पहले पानी अब हवा बिक रही बन्द बोतल में!

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प्रेम पंचोली-वैज्ञानिक कई बार कह चुके है कि चौड़ी पत्ती के वृक्ष ही शुद्ध पर्यावरण के लिए मुफीद है। यही जंगल यहां उत्तराखण्ड हिमालय में मौजूद है। मगर वर्तमान में राज्य की दशा बता रही है कि यहां पर वनो का व्यवसयिक पातन बढा है। फिर भी राज्य में शुद्ध हवा व पानी की गुजाईश भारी मात्रा में है। यही वजह है कि इस राज्य की हवा अब बन्द पानी की बोतलो जैसे ही बन्द डिब्बो में बिकनी आरम्भ हो गई है। प्योर हिमालयन एयर नाम की वेबसाइट के मार्फत उतराखण्ड की शुद्ध हवा ऑनलाई डिमाण्ड पर बिक रही है। जबकि वैज्ञानिक इस तरह से बिकने वाली हवा से इत्तेफाक नहीं रखते।

ज्ञातव्य हो कि उत्तराखंड के हिमालयी बुग्यालों की शुद्ध हवा भी बिकने लगी है। ये हवा मुनस्यारी से लेकर पिण्डर और गंगोत्री तक के ऊंचाई वाले बांज, बुरांश, खर्सू, मोरू, देवदार के आदि जंगलो से एकत्रित की जा रही है। प्योर हिमालयन एयर नाम की यह कम्पनी हवा को बन्द डिब्बो में पैक करके देश के महानगरो में बेच रही है। यह शुद्ध हवा के डिब्बे अभी सिर्फ ऑनलाईन डिमाण्ड पर ही बिक रहे हैं। जिन पर हिमालयन फ्रेश एयर नाम चस्पा किया हुआ है। बताया गया कि दस लीटर हवा के एक डिब्बे की कीमत लगभग 800 से 550 रुपये तक है। एक पैकिंग से 160 बार हिमालय की शुद्ध हवा ली जा सकती है। इस तरह प्रदूषण की मार झेल रहे दिल्ली-एनसीआर जैसे महानगर में शुद्ध हवा के डिब्बों की मांग बढ रही है।

प्योर हिमालयन एयर नाम की वेबसाइट अपने डिब्बों में चस्पा कर रही है कि यह शुद्ध हवा उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों से कंप्रेस कर खास किस्म की पैकिंग में भरी जा रही है। कंपनी यह भी दावा करती है कि हवा उत्तराखंड के चमोली जिले के रूपकुंड और बागेश्वर जिले से लगते पिंडारी क्षेत्र से डिब्बाबंद की गई है। कंपनी की वेबसाइट पर कोई स्थायी पता या फोन नंबर नहीं है। सिर्फ व सिर्फ ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से ही इसकी डिलिवरी दी जा रही है।

गौरतलब हो कि दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक डिब्बो में बन्द शुद्ध हवा की मांग बढ रही है। हो भी क्यों नहीं, दिल्ली, एनसीआर का क्षेत्र वायु प्रदूषण से सबसे अधिक जूझ रहा है। यही वजह है कि डिब्बों में बंद इस शुद्ध हवा की मांग इन्हीं क्षेत्रों में सबसे अधिक है। हालांकि शुद्ध हवा के ये डिब्बे हर कोई नहीं खरीद पा रहा है, पर लोगों को यह हवा बेचने का कारोबार पसंद आ रहा है। लोग इसे प्रदूषण से निपटने में सहायक मददगार मान रहे हैं। जबकि इनकी हवा बेचने वाली वेबसाइट पर हिमालयी शुद्ध हवा को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक ही आ रही है। मगर लोग इस बात से हैरान है कि शुद्ध हवा पैक कैसे हो रही है। जो आम लोगो में आश्चर्य बना हुआ है।

बोतल में बन्द हवा पर अपनी-अपनी राय उधर राज्य कर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर विनय ओझा के अनुसार, फिलहाल ऐसी किसी कंपनी की जानकारी उन्हें नहीं है, जो हिमालय की शुद्ध हवा को कंप्रेस कर बेच रही हो। पर्यावरणविद् व मैती आन्दोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत का कहना है कि दिल्ली व एनसीआर में रूपकुंड तथा पिंडारी ग्लैश्यिर की शुद्ध हवा डिबों में भर कर बेचने वालों को यह पता नहीं होगा कि इन स्थानों की हवा में वैसे भी आक्सीजन की कमी होती है। साथ ही यहां तक पहुंचने के लिए नाकों चने चबाने पड़ते हैं। उन्होने कहा कि शुद्ध हवा नहीं बल्कि हिमालय बिक रहा है। वे आगे बताते हैं कि इन कारोबारियों को इतना पता नहीं है कि दुधातोली, बिनसर, राड़ीडांडा, खिर्सू, कमेड़ीदेवी, पोथिबासा, अस्कोट जैसे हजारों स्थानों में मानक से अच्छी आक्सीजन युक्त शुद्ध हवा उपलब्ध है। जंगल और बुग्याल हमारे पूर्वजों ने छाती पर रख कर बचाए हैं। उनका आरोप है कि जंगल छीन कर कानून का डंडा सर पर लटकाकर इस राज्य को ये ठेकेदार किस्म के लोग कहीं का नहीं छोड़ेंगे। कहा कि उतराखण्ड की महिलाऐं जंगलों से अपना मैत का रिश्ता बना कर इन्हें बचाती और सहलाती हैं। इन जंगलों के प्यार में वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा भी नहीं दे सकी। अब तो बच्चे बेरोजगार बनकर इन जंगलों को ताकते ही रह गए है। उनका सुझाव है कि यदि कुबैत, सऊदीअरब, ईरान जैसे देश अपनी धरती के तेल पर अपनी बपौती समझते हैं तो उत्तराखंड के लोग भी कम से कम अमृत रुपी पानी और हवा को बेचने का हक रखती है।

