एक बार मे तीन तलाक को एक मानना मतलब शरीयत को बदलना है: सज्जादानाशीन

0
202
views

आज दरगाह आला हज़रत पर दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना अल्हाज़ सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सदरात में 38 वा एक रोज़ा उर्स ए नूरी मनाया गया। आगाज़ बाद नमाज़ ए फज़र कुरानख्वानी से हुआ। तिलावत कारी रिज़वान अहमद ने की। मिलाद का नज़राना हाजी गुलाम सुब्हानी ने पेश किया। देर रात एक बजकर चालीस मिनट पर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।

उर्स के मौके पर दरगाह आला हज़रत के सज्जादानाशीन व तहरीक़ ए तहफ़्फ़ुज़ ए सुन्नियत के मरकज़ी सदर मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी अहसन मियां ने हाल ही मे मरकज़ी हुक़ूमत द्वारा तीन तलाक पर लाये गए अध्यादेश पर बोलते हुए उलेमा व अक़ीदतमंदो से कहा कि क़ुरान और हदीस में जिन बातों का ज़िक्र है हम सब उसी पर अमल करें। इस्लामी कानून से हटकर अगर कोई कानून बनता है, जिससे पर्सनल लॉ में दखलअंदाज़ी हो हरगिज़ क़ुबूल नही है। वही उन्होंने आगे कहा कि मज़हब ए इस्लाम में तलाक को नापसंदीदा अमल में शुमार किया गया है।

एक वक्त में तीन तलाक देने से तलाक हो जाएगी लेकिन शरीयत में इसे नापसंद किया गया है। जायज़ बातों में अल्लाह के नजदीक सबसे नापसंदीदा अमल तलाक है। अगर किसी बात को लेकर मियां-बीबी (पति-पत्नी) में तकरार है और नोबत तलाक तक पहुँच जाए तो एक वक्त में एक ही तलाक दे ताकि सुलह की गुंजाइश बनी रहे। तीन तलाक देने से तलाक हो जाएगी। इस सूरत में तलाक से औरत की जान की हिफाज़त हो जाएगी। किसी औरत की जान पर बन आए इससे पहले तलाक दे कर उससे अलग होना ही बेहतर है।

वही मुल्क़ भर से आये उलेमा ने कहा कि मुस्लिम औरतो की हुक़ूमत को इतनी फिक्र है तो पहले ज़किया जाफरी, बिलकीस बानो, कौसर बी,अखलाक, नजीब, पहलू खान, मिनहाज़ अंसारी की माँ को इंसाफ दिलाया जाए। साथ ही हुकुमत दहेज़ पर भी कानून बनाये जिसके लिए औरतो को जला कर मार दिया जाता है।

मौलाना मुख्तार बहेड़वी, मुफ़्ती सलीम नूरी, मुफ़्ती आकिल रज़वी,मुफ़्ती अयूब,कारी अब्दुर्रहमान खान, कारी इकबाल, मौलाना ज़िकरुल्लाह, कारी अमानत रसूल, फ़ारूक़ मदनापुरी आदि ने मुफ़्ती ए आज़म हिन्द के दीनी खिदमात पर रोशनी डाली।

निज़ामत (संचालन) कारी यूसुफ रज़ा संभली ने की।
उर्स की व्यवस्था टीटीएस के हाजी जावेद खान, शाहिद खान, अजमल नूरी, नासिर कुरैशी, शान रज़ा, औरंगज़ेब नूरी, नावेद रज़ा,परवेज नूरी, शान रज़ा, ताहिर अल्वी, गौहर खान, तारिक सईद, मोहसिन रज़ा, मंज़ूर खान, इशरत नूरी, आलेनबी, मुजाहिद बेग, जावेद खान, यासीन नूरी, ज़ुबैर रज़ा, आसिफ रज़ा, इरशाद खान, हाजी अब्बास नूरी, यामीन कुरैशी, जुहैब रज़ा, सय्यद माज़िद अली, नईम नूरी, इरफान रज़ा, साबिर खान, मोनिस रज़ा, सय्यद फरहत आदि ने संभाली।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here