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पंतनगर विवि में भर्तियों का खेल! विवादित AMIE तोमर भी शॉर्टलिस्ट

Tech उत्तराखंड

निदेशकों-डीन की भर्ती में चयन समिति-प्रशासन पर किसका दबाव?

प्रोफेसरों में नाराजगी-नाखुशी का आलम,सरकार से करेंगे शिकायत

Chetan Gurung

पंतनगर विवि (कृषि-प्रौद्योगिकी) में निदेशकों-डीन की भर्तियों को ले कर विवि प्रशासन संदेह-आरोपों के घेरे में आ गया है। ये दावे किए जा रहे हैं कि इंटरव्यू सिर्फ दिखावे के लिए हो रहे हैं। वे नाम पहले से तय हैं, जिनका चयन होना है। आरोपों की चिंगारी को पेट्रोल के साथ हवा भी मिल रही है। इंटरव्यू के लिए बहुचर्चित गीतम सिंह तोमर के भी पहुँचने से विवि में अंदरखाने भी बेहद  नाराजगी का आलम है। B-Tech की कुर्सी के लिए AMIE तोमर को इंटरव्यू के लिए कैसे चुना गया, इस पर विवि के ही प्रोफेसर और अन्य स्टाफ बेहद हैरान हैं।

तोमर THDC-IHET, टिहरी में निदेशक हुआ करते थे। उन्होंने वहाँ भी खुद को B-Tech बता के कुर्सी हासिल कर ली थी। आवेदन पत्र में भी उन्होंने खुद को B-Tech ही लिखा था। AMIE नहीं। दोनों डिग्रियों को समकक्ष बता के शासन को गुमराह किया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सम्मुख जब मामला पहुंचा, तो उन्होंने मामले का परीक्षण कराया। जब उन्होंने समकक्ष और समतुल्य के भेद को जाना, तब तोमर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया गया था। BA,BSc,Bcom,B-Tech,B.E समेत कई अन्य डिग्री कोर्स समकक्ष हैं। उनको समतुल्य नहीं कहा जा सकता है। B-Tech या BSc योग्यता हो तो BA या Bcom वाला इन पदों के लिए बुलाया ही नहीं जाएगा।  

तोमर के साथ जुड़ी लॉबी ने सरकार को ये कह कर घुमाने की कोशिश की थी कि B-Tech और AMIE समकक्ष हैं। इसमें आपत्तिजनक तथ्य ये थे कि अगर दोनों एक हैं तो फिर तोमर ने खुद को AMIE क्यों नहीं बताया? क्यों तथ्य छुपा के खुद को B-Tech बताया? AMIE डिप्लोमा धारी जूनियर इंजीनियरों के लिए लागू सुविधा है, जो सेवा में रहते हुए, कर सिर्फ AE में प्रोन्नति के लिए कर सकते हैं। सीधे AE बनने के लिए B-Tech या फिर समतुल्य B.E की डिग्री जरूरी है। ये भी कि आवेदन पत्र में तथ्यों को छुपाया जाता है और चयन के बाद भी ये बात पकड़ में आती है, तो चयन तत्काल रद्द हो सकता है।

पंत नगर कृषि विवि में तोमर का नाम आखिर किस तरह इंटरव्यू के लिए शॉर्ट लिस्ट हुआ, इस पर हैरानी जताई जाने के साथ ही भ्रष्टाचार तथा गहरी साजिश का आरोप लग रहे हैं। जिस शख्स को बर्खास्तगी के बाद UP-MP या अन्य कहीं भी नौकरी नहीं मिली, वह फिर से उत्तराखंड खामोशी संग कैसे लौट आया? आखिर कौन लोग उसको उत्तराखंड सिस्टम में मदद कर रहे हैं? उत्तराखंड में एक से के काबिल प्रोफेसर स्तर के लोग बेरोजगार और काम की तलाश में मारे-मारे फिर रहे हैं। ऐसे में विवादित और अयोग्य नाम को कैसे इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया?

तोमर ने College of Technology प्रमुख के लिए आवेदन किया था। विवि के ही कई काबिल लोगों ने इस पद के लिए आवेदन किए थे। उनके नाम छंटनी में बाहर कर दिए गए। जो योग्यता रखते थे। उन्होंने `Newsspace’ से कहा-जिसकी डिग्री ही सही न हो, उसको योग्य लोगों पर तरजीह दे के इंटरव्यू में कैसे बुला लिया गया? जो योग्य थे, उनके नाम आखिर स्क्रूटनी समिति ने कैसे हटा दिए? इसकी सतर्कता जांच होनी चाहिए। या फिर मुख्यमंत्री को इस पर भी SIT बिठा देनी चाहिए। आखिर सवाल भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस का है।

विवि में भर्तियों का आलम सतह पर आ चुका है। खुल के कहा जा रहा-सभी पर नाम तय हो चुके हैं..कौन क्या बनेगा..`Newsspae’ के पास नामों की सूची है..। इसमें बताया गया है। कौन निदेशक College of Home Science और कौन Director Reserch होगा। (वैसे reserch में एक पूर्व कुलपति के दामाद के चुने जाने की चर्चा उफान पर है)। College of Vet Sciences..College ऑफ CBSH..College of Technology ..इन सभी कुर्सियों के लिए भी चेहरे तय बताए जा रहे हैं। `Newsspace’ चयन सूची जारी होने के बाद अपने पास मौजूद लिस्ट को भी सार्वजनिक करेगा।

लिस्ट तकरीबन भी मिल जाती है तो फिर इससे बड़ा घोटाला..जीरो टालरेंस का मज़ाक कोई नहीं होगा। चयन प्रक्रिया से नाराज-नाखुश लोगों के आरोप हैं-जो  काबिल हैं, उनको स्क्रीनिंग में ही Out कर दिया। हर सब्जेक्ट के experts अलग-अलग होते हैं..। विवि प्रशासन ने सभी के लिए एक ही expert समिति बना दी। एक ही समिति हर विभाग की विशेषज्ञता कैसे रख सकती है? विवि से ही कई प्रोफेसरों ने आवेदन में खुद को नाकारे जाने के बाद अब सरकार तक आवाज उठाने का फैसला किया है। उनका तर्क है कि आखिर दागी और अयोग्य होने के साथ ही कभी किसी सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर तो दूर असिस्टेंट प्रोफेसर तक न रहे, आरोपों से घिरे तोमर को कैसे उन पर तरजीह दे दी गई?

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Chetan Gurung

1 comment

Dr A K Singh February 17, 2020 at 11:26 am

Prof Tomar is continuously cooperating V C UTU and attending meetings with the Director WIT unofficially. Also he is trying to become as Professor anywhere in Uttarakhand. He has intimated his followers that very soon C M will be replaced than he must be back in power with the help of beurocrates of Uttarakhand. A very fraud gang of peoples having fake degrees, terminated many times are working as director in Uttarakhand. It becomes a challenge to this government as they are having very high and powerful connections.

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