भारत को निशाना’ बनाने वाले सीनियर हक़्क़ानी की मौत

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अफ़गान तालिबान ने घोषणा की है कि चरमपंथी गुट हक़्क़ानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक़्क़ानी की एक लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई है.

हक़्क़ानी का चरमपंथी गुट अफ़ग़ानिस्तान में भारत के ठिकानों पर कुछ हमलों के लिए ज़िम्मेदार माना जाता रहा है.

साल 2008 में काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए हमले में 58 लोग मारे गए थे.

भारत का कहना था कि इस हमले के पीछे हक़्क़ानी नेटवर्क का ही हाथ था.

इसी गुट पर अफ़ग़ानिस्तान भारत के अलावा कई देशों के दूतावासों, अफ़ग़ान संसद की इमारत, स्थानीय बाज़ारों और कई अमरीकी सैन्य अड्डों पर हमले के लिए ज़िम्मेदार बताया जाता है.

ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान की संसद के भवन का निर्माण भारत के सहयोग से ही हुआ है.

वो अफ़ग़ानिस्तान में अहम शख़्सियत थे और उनके तालिबान के अलावा अल-क़ायदा से भी नज़ीदीकी रिश्ते थे.

हाल के वर्षों में हक़्क़ानी नेटवर्क ने अफ़ग़ान और नेटो सेनाओं के कई ठिकानों पर सिलसलेवार हमले किए हैं. ऐसा माना जाता है कि साल 2001 के बाद से हक़्क़ानी नेटवर्क की कमान जलालुद्दीन हक़्क़ानी के बेटे को थमा दी गई थी.

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