अरबों चंदा वसूल सरकारी खजाने में डालना सिर्फ जालसाजी

शहीदों के परिवार आज भी दुखी-मोहताज हैं

RTI में पता चल कि पुलवामा हमले में शहीदों के परिवारों के लिए लोगों ने जो सहयोग राशि भेजी वह CM राहत कोष में चली गई..अजूबा नहीं है ये..अलबत्ता केंद्र और राज्य सरकारों के लिए शर्मनाक और शहीदों के परिवार के साथ ना-इंसाफ़ी है..कारगिल युद्ध के वक्त भी ऐसा ही हुआ था..अरबों रुपए लोगों ने दिल से शहीदों के परिवारों के लिए पीएम और सीएम निधि में भेजे थे..वे पैसे उस राशि से सैकड़ों गुणा अधिक थे जो बांटे गए..

PM-CM कल्याण कोष अब शहीदों के नाम पर चन्दा उगाही का शानदार-आसान-निर्विवाद माध्यम बन गए हैं..ये पैसा क्यों नहीं शहीद के उन माता-पिता और बेरोजगार भाई-बहनों के कल्याण और मदद के लिए नहीं जाना चाहिए जो दो जून की रोटी-छत और रोजगार के लिए तरस गए हैं..मारे-मारे फिर रहे हैं..बहू भी तुरंत घर छोड़ के सारा पैसा-योजना ले के चलती बनी..फटाफट दूसरी शादी कर पति के बदले पति पा लिया..

क्या शहीद का परिवार मतलब सिर्फ पत्नी है? माँ-बाप-भाई-बहन कुछ नहीं? लोगों-बहुराष्ट्रीय और अन्य कंपनियों-PSU ने मदद राशि दी थी तो क्या ये बोल के दिया था कि सिर्फ शहीद की पत्नी के लिए है ये..? केंद्र और राज्य सरकार ने सारा पैसा दबा लिया और मुफ्त की वाहवाही लूट ली कि शहीदों के परिवारों का कितना ख्याल रखा..सरकारें बताएं कि कितना पैसा शहीदों के नाम से जमा हुआ? कितना बांटा? आँखें खुल जाएंगी सभी की.

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