डीईओ मनोज उपाध्याय को बचाने में कामयाब हो गई लॉबी?

Chetan Gurung

राजधानी के पथरिया पीर मलिन बस्ती में जहरीली शराब पीने से छह लोगों की मौत पर सरकार ने क्षेत्र के आबकारी इंस्पेक्टर शुजात हुसैन समेत 6 लोगों को देर रात सस्पेंड कर दिया। खास बात ये है कि इतनी बड़ी वारदात के बावजूद डीईओ मनोज उपाध्याय को बचाने की पूरी कोशिशें चल रही हैं। पूरे जिले को देखने वाले प्रवर्तन के इंस्पेक्टर मनोहर को जब एक सर्किल में शराब कांड पर निलंबित किया जा सकता है तो जिला आबकारी अधिकारी कैसे बच सकते हैं? एक सब इंस्पेक्टर चन्द्र प्रकाश भट्ट तथा सिपाहियों को भी निलंबित किया गया है।

आबकारी महकमे से पहले एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने शहर कोतवाल और धारा चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिखा दिया कि प्रशासनिक क्षमता किसको कहते हैं। माना जा रहा ही कि आबकारी महकमे को पुलिस महकमे की तेज रफ़्तारी कार्रवाई के कारण मजबूरी में अपने कर्मचारी सस्पेंड करने पड़े। हरिद्वार में भी जब जहरीली शराब से 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे तो पुलिस ने अफसरों पर आबकारी महकमे से पहले कार्रवाई कर दी थी।

हरिद्वार में भी पहले तो उस वक्त के डीईओ को बचाया जा रहा था। बाद में मुद्दा गर्मी पकड़ गया तब डीईओ को काफी बाद में सस्पेंड किया गया था। तीन महीने बाद बहाल भी कर दिया। जांच कुमायूं के संयुक्त आयुक्त केके कांडपाल को डेढ़ महीने पहले सौंपी। इतना वक्त जांच सौंपने में क्यों और कैसे लगा? इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। अब जब देहरादून में भी जहरीली शराब पीने से लोग मर गए हैं तो क्या यहाँ के डीईओ उपाध्याय को बिना सस्पेंशन और अन्य विभागीय कार्रवाई के छोड़ा जा सकता है?

महकमे की शक्तिशाली लॉबी मनोज को पहले घोटाले से और अब जहरीली शराब से मौत कांड के बावजूद बचाने की कोशिश में जुटी है। इंस्पेक्टर तक पर कार्रवाई का अधिकार आबकारी आयुक्त को है। डीईओ और उससे ऊपर के अफसरों पर कार्रवाई शासन करता है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक डीईओ पर कार्रवाई की प्रक्रिया करने के कोई आदेश नहीं मिले हैं। न ही महकमे में अपने स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।

जिस पथरिया पीर इलाके में छह लोग बिकाऊ और लापरवाह-बर्बाद सिस्टम के कारण काल के मुंह में समा गए, वह लाल गेट की दिशा में सैन्य छावनी से तकरीबन सटा हुआ है। मसूरी के विधायक गणेश जोशी यहीं रहते हैं। समझा जा रहा है कि अवैध शराब के दो बड़े माफिया का हाथ इस शराब कांड में हो सकता है। बहरहाल, इस जहरीली शराब कांड से त्रिवेन्द्र सरकार की ख़ासी छीछालेदर हो रही। खास तौर पर ये देखते हुए कि आबकारी में घपलों को ले कर आए दिन रिपोर्ट्स सोशल मीडिया में आती रहती हैं।

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