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THDC-IHET टिहरी में अबकी CM को ही सीधी चुनौती!

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त्रिवेन्द्र ने जिस प्रोफेसर Arvind को बहाल किया, वह फिर बर्खास्त


तनख्वाह तो दी नहीं स्टाफ की निदेशक ने,नौकरी भी छीन ली


Teqip BoG के जरिये बिना नोटिस-चार्जशीट ले ली गई नौकरी


कसाब से बड़े आतंकवादी हैं प्रो. सिंह!
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चेतन गुरुंग


सरकार ने गोपेश्वर के निदेशक केकेएस मेर को THDC-IHET टिहरी कॉलेज का भी अतिरिक्त चार्ज दे कर भेजा था कि वह कॉलेज में पढ़ाई-लिखाई का माहौल बेहतर करेंगे। स्टाफ में सद्भावना पैदा कर के इस शानदार बुनियादी सुविधा वाले इंजीनियरिंग कॉलेज को और श्रेष्ठ करेंगे। ऐसा तो हुआ नहीं। इसके विपरीत कॉलेज के वरिष्ठतम फ़ैकल्टी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह को बर्खास्त करने के Teqip के बोर्ड ऑफ गवर्नर के हाहाकारी फैसले से कॉलेज में फिर तूफान उठने की आशंका पैदा कर दी है।

कॉलेज स्टाफ में प्रो. सिंह के खिलाफ बोर्ड बैठक में हुए फैसले से जबर्दस्त असंतोष है। वे बैठक के मिनट्स और फैसले के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। डॉ. सिंह को स्टाफ को भड़काने और कुछ दिन पहले मेर के सामने हुए हंगामे का दोषी ठहराया गया। इसकी न तो जांच कराई गई। न ही कोई सुबूत ही किसी के पास हैं कि इस हंगामे के लिए सिंह ने स्टाफ को उकसाया। जब ये सब हुआ तब वह कॉलेज परिसर में ही दूर अपने कक्ष में थे।

खास बात ये है कि मेर को दो महीने से ज्यादा वक्फ़ा हो गया..कॉलेज का चार्ज मिले। न तो वहाँ पहले से चले आ रहे उल्टे कामों को रोकने में उन्होंने दिलचस्पी दिखाई। न ही कुछ पॉज़िटिव काम तो दूर स्टाफ की तनख्वाह तक दे सके हैं। कॉलेज स्टाफ के मुताबिक वह सिर्फ चार दिन कॉलेज आए..। उनका इस बीच एक वीडियो खूब वायरल हुआ..जिसमें सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक होने के बावजूद वह खुले में स्टाफ पर चीख-चिल्ला रहे हैं। खास बात ये है कि तकनीकी शिक्षा मंत्रालय सीधे मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के आधीन हैं..

Mer के छोटे से दौर में सिर्फ डॉ. सिंह को बर्खास्त करने का इकलौता बड़ा कदम उठाया गया..पाँच साल तक इंसाफ के लिए धक्के खाने के बाद मुख्यमंत्री के फरमान पर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह को बहाल किया गया था..। Teqip की BoG (याद रखिए कि University वाली नहीं जो विधिक है) बुला के डॉ. सिंह को फिर बर्खास्त करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। इसे सीधे मुख्यमंत्री को चुनौती समझा जा रहा है। पहले भी UTU में ऐसा हो चुका है। THDC-IHET के निदेशक पद से गीतम सिंह तोमर को डिग्री संबंधी गंभीर आरोपों के चलते मुख्यमंत्री की इच्छा से बाहर किया गया था..। यूटीयू के VC नरेंद्र चौधरी ने उन्हीं दिनों तोमर को सलाहकार रख लिया था।

 उनके इस फैसले पर हंगामा हुआ था। तब चौधरी ने मजबूर हो के फैसला वापिस ले लिया था। डॉ. अरविंद को बर्खास्त करने का फैसला सरकार-यूटीयू-BoG पर भारी पड़ सकता है..। न्याय विदों के मुताबिक किसी को बिना कारण बताओ नोटिस..बिना चार्ज शीट BoG कैसे सीधे ही बर्खास्त कर सकती है? हाई कोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में UTU-सरकार को नीचा देखना पड़ सकता है..मनमाने फैसले के कारण..बिना पक्ष जाने बर्खास्तगी कहीं होती ही नहीं..अदालत भी इसको नैसर्गिक न्याय के खिलाफ मानता है..मुंबई हमले में तमाम हत्याओं का दोषी कसाब तक पर अदालत में लंबे समय तक मुकदमा चला..उसको अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था..डॉ. अरविंद को ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया। क्या वह कसाब से भी बड़े अपराधी! माना हैं?

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