शक और हैरानी पैदा कर रही सरकार-THDC प्रबंधन की खामोशी

भर्तियों में खेल और आरोपों के बावजूद क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?

कामचलाऊ निदेशक मेर के नाम पर बुद्धि-शुद्धि यज्ञ  

चेतन गुरुंग

टिहरी के THDC-IHET में भर्तियों में धांधली का खुलासा होने के बावजूद सरकार और THDC प्रबंधन की खामोशी शक और हैरानी पैदा कर रही है। समझा जा रहा है कि इससे साफ जाहिर हो रहा कि भर्तियों को अंजाम देने वाले बर्खास्त निदेशक गीतम सिंह तोमर ने सभी तंत्र को अपने जाल में फाँसा हुआ था। इस मामले को बढ़ावा देने वाले कामचलाऊ निदेशक केकेएस मेर को हटाने और भर्तियों की विजिलेन्स जांच की मांग का पर्चा राज भवन भी पहुँच गया है। सुबह कॉलेज परिसर में मेर के नाम पर बुद्धि-शुद्धि यज्ञ भी विधि-विधान संग किया।

मेर की तरफ से सुबह सहायक रजिस्ट्रार आंदोलनकारी नॉन टीचिंग स्टाफ से बात करने आए, लेकिन उनसे किसी ने भी बात करने से इंकार कर दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस शख्स पर तोमर के साथ आज भी मिली भगत कर स्टाफ को परेशान करने, भर्ती धांधली को वाजिब ठहराने और दो महीने में सिर्फ चार दिन कुछ वक्त के लिए आ के गोपेश्वर लौट जाने का आरोप हो, उसके साथ कोई बात नहीं की जा सकती है। वे सिर्फ सरकार और यूटीयू रजिस्ट्रार से ही बात करेंगे।

नॉन टीचिंग स्टाफ के मुताबिक आखिर क्या राज है कि पूछने पर भी नहीं बताया जा रहा है कि चारों विवादित कार्मिकों की भर्ती के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी और सलेक्शन कमेटी के सदस्यों के नाम बताने में निदेशक राजी नहीं हैं। वे जानना चाहते हैं कि आखिर नामों का चयन इंटरव्यू के लिए स्क्रीनिंग कमेटी ने किस तरह किया? कैसे चयन समिति ने आयुसीमा से अधिक वालों और शैक्षणिक योग्यता पूरी न करने वालों का भी चयन कर लिया। ये मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस के खिलाफ भी है। विजिलेन्स जांच हो तो ही इसका खुलासा होगा। साथ ही वे ये भी जानना चाहते हैं कि क्या वजह है जो हाई कोर्ट के फरमान के बावजूद 37 नॉन टीचिंग स्टाफ को स्थायी या नियमित कार्मिकों का दर्जा नहीं दिया जा रहा है।

उनकी तरफ से राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को दिए गए पर्चे में कॉलेज में हो रहे सारे घपले और आरोपों का खुलासा किया गया है। राज्यपाल विवि की कुलाधिपति हैं। ऐसे में उनके दरबार में मामला चला गया है तो निगाहें उन पर टिक गई हैं कि वे क्या कदम THDC-IHET मामले में उठाएंगी। आंदोलनकारियों का आरोप है कि कुलपति नरेंद्र चौधरी खुद पार्टी बने हुए हैं। वह सरकार और राज भवन को कई मामलों में गुमराह करते रहे हैं। खुद उन पर नागपुर में एनआईटी निदेशक रहने के दौरान भर्तियों को ले कर गंभीर आरोप हैं। THDC-IHET भर्ती घोटाले में उनसे किसी कदम की उम्मीद वे नहीं कर रहे हैं। इस मामले में सरकार के साथ ही THDC प्रबंधन का भी खामोश रवैय्या लोगों को चुभ रहा है। आखिर नाम दोनों का ही खराब हो रहा है। अवाम जवाब सरकार से मांगेगी। इस मुद्दे पर। THDC कॉलेज संपत्ति की असली मालिक है।

कामचलाऊ निदेशक मेर के नाम पर बुद्धि-शुद्धि यज्ञ

आंदोलनकारियों का आरोप है कि कॉलेज में दस्तावेजों को खुर्द-बुर्द किया जा सकता है। जिन विवादित कार्मिकों को ले कर हँगामा है, उनको ही जरूरी और अहम जिम्मेदारियाँ मेर दे रहे हैं। साथ ही TEQUIP के अंतर्गत एक अकाउंटेंट की भर्ती निकाली गई है। निदेशक ने उसके चयन की प्रक्रिया भी गोपेश्वर इंजीनियरिंग कॉलेज में रखी है। जहां वह निदेशक हैं। इससे साफ होता है कि वह टिहरी आने को इच्छुक नहीं हैं। ऐसे हाल में उनसे THDC-IHET का चार्ज तुरंत छीन लिया जाए। उनीओ स्थायी निदेशक न आने तक के लिए चार्ज दिया गया है। वह रूटीन कार्य की जगह नीतिगत अहम फैसले कर रहे हैं।

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