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बीजेपी विधायकों-नेताओं की शरण में शराब के अफसर

मुख्यमंत्री के कड़क तेवर से उड़े हुए हैं खास लॉबी के होश

त्रिवेन्द्र के करीबियों की चरण वंदना की तेज

महकमे के अफसरों में बेचैनी-बेकरारी का आलम

अपने-अपने तुरुप पत्ते चल रहे सब

चेतन गुरुंग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शराब महकमे की सफाई का मन बनाया तो अभी तक मौज काट रही और सरकार को गुमराह कर अरबों का घाटा करा बैठी कथित शक्तिशाली लॉबी ने मुख्यमंत्री के करीबियों और बीजेपी विधायकों-नेताओं की चरण वंदना शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री और सरकार के इरादों को भाँप इस लॉबी ने भी अपनी कोशिशों के जरिये मुख्यमंत्री को इरादों से डिगाने की कोशिश में तेजी ला दी है। इन दिनों आलम ये है कि शासन से ले के मुख्यालय और डीईओ दफ्तर तक बहुत ही बेचैनी भरा माहौल झलक रहा है।

बीजेपी के देहरादून के कई विधायकों को चुनाव के दौरान उपकृत करने वाले कथित संयुक्त आयुक्त और उसकी लॉबी के अफसरों को आजकल एक बीजेपी नेता के घरों में देखा जा सकता है। दोनों कभी साथ तो कभी अकेले-अकेले उससे मिलने जा रहे हैं। इस नेता की शराब दुकानों में ही भागीदारी भी है। रायपुर के इस नेता के बारे में शोर है कि वह सरकार में ऊंचे स्तर पर असर रखता है।

मंत्री बनने की कोशिश में लगे और प्रतीक्षा सूची वाले दो और एक तकरीबन रिटायर विधायक को भी इस संयुक्त आयुक्त ने अपने असर में लिया हुआ है। दावा तो ये भी किया जाता है कि वह मेयर सुनील उनियाल गामा और बीजेपी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रहे नरेश बंसल के नाम की भी तड़ी मारता रहता है। भले दोनों से उसकी करीबी कभी झलकी नहीं। इन दिनों उसकी लॉबी के अफसरों को रोजाना साथ बैठ के खुद की सल्तनत बचाने के लिए रणनीति बनाते हुए देखा जा सकता है। उनको विरोधी लॉबी को अपने दुर्ग में प्रवेश करने से रोकने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव (आबकारी) आनंदबर्द्धन अब इस हक में नहीं हैं कि जिन अफसरों के कारण महकमा डूबा है और सरकार की प्रतिष्ठा को धक्का पहुँच रहा है, उन पर कोई रहम किया जाए। उन्होंने सरकार को अरबों का घाटा पहुंचाने और बैंक गारंटी-सिक्योरिटी घोटालों को लगातार दूसरे साल अंजाम देने वाले अफसरों की इस बार अच्छे से धुलाई करने का मन बना लिया है। ऐसा सूत्र बता रहे हैं। मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव पर अब तक प्रभावशाली रहे लॉबी का असर काफी हद तक खत्म हो चुका है।

सरकार की रुख को भाँप के अब महकमे के अब तक हाशिये पर रहे अफसरों ने भी हाथ-पैर मारने और तुरुप के पत्ते निकालने शुरू कर दिए हैं। उनको इसमें कितनी सफलता मिलती है, इस पर सभी की नजर है। इस पर भी सभी का ध्यान है कि देहरादून में उर्दू अनुवादक से इंस्पेक्टर बने शुजआत हुसैन पर साकार का नजला गिरता है या इस बार भी वह बच जाते हैं। खास तौर पर ये देखते हुए कि उनको ले कर खासा विवाद रहता है। साथ ही लोक सेवा आयोग से आए कई इंस्पेक्टर खाली बैठ मक्खियाँ मार रहे हैं।  

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