देश-विदेश में छा रहे यहाँ से निकले युवा टेक्नोक्रेट

अनुज अग्रवाल की लगन-मेहनत-दृढ़ संकल्प की सफल दास्तान है विवि

IMS भी यश गाथा लिखने की ओर

पिता के ख्वाबों को साकार कर रहे भाइयों की जोड़ी

मसूरी की तलहटी पर प्रकृति की गोद में सुकून से पढ़ाई का माहौल

चेतन गुरुंग

मसूरी की हरी-भरी और खूबसूरत-सुरम्य तलहटी पर स्थापित Dehradun Institute of Technology आज कामयाबियों की बुलंदी पर है। यूं ही नहीं। अपने पिता के ख्वाब और उच्च-तकनीकी शिक्षा में उच्च गुणवत्ता प्रदान करने की सोच लिए दो बेहद युवा भाइयों अनुज अग्रवाल और अमित अग्रवाल ने इसके लिए रातों की नींद और दिन का चैन ही नहीं दिया। सरकारी तंत्र और नौकरशाही की हद दर्जे तक परेशान-उत्पीड़न करने वाले माहौल से भी संघर्ष किया।
दोनों ने पिता के पारंपरिक कारोबार से अलग तकनीकी और उच्च शिक्षा को अपना लक्ष्य बनाया। वैसे स्कूली शिक्षा में भी वे दिलचस्पी लेने लगे हैं। Unison World स्कूल जो विवि के करीब ही है..बहुत जल्दी ख्याति अर्जित कर चुका है। ये दोनों भाइयों की कमाल की मेहनत..लगन..सरकारी सिस्टम के सम्मुख न हारने का जज्बा और दृढ़ संकल्प ही है..जो वे न सिर्फ कामयाब हो गए बल्कि मील का पत्थर बन चुके हैं।
आज जब बाकी विवि और कॉलेजों को प्रवेश के लिए बच्चे पर्याप्त नहीं मिल रहे। इसके लिए भटक रहे। यूटीयू जो सरकारी है, को परेशानी हो रही, DIT प्रवेश के लिए स्कूल से निकले युवाओं की पहली पसंद बन के उभरा है। शक नहीं कि DIT कॉलेज और IMS कॉलेज को दोनों ने वह स्तर प्रदान किया जो किसी को यूनिवर्सिटी बनने से नहीं रोक सकता था। पिछली काँग्रेस सरकार के दौर में जिस दिन कैबिनेट ने इन दो कॉलेजों को यूनिवर्सिटी का दर्जा देने वाला फैसला पास किया था..दोनों भाई सचिवालय में मिले थे मुझे..। खुशी के साथ उनके चेहरों पर सुकून को आसानी से पढ़ा जा सकता था। सरकारी तंत्र से मुक्ति का।
वाकई..जिस उम्र में लड़के बाइक पर मस्तीखोरी करते दिखते हैं..उस उम्र में वे हजारों बच्चों वाले कॉलेज-यूनिवर्सिटी संभाल रहे..। ये कोई सामान्य बात नहीं है। यहाँ से पढ़ कर निकले कई युवाओं को निजी तौर पर जानता हूँ..। असंख्य छात्र आज बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मोटे पैकेज पर हैं। .IMS जब मेख गुरुंग (न्यू कैंट रोड) मार्ग पर था तो कभी-कभी जाता था.। फिर जब DIT आकार ले ही रहा था..तब..। कुछ महीने पहले एक आयोजन में गया मैं वहाँ..जज था मैं..अनुज से उनके शानदार दफ्तर में मुलाक़ात हुई। भविष्य की योजनाओं और DIT के उत्थान पर भी।
खुशमिजाज़-हंसमुख और बेहद काबिल VC कुलदीप रैना और जोशीले HoD डॉ.नवीन सिंघल से भी। पूर्व मुख्य सचिव एन रविशंकर मिल गए थे वहीं। उन्होंने भी विवि की भावी योजनाओं पर भोजन से पहले और बाद में विस्तार से बताया। उनसे सालों का परिचय है मेरा। मुख्य सचिव की कुर्सी से रिटायर हुए रविशंकर कुलाधिपति हैं..। विवि को वह देश की ही नहीं दुनिया की श्रेष्ठ यूनिवर्सिटी में विकसित करने के अनुज के सपने को साकार करने में जुटे हैं।
मसूरी जाते वक्त सरसराती ठंडी हवाओं से तन-मन को ठंडक पहुंचाने वाले..खूबसूरत वादियों और हरियाली तथा पहाड़ों की गोद में बसे इस अभिभूत करने वाली खूबसूरत-बेहतरीन यूनिवर्सिटी के युवा छात्र-छात्राओं से भी कुछ बातचीत की है मैंने। उनका मानना है कि पढ़ाई की गुणवत्ता अच्छी होने के साथ ही यहाँ का शांत माहौल..सुरम्य वादी पढ़ाई के लिए दिमागी सुकून मुहैया करता है। मैंने वह डॉक्यूमेंटरी भी देखी। जो भेजी गई थी..DIT की..। आप भी देखिए जरूर..कैसे कोई सपना इस खूबसूरती के साथ आकार लेता है।

अनुज अग्रवाल-बुलंदी पर मेहनत-दृढ़ संकल्प


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here