अब BJP नेताओं से भी हो गई भिड़ंत

शातिर अपराधी पकड़ें-चालान के लिए ट्रैफिक पुलिस है न

चेतन गुरुंग

CPU (City P atrol Unit) के किस्से जबसे इसका गठन हुआ है। तभी से बहुत प्रचलित रहे हैं। जेम्स बॉन्ड स्टाइल के जवान। शानदार बाइक। कमर में पिस्टल खुंसी। धूप के काले चश्मे। हाथों में वाकी-टाकी। इतनी सुविधाओं के बाद तो सिर्फ जुर्म के उस्तादों को धार दबोचना होना चाहिए। उनका फर्ज। हो क्या रहा? गाड़ियों के दस्तावेजों की जांच। सीट बेल्ट। गलत पार्किंग। बिना हेल्मेट पर कार्रवाई।

वे भूल रहे कि इस काम के लिए तो साधारण किस्म के पुलिस वाले ही काफी है। काहे को ऐसी तड़क-भड़क और जबरन लोगों को सता-परेशान कर के जुर्माना वसूलना। अब तक आम लोग बोल रहे थे। सभी को लगता था। गलती रही होगी अपनी। CPU ने कार्रवाई सही की होगी। अब हल्द्वानी का वीडियो देखिए। सत्ता धारी BJP के ही जाने पहचाने चेहरे और नाम हैं। इसमें जो दिख रहे। अनिल डब्बू पार्टी के प्रवक्ता हैं। लाल बत्ती वाले रहे हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के खासमखास में हैं।

वह CPU पर भड़क रहे हैं। शायद सही। किसी मरीज को अस्पताल में ले के पहुंचे। CPU भी पहुँच गई। चालान करने लगी। गाड़ियों की। वे अपनी कायदों-नियमों की दुहाई दे रहे। उनको इससे कोई मतलब नहीं कि कोई शख्स अगर किसी बीमार को जल्दबाज़ी में अस्पताल ले के आया है। उसकी जान बचाने को । उसके पास गाड़ी के दस्तावेज़ निकाल के रखने की फुर्सत नहीं थी। या ध्यान नहीं रहा। CPU को चालान चाहिए। टार्गेट पूरा करना है। महकमे से जो मिला है।

CPU का फायदा तब है जब वह राहजनों के लिए आफत का परकाला बन जाए। चेन स्नैचर को धर दबोचे। उसके नाम से अपराधी थर-थर काँपे। ये नहीं कि बस चालान और गाड़ियों की चेकिंग ही करती रह जाए। फिर तो इसको भंग ही कर दिया जाए। थानों-चौकियों में इसके जवानों की तैनाती की जाए। उनको पुलिस ड्यूटीज़ थमाइ जाए। ये काम तो जरूरत पड़ने पर उनसे खाकी वर्दी में फिर भी कराए जा सकते हैं।

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