बैंक गारंटियाँ जमा कराने में जुटा महकमा

संपत्ति बंधक मामले में भी धांधली की फुसफुसाहट

अरबों की सरकारी खजाने की लूट के दोषियों की मौज कब तक?

पूरे राज्य में प्रवर्तन दल छापे मारेंगे

देहरादून,अल्मोड़ा,हरिद्वार,अल्मोड़ा के डीईओ पर अंगुली

चेतन गुरुंग

देहरादून समेत उत्तराखंड के तमाम जिलों में शराब महकमे में तमाम तरह की धांधलियों-घोटालों-साज़िशों और सरकार की आँख में धूल झोंक उसके खजाने को अरबों का चूना लगाने के मामले में सरकार आखिर जाग गई है। उसने इस मामले का संज्ञान ले लिया है। इसके बाद मुख्यालय से ले कर जिलों तक जबर्दस्त हलचल रही।

सरकार के सख्त रुख से अभी तक घोटालों-धांधली को दबा के बैठे आबकारी महकमे के खास लॉबी से जुड़े अफसर आज दिन भर बेचैन रहे। फोन घनघनाए गए सभी जिलों को। जिला आबकारी अधिकारियों से पूछा गया कि उनके यहाँ कोई बैंक गारंटी न लिए जाने, प्रतिभूतियाँ जमा न होने या फिर संपत्ति बंधक न रखने का मामला तो नहीं है। सभी जगह से तकरीबन एक जैसा ही जवाब मिला। हाँ है। भले कम-ज्यादा है। इसके बाद सभी को गुजारिश वाले अंदाज में हुकुम दिया गया। जल्दी जमा कराओ। ऊपर पंगा हो रहा है। पूरे दिन महकमे के मुख्यालय से ले के जिलों तक खलबली का आलम रहा।

सरकार की आँखें इन खुलासों से खुल गई हैं, कि उत्तराखंड के लगभग हर जिलों में बैंक गारंटी, प्रतिभूति (सिक्योरिटी) जमा न करने, महीने की लाइसेन्स फीस भी जमा न करने के दुनिया भर के मामले हैं। तकरीबन 250 करोड़ के मामले तो सिर्फ दुकानों के न उठने से जुड़े हैं। इसके अलावा इम्पोर्ट ड्यूटी, लाइसेन्स से जो पैसा मिलता है, वह भी नहीं मिलेगा। ये भी करोड़ों में जाएगा। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत तक मामला जा चुका है। वह हालात की रिपोर्ट ले रहे हैं। प्रमुख सचिव आनंदबर्धन भी महकमे में इस तरह के घोटालों और अनियमितता को ले के नाखुश बताए जाते हैं।

आकाओं की तिरछी नजर और खुलासों से महकमे के खास लॉबी से जुड़े अफसर सहमे हुए हैं। ये वे अफसर हैं, जो आबकारी नीति माफिया तंत्र के हिसाब से तैयार कराते हैं। कार्रवाई कराते हैं। सरकार किसी की भी हो। देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और अल्मोड़ा के जिला आबकारी अधिकारी एक ही धड़े के बताए जाते हैं। एक संयुक्त आयुक्त की छत्र छाया में पल रहे अफसरों की टीम ने सरकार को हर तरह से झटका दिया है। हरिद्वार में 450 पेटी अंग्रेजी शराब की पुलिस ने पकड़ के आबकारी महकमे को बे-इज्जत कर दिया है। वहाँ के डीईओ अशोक मिश्र से सरकार जवाब तलब कर क्यों नहीं रही, इस पर हैरानी जताई जा रही।

कहा जा रहा है कि खास लॉबी का हिस्सा होने के कारण उसका बचाव किया जा रहा। उधमसिंह नगर के डीईओ आलोक साह पर दुकानों को मनमाने ढंग से शिफ्ट करने तक के आरोप लग चुके हैं। उनका कुछ नहीं बिगड़ा। नैनीताल का डीईओ रहने के दौरान दुर्गेश्वर त्रिपाठी ने सरकार को करोड़ों का घाटा करवा दिया था। बिना संपत्ति बंधक रखे दुकान सौंप तो दी। पैसे वसूल नहीं कर पाया। दुकानदार करोड़ों देने के बजाए जेल चला गया। 16 दिनों में बाहर भी आ गया। सरकार देखती रह गई। त्रिपाठी जी अब अल्मोड़ा में फिर डीईओ हैं। कोई कार्रवाई नहीं हुई उन पर भी। देहरादून के डीईओ मनोज उपाध्याय के खिलाफ भी सरकार ने कोई कार्रवाई करना तो दूर, उल्टा बोल दिया कि उसने जो आरोप लगाए थे, उनमें दम नहीं था।

इस बार जांच-मुआयने में बताया जा रहा है कि उनके दफ्तर में गज़ब की गड़बड़ियाँ मिली हैं। दो-तीन दिन में जांच रिपोर्ट आ जाने की संभावना है। जांच दल ने अब हरिद्वार के डीईओ का रुख कर लिया है। संयुक्त आयुक्त बीएस चौहान और उपायुक्त रमेश चौहान जांच कर रहे हैं। इधर सभी जिलों में छापामार दस्ते को हर दुकान पर छापा मारने के फरमान दे दिए गए हैं। ये दस्ते ओवर रेटिंग, नकली शराब, बारों में अवैध ढंग से शराब परोसने की जांच करेंगे।

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