5 कारण जिस वजह से हार सकती हैं रजनी रावत।

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देहरादून में इन दिनों नगर निकाय चुनाव का दौर जारी है मोहल्ले के प्रथम व्यक्ति (पार्षद) की बात हो या महापौर की हर रेस में कई खिलाड़ी मौजूद हैं, देहरादून के महापौर बनने का सपना संजोये कई बड़े नेता आज भी पार्टी से टिकट न मिलने के कारण गुमसुम हैं।

हाल ही में जन्मी आप (आम आदमी पार्टी) का अस्तित्व उत्तराखंड में किसी भी एंगल से परिपक्व नहीं, पहाड़ के लिए क्रांति की अलख जगाने वाली सेना आज उत्तराखंड क्रांति दल के नाम से जानी जाती है पर आज तक अपने दम पर उत्तराखंड क्रांति दल ने उत्तराखंड बनने के बाद राजनीति में कुछ विशेष नही किया।

2008 में निर्दलीय चुनाव लड़ने वाली किन्नर रजनी रावत को 44,294 मत मिले, वे पूर्व मेयर विनोद चमोली से लगभग 15 हजार वोटों से हारी थी, 2013 में रजनी रावत ने बसपा से सिंबल लेकर चुनाव लड़ा फिर भी रजनी रावत का मेयर बनने का सपना सपना बनकर रह गया, मेयर से लेकर विधायक तक हर इलेक्शन में हाथ आजमा चुकी रजनी रावत आखिर किन वजह के कारण नही जीत पाई?
आइये डालते हैं एक नज़र-

2018 में फिर वही पुरानी गलतियां दोहरा रही रजनी

1- खराब मैनेजमेंट का शिकार होती आयी रजनी अपनी PR की शिकार हुई, आज भी रजनी 2008 वाली पोजीशन से ऊपर नही उठ पाई।

2- जनता से सम्पर्क करने में फिसड्डी रही उनकी टीम ने देहरादून का नक्शा ठीक तरह से नही देखा, जहां दिल किया मैडम को हांक दिया।

3- मैडम रजनी रावत को हरा हरा दिखाने वाली टीम कमीशन एजेंट के तौर पर काम कर रही है रजनी रावत से उनका पर्सनल नंबर तक दूर कर दिया जाता है मानो किसी मेयर का नही राष्ट्रपति का चुनाव हो।

4- मैडम रजनी रावत का पढ़ा लिखा न होना भी मुख्य वजह है ज्यादा पढ़े लिखे लोग रजनी रावत को पढ़ा लाखों का चूना लगा फिर अगले इलेक्शन में आगे पीछे मंडराते हैं,रजनी रावत को जरूरत है तो खुद की जो वो 2008 में छोड़ आई,जनता के बीच रहने वाली किन्नर रजनी रावत को घेरे रखने वाले लोग ही पिंजरे में बंद किये हुए हैं जनता से पनपी रजनी रावत आज जनता से दूर हो गयी हैं।

5- मीडिया मैनेजमेंट भी रजनी रावत के लिए सर दर्द बना हुआ है, रजनी रावत भी मीडिया मैनेजमेंट के लिए ऐसे लोगों का इस्तेमाल करती है जिनका मीडिया से कोई लेना देना नहीं।

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