इधर हवा बेचने की खबर पर राज्य के पर्यावरण कार्यकर्ताओ की शुद्ध राय है कि बुग्यालों से पांच किमी नीचे स्थित पानी के स्रोतों के पानी को बोट्लिंग करके राज्य के नौजवानो को इस कारोबार से सरकार को जोड़ देना चाहिए और जिसे वे अमृत जल के मानक पर बेचेंगे। इस पानी में हिमालय और बुग्यालों के प्राकृतिक जड़ी बूटियों के तत्व विद्यमान हैं। इस पानी का एक एक घूंट शहरी लोगों के शरीर में गलत खान-पान से जमा बिष जैसे पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होगा। यही नहीं सरकार को अब यह भी कर देना चाहिए कि उत्तराखंड से देश के महानगरों तक पाइप लाइन बिछा कर बांज, देवदार, तथा मिश्रित वनों की जीवनदायनी हवा की सप्लाई योजनागत तरिके से करें। ताकि राज्य का राजस्व भी बढे और रोजगार के साधनो में बढोतरी हो। वे कहते हैं कि यदि सरकारे ऐसा कर दे तो कौन पहाड़ी नहीं दौड़ेगा अपने गाँवों की ओर?

शुद्ध हवा बनाम ऑक्सीजन
चिकित्सा पद्धति से जुड़े लोगो का कहना है कि शुद्ध हवा में ऑक्सीजन, नाइट्रोजन के साथ दूसरे प्राकृतिक तत्व भी रहते हैं। इससे शरीर को ज्यादा ताकत और स्फूर्ति मिलती है। इसलिए इस तरह की डिब्बाबंद हवा को किसी भी वक्त सांस के जरिए शरीर में लिया जा सकता है। जबकि ऑक्सीजन के छोटे सिलेंडर सिर्फ व सिर्फ मेडिकल इस्तेमाल के लिए ही होते हैं।

अन्य देशो का यह कारोबार पुराना है
भारतीय कम्पनी ने उत्तराखंड की पहाड़ियों के 10 लीटर हवा की कीमत 550 रुपए तय किये हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया की एक कंपनी ने दो साइज में अपने हवा की बोतलों को लॉन्च किया है। एक बोतल 7.5 लीटर की है। इसकी कीमत 1499 रुपए हैं। वहीं कंपनी 15 लीटर हवा वाली एक अन्य बोतल भी बेच रही है। जिसकी कीमत 1999 रुपए बताई गई हैं। शुद्ध हवा बेचने का यह कारोबार विदशों में पहले से चलता आ रहा है। चीन से लेकर पश्चिम के कई देशों में इस तरह की शुद्ध हवा बहुत ही किमती है। मगर सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर कर दक्षिण प्रशांत महासागर से लेकर कनाडा और अलास्का के पहाड़ों तक की शुद्ध हवा आप मंगा सकते है।
बन्द बोतल शुद्ध हवा के डिब्बे का इस्तेमाल
वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली की हवा में जहर घुल गया है। राजधानी में रोज एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) गंभीर से लेकर खतरनाक की श्रेणी में ही रहता है। इससे बचने के लिए हिमालय की हवा को अब आप ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। हवा की ऑनलाइन बिक्री शुरू हो चुकी है। देश के साथ विदेशी कंपनियां भी प्योर हवा को बोलत में बंद कर ग्राहकों के घर तक पहुंचा रही है। 10 लीटर शुद्ध हवा से भरी बोतल से आप 160 बार सांस ले सकेंगे। सांस लेने के लिए बोतल के साथ मास्क भी दिया जा रहा है। हवा की बोतल के साथ लगे मास्क से एक सेकेंड में एक बार सांस लिया जा सकता है, इस तरह से 160 बार सांस लेने के बाद बोतल खाली हो जाएगी। हालांकि जानकार इस कारोबार पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कोई तीन मिनट तक शुद्ध हवा ले और फिर बाकी वक्त प्रदूषण की चपेट में रहे, इस तरह की शुद्ध हवा से कोई फायदा नहीं है।

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