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फर्जी Appointments:BCCI ने लौटाए निदेशक-वेन्यू मैनेजर के बिल

उत्तराखंड खेल देहरादून

CAU कोषाध्यक्ष:नियुक्ति वैधता जांच के बाद ही होगा हर भुगतान

विवादास्पद UPCA के लोगों को ले कर अंदरखाने बवाल

विनोद राय ने यूपी के प्रभाव में CAU चुनाव का लगाया था आरोप

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में विवादों की सुनामी थमने के आसार नहीं दिख रहे। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के संयुक्त सचिव रहते माहिम वर्मा ने टूर्नामेंट निदेशक और वेन्यू मैनेजर नियुक्त कर दिए थे। BCCI ने उनके मेहनताने और खर्चों से जुड़े सारे बिल ये कहते हुए लौटा दिए कि, ये पद उसके अस्तित्व में ही नहीं है। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी ने इसकी पुष्टि करने के साथ ही ये भी कहा कि वह भी सभी खर्चों से जुड़े बिलों के भुगतान के लिए दस्तखत तभी करेंगे, जब खर्चों की वैधता सत्यापित होगी। ये देखा जाएगा कि खर्च से जुड़े शख्स की नियुक्ति सही ढंग से हुई है या नहीं। नहीं हुई होगी तो बिल को पास नहीं किया जाएगा।

CAU में UPCA के कुछ ओहदेदारों और खास लोगों के गैर वाजिब दखल को ले के भी बवाल की नौबत है। UPCA के सचिव युद्धवीर सिंह और एक पूर्व मंत्री के विश्वासपात्र के खिलाफ घूसख़ोरी में मुकदमा दर्ज होने से भी कोहराम की नौबत है। टूर्नामेंट निदेशक और वेन्यू मैनेजर की नियुक्तियाँ आज के BCCI उपाध्यक्ष माहिम ने की थी। ये बात अलग है कि उनके संयुक्त सचिव रहते की गई इन नियुक्तियों को ले के भी CAU में अंगुली उठाई गई है। वह बाद में सचिव बने लेकिन नियुक्तियों के वक्त उनके पास किसी किस्म के अधिकार नहीं थे। न ही उन्होंने किसी से इसके लिए मंजूरी ली थी। नेगी ने कहा कि ऐसी नियुक्तियों से जुड़े बिलों का भी पूरा सत्यापन होगा। उसकी वैधता भी पारखी जाएगी।

BCCI के ऐतराज के बाद टूर्नामेंट निदेशक और वेन्यू मैनेजरों का मेहनताना डूबने के आसार बन गए हैं। टूर्नामेंट निदेशक और वेन्यू मैनेजरों की तादाद काफी हैं। वेन्यू मैनेजर हर स्टेडियम-मैदान के लिए अलग-अलग थे। सूत्रों के मुताबिक इनकी नियुक्तियों में सिर्फ सिफ़ारिश और अपने करीबी होना ही मानक था। वेन्यू मैनेजर को रोजाना 8-9 हजार तक दिए जाने की व्यवस्था की गई है। टूर्नामेंट निदेशक का मेहनताना और ज्यादा है। इस बात को ले कर हैरानी जताई जा रही है कि आखिर जो पद BCCI के ढांचे में हैं ही नहीं, उस पद पर नियुक्तियाँ कैसे कर दी गई? इसके लिए अकेले माहिम जिम्मेदार हैं या किसी अन्य का भी इसमें हाथ है? जो पर्दे के पीछे हो। उस वक्त के अध्यक्ष और सचिव ने माहिम के इन फैसलों पर क्यों आपत्ति नहीं की? क्यों इन नियुक्तियों को आँख मूँद के समर्थन दिया? उनकी कोई मजबूरी थी या विशेष दिलचस्पी? क्या उनको BCCI के बाई लॉज के बारे में कोई जानकारी नहीं थी? नहीं थी तो फिर CEO अमृत माथुर से क्यों इस बारे में राय नहीं ली गई?

माथुर को BCCI के बारे में बारीक से बारीक जानकारी है, फिर भी ऐसी गलती कैसे हो गई? या माथुर को कुछ नहीं बताया गया। क्या माथुर खुद भी जानते-बूझते इन नियुक्तियों के हक में थे? नियमों का ख्याल रखना और ओहदेदारों को उसके बारे में जानकारी देने का फर्ज भी उनका ही है। फिर क्यों ये सब गड़बड़ियाँ हुईं? प्रशिक्षकों-चयनकर्ताओं की नियुक्तियाँ भी बिना कोई प्रक्रिया अपनाए माहिम ने ही की। ये सवाल उठने लगा है कि माथुर क्या करते रहे?

CAU के ही एक बड़े ओहदेदार ने बताया कि CEO को तकरीबन 80 लाख के सालाना पैकेज पर रखा गया है। इतनी भारी कीमत पर रखे गए CEO से ऐसी लापरवाही की उम्मीद नहीं की जा सकती है। माथुर BCCI में भी लंबे समय तक रहे हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के साथ भी दौरों पर जाते रहे हैं। CAU उनसे इसलिए भी नाखुश है कि वह CAU के लिए देहरादून का राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का करार नहीं करा सके। इस स्टेडियम को CAU अपना घरेलू स्टेडियम बनाना चाहता है।

CAU में इस बात को ले कर बहुत नाराजगी है कि रणजी ट्रॉफी में उत्तराखंड ने बहुत ही लज्जाजनक खेल दिखाया। चयनकर्ताओं और प्रशिक्षकों ने टीमों का चयन आखिर किस तरह किया। किसी टूर्नामेंट में उत्तराखंड का प्रदर्शन अलग है और किसी अन्य में एकदम अलग। ऐसा क्यों हो रहा? अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला इस मामले में खामोशी का रुख अख़्तियार किए रहते हैं। उपाध्यक्ष संजय रावत, प्रभारी सचिव अवनीश वर्मा और कोषाध्यक्ष नेगी अब मुखर हो गए हैं। रावत ने इस बात पर भी एपेक्स काउंसिल बैठक में मुद्दा उठाया कि एसोसिएशन में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी उनको या सभी को क्यों नहीं दी जाती है।

उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (UPCA) के लोगों के उत्तराखंड में अंदरखाने दखल से भी वे नाराज हैं। खास तौर पर UP में जिस तरह एसोसिएशन के सचिव युद्धवीर सिंह और BCCI के पूर्व उपाध्यक्ष के करीबी पर चयन में घूस खाने और इसके बावजूद चयन न करने के आरोप लगे हैं, उससे CAU में खास लॉबी बहुत नाराज है। उनका कहना है कि UP वालों को आखिर तवज्जो क्यों दी जाए, जबकि उनका इतिहास और वर्तमान दागदार है।

सुप्रीम कोर्ट गठित CoA के अध्यक्ष विनोद राय तक ने CAU चुनाव को ले के कठोर प्रतिक्रिया आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट को दी थी कि उत्तराखंड के चुनाव UPCA के गहरे प्रभाव में हुए। वहाँ महिला और पुरुष क्रिकेट टीम के चयन में जबर्दस्त लेन-देन और सिफ़ारिशें चलने के आरोपों के चलते बदनामी के बादल और पुलिस जांच मंडरा रही है। CAU के लोगों का उनके साथ करीबी रिश्ता रखना घातक साबित हो सकता है।

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