अध्यक्ष ही खुद देख रहे हैं, जो विधिक तौर पर गलत कहा जा सकता है। इस कुर्सी के लिए जल्द चुनाव कराने पर एपेक्स काउंसिल को फैसला करना है।

उत्तराखंड क्रिकेट का हाल ये है कि CAU अभी तक अपनी दो दर्जन के करीब की अहम समितियों का गठन तक नहीं कर पाया है। इसके चलते क्रिकेट गतिविधियां सुव्यवस्थित ढंग से नहीं चल पा रही है। आज भी बैठक में कई अहम मुद्दों पर गर्मागर्म बहस होने की संभावना जताई जा रही है। एसोसिएशन से बाहर और एपेक्स काउंसिल के सदस्य न होने के बावजूद एक खास लॉबी के प्रभुत्व पर ओहदेदारों ने कहा कि उत्तराखंड क्रिकेट किसी की बपौती नहीं है। न ही किसी का कोई अहसान है। इसको कंपनी की तरह क्रिकेट और खिलाड़ियों के हित में चलाया जाएगा। खुद को उत्तराखंड क्रिकेट के अलमबरदार मानने वालों को भी सख्ती से ये बात समझा दिया जाएगा। आगे की पीढ़ी क्रिकेट को बेहतर ढंग से संचालित कर सकती है।  

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