वर्षान्त समीक्षा-2017 पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय

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स्वच्छ भारत मिशन

सार्वभौमिक स्वच्छता क्षेत्र को प्राप्त करने के प्रयासों में तेजी लाने और सुरक्षित स्वच्छता की पहुंच पर ध्यान केंद्रित करने हेतू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) का शुभारंभ किया। एसबीएम का उद्देश्य 2 अक्टूबर, 2019 तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) राष्ट्र और स्वच्छ भारत बनाना है, जिससे उनकी 150वीं जयंती पर उपयुक्त श्रद्धांजलि दी जाए।

ओडीएफ परिणामों की उपलब्धि के लिए व्यवहार परिवर्तन पर प्राथमिक ध्यान देना एक मौलिक साधन है । मंत्रालय इसे अपने केंद्रित सूचना, शिक्षा एवं सम्प्रेषण (आईईसी) कार्यक्रमों के द्वारा कार्यान्वित कर रहा है। यह लैंगिक संवेदनशील सूचना, व्यवहार परिवर्तन दिशानिर्देश और विभिन्न जन शिक्षा गतिविधियों को प्रोत्साहन देता है। मंत्रालय ने 2017 में लैंगिक दिशानिर्देश और 2015 में मासिक धर्म प्रबंधन दिशानिर्देशों को जारी किया।

2 अक्टूबर, 2014 को एसबीएम (जी) के शुभारंभ पर स्वच्छता क्षेत्र 38.70% था। यह 18 दिसम्बर, 2017 को बढ़कर 74.15% तक पहुँच गया।

एसबीएम(जी) उपलब्धियाँ

2 अक्टूबर 2014 से आईएचएचएल का निर्माण (लाख में)

568.15

2 अक्टूबर 2014 से स्वच्छता क्षेत्र में 35.45% की वृ्द्धि

स्वयं घोषित ओडीएफ की सं.

255

नमामि गंगे में ओडीएफ ग्राम

4470

ओडीएफ राज्य/संघ शासित प्रदेश
(सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात, दमन और दीव और चंडीगढ़)

8

स्वयं घोषित ओडीएफ ग्रामों की सं.

2,92,896

स्वच्छ भारत मिशन: स्वच्छता को हर किसी का कार्यक्षेत्र बनाना

एमडीडब्ल्यूएस में एसबीएम-ग्रामीण के आवंटित प्रभार के अलावा स्वच्छ भारत की उपलब्धि की दिशा में सभी गतिविधियों और पहलों का आयोजन और समन्वय करना अनिवार्य है। इस दायित्व को पूर्ण करने के लिए, मंत्रालय निरंतर अन्य सभी मंत्रालयों, राज्य सरकारों, स्थानीय संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों, विश्वास संगठनों, मीडिया और हितधारकों के साथ कार्य करता है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री के आह्वान पर आधारित है कि स्वच्छता केवल विभागों की ही नहीं हर किसी का कार्य हो। विशेष पहलों और परियोजनाओं की मेजबानी को इस प्रक्रिया में त्वरित समय से किया जाना चाहिए। सभी हितधारकों की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है।

स्वच्छता पखवाड़ा

केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को उनके अधिकार क्षेत्र में शामिल करते हुए स्वच्छता पखवाड़े का शुभारंभ अप्रैल 2016 में स्वच्छता के मुद्दों और कार्यप्रणालियों पर गहन ध्यान केंद्रित करने के एक पखवाड़े के उद्देश्य से किया गया था। पखवाड़ा गतिविधियों के लिए योजना में सहायता के लिए मंत्रालयों के बीच एक वार्षिक कैलेंडर का पूर्व वितरण किया जाता है।

नमामिगंगे

नमामिगंगे कार्यक्रम जल संसाधन मंत्रालय (एमओडब्ल्यूआर) की एक पहल है जिसके अंर्तगत गंगा नदी के किनारों पर बसे गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाना और एमडीडब्ल्यू के द्वारा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को कार्यान्वित किया जा रहा है ।

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के ५२ जिलों में स्थित सभी 4470 गांवों को राज्य सरकारों की सक्रिय मदद से खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया है । अब मंत्रालय ने एनएमसीजी के सहयोग से गंगा नदी के किनारे के 24 गांवों को गंगा ग्राम में बदलने का दायित्व लिया है।

स्वच्छता कार्य योजना (एसएपी)

स्वच्छता के लिए अपनी तरह के प्रथम अंतर-मंत्रालयी कार्यक्रम एसएपी, प्रधानमंत्री के परिकल्पना का एक दृ़ढ़ साकार रूप है कि स्वच्छता हर किसी का कार्य है। सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों ने उचित बजट प्रावधानों के साथ महत्वपूर्ण तरीके से इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए वित्त मंत्रालय द्वारा अलग से बजट विभागाध्यक्ष बनाया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान 77 मंत्रालयों/विभागों ने अपने एसएपी के लिए 12468.62 करोड़ रुपये की धनराशि के उपयोग की वचनबद्धता की है। एसएपी कार्यांवयन 1 अप्रैल 2017 से प्रारंभ कर दिया गया है।

