सरकार के न्याय सचिव और हरदिल अजीज-सादगी पसंद जज प्रेम सिंह खिमाल और उनकी धर्मपत्नी को डेंगू ने जकड़ लिया। साथ ही घर के दो कर्मचारियों को भी डेंगू हो गया है। अब खिमाल और उनकी धर्मपत्नी का डेंगू काबू में है। दोनों ने मैक्स या सिनर्जी-कैलाश सरीखे हाई-प्रोफाइल पाँच-तीन सितारा किस्म के महंगे अस्पतालों को छोड़ दून अस्पताल के साधारण से (भले नाम वीआईपी कक्ष है) कक्ष में ईलाज कराया। ये भी मिसाल है। अभी दोनों वहीं हैं। उनका सारा खर्च जबकि सरकार उठाती।

ये उन लोगों के लिए सबक है जो सरकारी अस्पतालों को बेकार बता कर सिर्फ महंगे अस्पतालों का रुख करना पसंद कर रहे हैं। वहाँ लाखों के बिल बनवाते हैं और सामान्य ईलाज करवाते हैं। सिर्फ साफ-सफाई और होटल जैसी सुविधा का पैसा देते हैं। जब से सरकार ने आयुष्मान कार्ड योजना चालू की है, इन अस्पतालों की लॉटरी निकाल आई है। अस्पताल-सरकार के अफसरों की मिलीभगत सरकारी खजाने पर भारी पड़ रही है। खिमाल दून अस्पताल में खुश दिखे।

उन्होंने मुझसे शाम को कहा-जब दून अस्पताल में ईलाज बेहतर ढंग से उपलब्ध है तो क्यों लाखों का यही ईलाज बड़े और नामी निजी अस्पतालों में कराया जाए। उन्होंने कहा-यहाँ अच्छा है। सभी लोग मिलने आ रहे हैं। वार्ड तलाशने में भी किसी को दिक्कत नहीं हो रही। घर जैसा माहौल है। खिमाल की बातों ने दिल जीत लिया। ऐसी सादगी कम ही आला नौकरशाहों-जजों में देखी जा सकती है। दिक्कत बस ये है कि डेंगू बेकाबू हो चुका है । हर अस्पताल में बेड कम पड़ चुके हैं। दून अस्पताल से मरीज निराश लौट रहे हैं। बेड न होने के कारण। सरकार ध्यान दें कृपया।

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