मिस वर्ल्ड बनने के लिए मानुषी से पूछे गए थे ये सवाल

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सचमुच में अगर घर को घर संभालने वाली महिलाओं को अगर उनके काम के वेतन मिलें तो ये कितना होना चाहिए। खुद मिस वर्ल्ड के अनुसार ही मां के काम का कोई मोल नहीं। फिर भी सोशल साइट्स पर ये सवाल वायरल हो गया है। हाल ही चीन में आयोजित मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में विजेता तय करने वाले सवाल के जवाब पर लगातार चर्चा हो रही है। जहां एक ओर अधिकतर लोग मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर की हाजिर जवाबी की दाद दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनके सवाल पर गृहलक्ष्मी यानी घर चलाने वाली महिलाओं के वेतन पर सवाल उठने लगे हैं।

सवाल-जवाब

प्रतियोगिता में मानुषी से पूछा गया था कि किस प्रोफेशन को सबसे ज्यादा सैलेरी मिलनी चाहिए और क्यों? उनका जवाब था कि एक मां को सबसे ज्यादा इज्जत मिलनी चाहिए और जहां तक सैलरी की बात है, तो इसका मतलब रुपयों से नहीं बल्कि सम्मान और प्यार से है।

क्या हो सकता है वेतन

काम — कितना मेहनत — अनुमानित वेतन
डे-केयर दो बच्चे — 12-14 घंटे संभालना — 12 हजार रुपए
मनपसंद खाना — 3-4 लोगों के स्वादानुसार — 6 हजार रुपए
घर संभालना — सफाई-लॉन्ड्री और अन्य — 3 हजार रुपए
बजट-अकाउंट — घर के सभी खर्चों का हिसाब — 4 हजार रुपए
बीमार का ख्याल — बच्चों-बूढ़ों को दवा-इलाज — 6 हजार रुपए
बच्चों को पढ़ाना — होमवर्क-प्रोजेक्ट्स बनाना — 6 हजार रुपए
ड्राइविंग — बच्चों-मेहमानों को लाना — 8 हजार रुपए

कुल — 45 हजार रुपए (खर्च का आंकलन मेट्रो शहर के अनुसार)

अनमोल या बे-मोल
पूरी दुनिया में घर चलाने वाली महिलाएं ही ये -थैंकलेस जॉब- (काम जिसकी कोई कद्र न करें) पूरे मनोयोग से करती हैं। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय महिलाएं सामान्य तौर पर दिनभर में 6 घंटे बिना वेतन वाले काम करती हैं।

अर्थव्यवस्था मेंं हो शामिल
अर्थशास्त्री समय-समय पर ये मांग उठाते रहे हैं कि महिलाओं द्वारा किए गए काम को अर्थव्यवस्था में शामिल करना चाहिए। ऐसा न करके हम अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को नजर अंदाज कर रहे हैं। लगभग 5 वर्ष पहले तत्कालीन महिला कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ ने भी कहा था कि महिलाओं को उनके काम का वेतन पति से मिलनी चाहिए।

मिलेगी स्वतंत्रता
भारत में मौजूद कानूनों को देखें तो अगर अभी महिलाओं को वेतन देने से भी उन्हें वास्तविक स्वतंत्रता हासिल नहीं होगी। दरअसल, अभी महिलाओं को दी जाने वाली राशि को तोहफा मान उस पर कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन इस राशि के निवेश पर टैक्स लगता है जो कि देने वाले की आय से (सेक्शन 60) जुड़ा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर महिलाओं को वास्तविक स्वतंत्रता देनी है तो कानून में भी बदलाव करना होगा। अन्यथा ये सिर्फ नाम के बदलाव बनकर रह जाएंगे।

मां ने कहा था, गैरेज में छोड़कर आना पद
कामकाजी महिलाओं पर तो दोहरी मार पड़ती है। ऑफिस से लौटते ही घर पर दूसरा शिफ्ट शुरू हो जाता है। पेप्सीको की अध्यक्ष चुने जाने के दिन की एक ऐसी ही बात इंदिरा नूयी ने एक बार सबको बताई थी। जब वह घर पहुंचीं तो उनकी मां दरवाजे पर ही खड़ी थीं। मां ने कहा- जब तुम घर के दरवाजे में घुसोगी तो अपने पद को गैरेज में ही छोड़कर आना। बाहर कुछ भी हो, घर में तुम एक मां, बीवी और बहू हो।

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