यहां एक बोतल दूध की कीमत 5.34 लाख रुपए है

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आजकल साउथ्‍ा अमेरिकी महाद्वीप के चर्चित देश वेनेजुएला में सामान खरीदने के बदले दुकानों पर नोटों को गिनकर देने की बजाय तौलकर देना पड़ता है? दरअसल महंगाई बढ़ने के चलते वहां पर नोटों की संख्या बेहद बढ़ गई है. इसीलिए दुकानदार अब गिनकर नहीं तौलकर नोट ले रहे हैं.

जी हां वेनेजुएला की करेंसी बॉलिवर 20 साल पहले दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी में से एक थी. देश की अर्थव्यवस्था भी 7 फीसदी से ज्यादा की रफ्तार से ग्रोथ कर रही थी. लेकिन क्रूड में आई भयंकर गिरावट के बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.

महंगाई दर बढ़कर 1000 फीसदी हो गई है. एक अंडे की कीमत 7333 बोलिवर (करीब 46,564 रुपए) हो गई. जबकि, एक दिन की मजदूरी 5333 बोलिवर (करीब 33,864 रुपए) है.

लोगों को हफ्ते में सिर्फ 3-4 दिन ही खाना मिल पा रहा है. कुछ लोगों को कई महीनों से भरपेट भोजन भी नसीब नहीं हुआ है. इससे वहां के लोगों का वजन कम हो गया है.

वेनेजुएला में जैसे ही दूध के ट्रक आते हैं, या तो वे लूट लिए जाते हैं या फिर दूध लेने के लिए कई किलोमीटर लंबी कतार लग जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बोतल दूध के लिए वहां 84000 बोलिवर (करीब 5.34 लाख रुपए) चुकाने पड़ रहे हैं.

ऐसे बिगड़े वेनेजुएला के हालात: दुनिया के बड़े क्रूड ऑयल रिजर्व वाले और एक्सपोर्ट करने वाले इस देश की इकोनॉमी के डूबने के पीछे यही क्रूड कारण बना. इससे कभी देश की इकोनॉमी में बड़ा उछाल आया था, लेकिन क्रूड कीमतों में गिरावट के साथ-साथ देश की आय में तेजी से गिरावट आई है. इससे कंपनियां कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गई हैं और देश की करंसी की वैल्यू घटने का सबसे ज्यादा असर महंगाई पर हुआ है. इसके अलावा सरकार की खराब पॉलिसी के चलते देश में बेरोजगारी दर 7 फीसदी से बढ़कर 20 फिसदी हो गई है. माना जा रहा है कि 2022 में यह 26 फीसदी हो सकती है. फिलहाल वेनेजुएला पर कुल 6000 करोड़ डॉलर करीब 3.90 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है.

वेनेजुएला में 1989 में जब वैश्विक बाजार में तेल के दामों में कमी के चलते देश में आर्थिक संकट पैदा हो गया था. सरकार के इस फैसले के बाद व्यापक हिंसा भड़क गई थी, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे. पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने अपने कार्यकाल के दौरान 14 साल तक तेल के दामों को स्थिर बनाए रखा. वेनेजुएला की कुल आय का 95 फीसदी हिस्सा तेल के एक्सपोर्ट से आता है. तेल की कम होती कीमतों के चलते वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है.

अमेरिकी देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मडुरो ने जून की शुरुआत में आर्थिक आपातकाल को और आगे बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि अर्थव्यवस्था को संकट से निकाला जा सके. आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित राष्ट्रपति के आदेश में कहा गया है कि इसका लक्ष्य आर्थिक संग्राम में वेनेजुएला की रक्षा करना है.

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