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उत्तराखंड क्रिकेट:निर्माण से पहले हिलने लगी बुनियाद

नियुक्तियों और यूपी के रुतबे पर असंतोष की आग

हर फैसले पर राजीव शुक्ला का दखल

अहम किरदार रहे अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट दरकिनार

आज घोषित होंगे CAU चुनाव नतीजे

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट दशकों तक धक्के खाने के बाद अपने पैरों पर खड़ा होने से पहले ही झटके खाने लगा है। उत्तर प्रदेश और कानपुर लॉबी के दखल, विवादित नियुक्तियों, अहम फैसलों में पारदर्शिता न होने और मनमानियों के आरोपों से ग्रस्त क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में असंतोष के बीज शैशवकाल में ही डल चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कुछ नए प्रावधानों के साथ एसोसिएशन के चुनाव दूसरी बार कराने पड़े हैं। आज (28 सितंबर) इसके नतीजों का ऐलान चुनाव अधिकारी सुवर्द्धन करेंगे। जोत सिंह गुनसोला का अध्यक्ष और माहिम वर्मा का सचिव पद पर चुनाव जाना तय है। दोनों के खिलाफ किसी अन्य ने पर्चा ही नहीं भरा। गुनसोला को क्रिकेट के प्रति उनकी योगदान के कारण जाना जाता है। वह काँग्रेस के खाँटी नेता होने के साथ ही दो बार मसूरी नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं। माहिम की पहचान पीसी वर्मा के बेटे के तौर पर है। पीसी ने चार दशक तक देहरादून में क्रिकेट की मशाल को जलाए और रोशन रखी।

सीएयू अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट:मुझे नहीं पता कौन ले रहा अहम फैसले

उम्मीद थी कि बीसीसीआई की मान्यता मिलने के बाद उत्तराखंड क्रिकेट में सब सही हो जाएगा, लेकिन शुरुआती दौर में ही विवादों ने जगह बनानी शुरू कर दी है। रणजी, विजय हज़ारे समेत सभी ट्रॉफी की टीमों के चयन को ले कर जम कर अंगुली उठ रही हैं। चयन में पक्षपात और साजिश के आरोप लग रहे हैं। इस बात पर भी एतराज जताया जा रहा है कि टीमों की घोषणा चयनकर्ता नहीं कर रहे हैं। टीम घोषणा का काम एसोसिएशन का एक जूनियर कर्मचारी धीरज खरे अनौपचारिक तौर पर कर रहा है। जो हर अहम जिम्मेदारियों को देख रहा है।

हीरा सिंह बिष्ट उन लोगों में से हैं, जिनके सहारे पीसी वर्मा और उनकी टीम आगे बढ़ी। ये आरोप लग रहे हैं कि बीसीसीआई से मान्यता मिलने के बाद से ही वह किनारे कर दिए गए हैं। अभी अध्यक्ष वही हैं, लेकिन एक भी अहम फैसला उनकी मंजूरी से नहीं किया गया। इतना ही नहीं, उनको किसी भी अहम फैसले में न तो शामिल किया जा रहा। इस बात को ले कर सख्त आपत्तियाँ और असंतोष पनप रहा है कि जिन लोगों ने उत्तराखंड क्रिकेट को आगे बढ़ाने में जिंदगी लगा दी, उनकी उपेक्षा की जा रही है। ऐसे चेहरे सामने आ रहे, जो क्रिकेट का बिजनेस कर रहे हैं। `हितों के टकराव’ मामलों से जुड़े हैं।

ये कहा जा रहा है कि सीएयू की बागडोर कुछ खास लॉबी ने खुद अपने हाथों में ले ली। इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि आखिर किस आधार पर, किसने CAU का CEO अमृत माथुर को नियुक्त किया? चयनकर्ताओं का चयन किसने किया? किसने प्रशिक्षकों की नियुक्ति की और इसका आधार क्या था? रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में यूपी के ही एक ