उर्दू साहित्य का विरोध करने वालों की निंदा,छात्र संगठनों ने बरेली कालेज प्राचार्य को दिया ज्ञापन।

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बरेली। एबीवीपी छात्र संगठन द्वारा बरेली कालेज बरेली में उर्दू कि किताबों का विरोध भारतीय संस्कृति का विरोध है और हमारा बरेली कालेज प्रशासन लाचार व बेबस है, जो इन पर कारवाई न नहीं कर पा रहा है ।

यह कहना है छात्रनेता फैज मोहम्मद का । उनका आरोप है कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में भाषाओं की सूची में उर्दू मान्यता प्राप्त भाषा है ।

जिस उर्दू भाषा ने आजादी की लड़ाई में विशेष भूमिका निभाई है उसी उर्दू भाषा का नारा है इंकलाब जिन्दाबाद – इंकलाब जिन्दाबाद । उर्दू भाषा किसी धर्म व मजहब की भाषा नहीं है इस भाषा का प्रयोग हर धर्म के लोग करते हैं । उर्दू भाषा मोहब्बत का पैगाम देती है। हमारे भारत देश की मुद्रा नोटो पर उर्दू भाषा का प्रयोग होता है । उर्दू भाषा के बड़े -बड़े शायर हुए जिनमे से रघुपति साहय फिराक गोरखपुरी ।

जगन्नाथ दास । कृष्णा बिहारी नूर । दया शंकर नसीम जैसे हजारो बड़े कवि उर्दू भाषा के हुए । फैज मोहम्मद ने कहा कि उर्दू भाषा किताबों से भरी वैन में आग लगाना चाहते हैं। इतने गिर गये कि भारतीय संस्कृति का विरोध कर रहे हैं ।
उन्होंने ने कहा कि ये लोग उर्दू नहीं मिटा पाएंगे।
जिस उर्दू भाषा के नारे का प्रयोग आजादी की लड़ाई में राम प्रसाद बिस्मिल ने किया इंकलाब जिन्दाबाद का नारा लगाया । उसे चंद लोग कैसे खत्म कर सकते हैं।

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