स्वच्छ प्रतिष्ठित स्थल (एसआईपी)

माननीय प्रधानमंत्री की प्रेरणा के अंर्तगत, मंत्रालय ने संपूर्ण भारत में ऐसे 100 स्थलों की स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित करते हुए बहु-हितधारक पहल की है जो अपनी विरासत, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण “प्रतिष्ठित” हैं।

इस पहल का लक्ष्य इन स्थलों में स्वच्छता की स्थिति में एक उच्चतर स्तर तक सुधार किया जाए। इस पहल में शहरी विकास, पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के साथ एमडीडब्ल्यूएस एक नोडल मंत्रालय के रूप में साझेदारी में है। अब तक पहले दो चरणों में 20 प्रतिष्ठित स्थलों पर कार्यवाही को अंजाम दिया जा चुका है । इन सभी 20 प्रतिष्ठित स्थलों को वित्तीय और तकनीकी सहायता के लिए पीएसयू या कॉरपोरेट्स के तौर पर नामित किया गया है।

स्वच्छ शक्ति, 8 मार्च, 2017

स्वच्छ शक्ति का आयोजन 8 मार्च, 2017 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गांधीनगर के महात्मा मंदिर मे किया गया था । इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनसभा को भी संबोधित किया। देश भर से लगभग 6,000 चयनित महिला सरपंचों, निचले स्तर के कामगारों ने इस समारोह में भाग लिया और ग्रामीण भारत में स्वच्छ भारत को एक वास्तविकता बनाने की दिशा में उत्कृष्ट योगदान के लिए स्वच्छता चैंपियंस को सम्मानित किया गया।

खुले में शौच से मुक्ति (एफओडी) सप्ताह (अगस्त 9- अगस्त 15)

ग्रामीण क्षेत्रों के सभी समुदायों में जागरूकता सृजन और जन फैलाव के माध्यम से भीतरी व्यवहार परिवर्तन हेतू घर से घर तक, स्वच्छता रथों, रैलियों, मैराथनों, चैंपियंनों को प्रोत्साहन, प्रश्नोत्तरी/चित्रकारी प्रतिस्पर्धाओं जैसी आईईसी गतिविधियों का आयोजन किया गया।

स्वच्छ संकल्प से स्वच्छ सिद्धि प्रतियोगिता (17 अगस्त –8 सितम्बर )

माननीय प्रधानमंत्री ने संकल्प से स्वच्छ सिद्धि के अंर्तगत 2022 तक एक नया भारत बनाने का आह्वान किया, ताकि सामूहिक रूप से सभी को भारत से गंदगी के समाप्त करने के लिए एक संकल्प दिलाया जा सके। इस परिकल्पना को आगे बढ़ाने की दिशा में, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में 17 अगस्त से 8 सितंबर 2017 के बीच एक देशव्यापी फिल्म, निबंध और चित्रकारी प्रतियोगिता का आयोजन किया।

दरवाजा बंद मीडिया अभियान

व्यवहार परिवर्तन के लक्ष्य को लेकर, विशेष रूप से पुरुषों के द्वारा शौचालय के उपयोग को बढ़ावा देने के अमिताभ बच्चन के साथ ‘दरवाजा बंद’ नामक शीर्षक से एक प्रगतिशील जन मीडिया अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान में हिंदी और 9 भाषाओं सहित 5 टीवी और रेडियो स्पॉट शामिल हैं और इसे देश भर के जन मीडिया पर सफलतापूर्वक प्रारंभ किया जा चुका है।

स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस), सितम्बर 16- अक्टूबर 2, 2017

27 अगस्त, 2017 को अपने मन की बात कार्यक्रम के संबोधन में, प्रधानमंत्री ने राष्ट्र से स्वच्छता की भावना का आह्वान करते हुए 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर, 2017 के दौरान स्वच्छता गतिविधियों में तेजी लाने हेतू सभी गैर सरकारी संगठनों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक नेताओं, कॉरपोरेटों, सरकारी अधिकारियों, कलेक्टरों और सरपंचों से श्रमदान गतिविधियों को कार्यान्वित करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के शहंशाहपुर गांव में दो गड्ढे वाले शौचालय के निर्माण में श्रमदान के अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि ‘स्वच्छता को ‘स्वभाव’ बनाना है- और हमें अपने राष्ट्र को स्वच्छ बनाने के लिए यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है’। एसएचएस को एक व्यापक प्रतिक्रिया मिली और विभिंन गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता के प्रति श्रमदान हेतू स्वेच्छा से सेवा के लिए देशभर में सशस्त्र बलों और दिव्यांगों सहित नागरिकों ने बड़े पैमाने पर इसमें सामूहिक भागीदारी को अंजाम दिया है।

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