आयुक्त सुशील का ऐलान:सख्त कदम उठाए जाएंगे

फर्जी बैंक गारंटी और सिक्योरिटी घोटाले को किया स्वीकार

पिछले साल के डिफ़ाल्टर्स को फिर दुकानें सौंपने के घोटाले को भी माना

सीएम ने दोषियों को न बख्शने का दिया निर्देश

चेतन गुरुंग

शराब महकमे में भीषण घोटालों और धांधलियों पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की भृकुटी तन गई हैं। महकमे के अफसरों में सुधार न होते देख उन्होंने शासन के आला अफसरों को ऐसे अफसरों पर कार्रवाई की इजाजत दे दी है। प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन की अगुवाई में अब ऑपरेशन क्लीन चलेगा।

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आबकारी आयुक्त सुशील कुमार ने माना कि महकमे में वाकई गड़बड़ियाँ बहुत व्यापक स्तर पर हुईं। इसमें देहरादून में बिना बैंक गारंटी के शराब की निकासी करना भी शामिल है। इस मामले के साथ ही पिछले साल की सिक्योरिटी न देने वालों को भी दुकानें फिर बिना बोली या टेंडर के सौंप दिए जाने का भी मामला सरकार के सामने आ गया है। इस पर कठोर कार्रवाई की जा रही है। आबकारी मुख्यालय का ढर्रा भी ठीक किया जा रह है।

मुख्यमंत्री रावत ने इस बार शराब महकमे की कमान हाथों में लेने और इसको ठोंक-पीट के ढर्रे में लाने का फैसला कर लिया है। इसके चलते महकमे के उन अफसरों में खलबली और जबर्दस्त हलचल है, जिनके तार अब तक सत्ता के शीर्ष से जुड़े रहते थे। फिर जो चाहे फैसला कराते थे। जैसी चाहे वैसी आबकारी नीति बनाते थे। पिछले साल और इस बार भी उन्होंने अपने मुताबिक आबकारी नीति बनवाने में सफलता पा ली थी। जब इस मामले का रोजाना ज़ोर-शोर से खुलासा हुआ और मुख्यमंत्री को हकीकत पता चली, नीति को बदल दिया गया था।

देहरादून और नैनीताल में फर्जी बैंक गारंटी, सिक्योरिटी जमा न किए जाने, दुकानों को कौड़ियों के भाव बेच दिए जाने और परदेसी शराब की दुकानों के लिए डिजाइनर पॉलिसी बनाने की साजिश पर भी त्रिवेन्द्र ने जबर्दस्त और कड़क कार्रवाई की थी। तीन डीईओ को उन्होंने निलंबित किया था। इस सबके बाद माना जा रहा था कि शराब के अफसर सबक लेंगे। ऐसा हुआ नहीं। इस बार भी उन्हीं अफसरों ने आबकारी मुख्यालय में बैठे एक गणित के उस्ताद संयुक्त आयुक्त के ईशारे पर फिर खेल कर दिया, जिनको पिछली बार न सिर्फ लज्जित और निलंबित किया गया था, बल्कि रिटायर होने से पहले एसीएस डॉ. रणबीर सिंह की कृपा के चलते उनकी जांच भी खत्म की गई थी।

इस सब खुलासों के बाद अब सरकार डीईओ और कुछ इंस्पेक्टर्स को बदलने की तैयारी कर रही है। उसकी गाज किस पर गिरती है, इस पर सभी की उत्सुक नजरें हैं। खास तौर पर देहरादून के लिए डीईओ की तलाश है। माना जा रहा है कि राजधानी के विवादास्पद डीईओ मनोज उपाध्याय की पारी जल्दी खत्म हो सकती है। देहरादून में इस बार भी खामोशी संग घोटालों को अंजाम दिया गया। न सिर्फ बिना सिक्योरिटी और बिना बैंक गारंटी के दुकानें सौंप दी गई, बल्कि पिछले साल जिन लोगों ने सरकार का पैसा मार लिया था, उनको फिर से दुकानें दो साल के लिए सौंप दी।

कायदे के मुताबिक उनसे दुकानें वापिस ले के किसी और को दिया जाना चाहिए था। साथ ही उनसे वसूली भी करनी चाहिए थी। दुकानों की कीमत भी कम लगाने के आरोप हैं। ऐसा ही आरोप अल्मोड़ा के डीईओ दुर्गेश्वर त्रिपाठी पर है। जब वह नैनीताल में डीईओ थे, तो उन्होंने ऐसे ही कारनामों से सरकार को छह करोड़ का चूना लगवा दिया था। नए डीईओ पवन कुमार के नैनीताल का कार प्रभार लेने के बाद इस घोटाले का खुलासा हुआ था। त्रिपाठी के खिलाफ भी कार्रवाई रुकी हुई है। आयुक्त सुशील ने आज कहा कि सरकार ने Newsspace में छपी रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। जिन्होंने भी घोटालों और अनियमितता को अंजाम दिया। उनके खिलाफ बहुत सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने भी इस संबंध भी उनको निर्देश दिए हैं। कोई बख्शा नहीं जाएगा।

आयुक्त के मुताबिक जिन दुकानों ने बैंक गारंटी और सिक्योरिटी जमा नहीं की, उनको आज तक का वक्त दिया है कि जमा कर दें। इसके बाद उन पर आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला किया जाएगा। जो अफसर इस लापवाही और घोटाले के लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि वह मुख्यालय का माहौल सुधारने में जुटे हैं। वक्त पर दफ्तर न आने वाले 15 के करीब कार्मिकों और अफसरों की गैर हाजिरी लगा दी गई है। उनसे जवाब तलब किया जा रहा है।

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