सिर्फ धोखाधड़ी-गबन का खेल बन के रह गया ये अवैध धंधा

पुलिस-प्रशासन अभी भी कई लेडी किट्टी डॉन पर मेहरबान

धंधा धड़ल्ले से चल रहा, कोई रोकने वाला नहीं

चेतन गुरुंग

किट्टी एक ऐसे शानदार धंधे के तौर पर सामने आया है, जिसमें शिकारी भी महिला और और शिकार भी। इसमें करोड़ों के वारे-न्यारे हो रहे। खाली और बेरोजगारी में दिन गुजारने वाले किट्टी खिलाने के बाद से अचल संपत्ति और करोड़ों कैश के मालिक बन गए है। उनकी शिकार हो रहीं ज़्यादातर महिला सदस्य ऐसी हैं, जो अपने पैसों का तकाजा तक जोरदार ढंग से करने की हिम्मत नहीं कर पा रही। राजधानी में किट्टी का अवैध खेल इस कदर चल रहा कि आए दिन नए लेडी किट्टी डॉन के नाम सामने आ रहे।

`Newsspace’ के पास DBS कॉलेज के करीब एक भट्ट महिला और कांवली रोड पर एक कामिनी नाम की महिला का नाम भी तेजी से सामने आ रहा है। सचिवालय के पास वाली बेदी से भी सदस्य महिलाओं की शिकायत है कि वह न तो पैसे दे रही न ही पैसे की जगह ज्वेलरी लेने वाली महिलाओं को पक्की रसीद ही दी जा रही है।

कांवली रोड पर बुटीक चलाने वाली कामिनी ने लंबे समय से लोगों के पैसे लौटाने बंद कर दिए हैं। एक महिला सदस्य के अनुसार अब ये महिला करोड़ों हड़पने के बाद दुकान बंद कर के बैठ गई है। वह न पैसे दे रही न ही लोगों से मिलती हैं। पुलिस में शिकायत भी की लेकिन कोई दबाव उस पर नहीं बन पाया है। इससे महिलाएं हतोत्साहित हैं।

DBS कॉलेज के करीब जो महिला किट्टी खिला रही थीं, उसने महीनों से पैसों का भुगतान बंद कर दिया है। एक महिला सदस्य के मुताबिक महीने में वह 27-28 दिन किट्टी आयोजित करती थी। अब शायद या तो चोरी-छिपे किट्टी करा रही या फिर बंद ही कर दिया है। लोगों ने भी पैसे वापिस न मिलने के बाद अब उसको आगे की किस्तें देनी बंद कर दी हैं।

पुलिस में तमाम शिकायतें हो चुकी हैं, पर अभी तक वह जेल नहीं गई है। नेशविला रोड वाली किट्टी माफिया हो या फिर नागर बहनें और बेदी दंपत्ति, कोई भी पैसे लौटाने को राजी नहीं है। इनके सदस्य और एजेंट्स बहुत ही परेशान हैं। साथ ही पुलिस के रुख से नाराज भी। उनके मुताबिक आखिर लगातार शिकायतों के बावजूद पुलिस इन किट्टी डॉन को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही? क्यों नहीं उनकी संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई कर उनको जेल भेजा जा रहा?

उनका सवाल है कि क्या पुलिस इंतजार कर रही कि वे एक दिन करोड़ों समेट  कर फुर्र हो जाए। क्यों नहीं पहले ही उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही। वे खुले आम किट्टी खिलाती थीं और अभी भी किट्टी हो रहीं। ज़्यादातर महिला सदस्य घरेलू महिलाएं हैं। उनको कानूनी प्रावधानों का ज्ञान नहीं है। जब किट्टी खुले आम होटल, रेस्तरां, फार्म हाउस में हो रहे और शहर भर में खिलाए जा रहे तो उनको भला कहाँ से किट्टी के अवैध होने के बारे में शक होता!

बेदी की एक सदस्य के अनुसार उनको नगद के बदले जो ज्वेलरी दी गई है, उसकी पक्की रसीद तक नहीं दी गई है। दुकान में बाउंसर बिठाए हैं। खुद गायब रहते हैं। उनका कहना है कि पुलिस-प्रशासन को चाहिए कि वे किट्टी माफिया को संपत्ति बेच कर भी लोगों का पैसा चुकाने के लिए मजबूर करें। नहीं तो जेल भेजें। उन पर खुफिया पुलिस की तैनाती भी रखे। वे भाग न पाए।

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