दून अस्पताल के डॉ सुशील ओझा ने रीवा आँखों की लौटायी रोशनी!

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मंगलवार को दून अस्पताल के आई वार्ड की ओटी में लगभग 11 लोगों की आंखों का सफल ऑपरेशन किया गया जिनमें अरीबा 6.5 साल की है मेहूँवाला देहरादून के निवासी सलीम सिद्दीकी की 6.5 साल की बेटी अरीबा विजन के कमजोर पड़ने की शिकायत के साथ दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयी थी।

डॉ सुशील ओझा एचओडी नेत्र दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा लगभग 1 हफ्ते तक लगातार जांच की गई थी। जब अरीबा को दून अस्पताल लाया गया तो डॉ सुशील ओझा ने पूछताछ की जिसपर माता-पिता ने बताया कि उन्हें सर गंगाराम अस्पताल नई दिल्ली में 6 महीने की उम्र में जन्मजात मोतियाबिंद के लिए ले जाया गया था जिसका ऑपरेशन देश के जाने माने डॉ एस एन झा द्वारा किया गया था।

उस समय देहरादून के दून अस्पताल में ऐसी मशीनें एंवम सर्जरी उपलब्ध नही थी डॉ सुशील ओझा जैसे बड़े डॉक्टरों के दिशा निर्देश में आज उत्तराखंड ऐसी कृतिम सर्जरी को करने में सक्षम है। डॉ सुशील ओझा को पूरे उत्तराखंड की जनता सलाम करती है।

6 माह की उम्र में जब अरीबा का दिल्ली में सर गंगा राम अस्पताल में ऑपरेशन हुआ उस समय लेंस को प्रत्यारोपित नहीं किया गया था क्योंकि उस उम्र में आंख बहुत छोटी थी।
अब अरीबा मोटे लेंस का चश्मा पहन रही थी, कई दिनों से रिसर्च करने के बाद डॉ सुशील ओझा ने देखा कि आंखों में झिल्ली के कारण दृष्टि कम हो रही है और मोटे लेंस वाला चश्मा हर वक़्त पहने रहना संभव नही था, सलीम सिद्दीकी (अरीबा के पिता) दुबई में कार्यरत है और हाल ही में छुट्टी लेकर अरीबा का ऑपरेशन करवाना चाहते थे परन्तु प्राइवेट हॉस्पिटल में लगभग 50,000 प्रति आंख का खर्चा आ रहा था सलीम सिद्दीकी ने काफी रिसर्च की और पता लगाया कि क्या दून अस्पताल में ऐसी सर्जरी होना संभव है और डॉ सुशील ओझा जैसे सीनियर डॉक्टर ने इसके लिए हामी भरी और कई दिन की रिसर्च के बाद दून अस्पताल में आज अरीबा का सफल ऑपरेशन हुआ ।

उन्होंने निजी अस्पताल को दिखाया है और डॉ सुशील ओझा ने माता-पिता को सूचित किया कि हम इसे यहां कर सकते हैं लेकिन यह दून अस्पताल में कभी नहीं किया गया है। लेकिन पूराने अनुभव के पन्नो पर डॉ सुशील ओझा ने पीजीआई चंडीगढ़ में ऐसी सर्जरी की थी, परिवार के लोगों ने डॉ सुशील ओझा एंवम उनकी पूरी टीम पर भरोसा कर अपनी बच्ची के ऑपरेशन के लिए राजी हुए जिसका रिजल्ट आज दून अस्पताल में देखने को मिला लगभग एक घंटे चले ऑपरेशन के बाद अरीबा खुली आँखों के साथ ऑपरेशन थिएटर से बाहर आई और उनके परिवार ने इस असंभव से लगने वाले चमत्कार को नमस्कार किया, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, को ध्यान में रखकर डॉ सुशील ओझा ने भी लड़की के माता पिता का धन्यवाद किया, और अरीबा ने भी बड़े होकर डॉ बनने की ख्वाहिश जताई, मंगलवार को बाएं आंख membrenectomy + पूर्ववर्ती विटाक्टोमी + फोल्ड करने योग्य आईओएल प्रत्यारोपण के तहत किया।

डॉ के के टमटा मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि दून अस्पताल सीमित संसाधनों के साथ भी हिली राज्य के मरीजों की अपेक्षा के अनुसार सर्वश्रेष्ठ सर्विसेज प्रदान कर रहा है।
डॉ पीबी गुप्ता, प्रिंसिपल ने टीम का उत्साह वर्धन किया टीम में वरिष्ठ डॉ मनु भारद्वाज, सिस्टर लुसी, सुषमा, रेणु, दिव्य, शैलेश और एच एस नेगी जी शामिल थे।

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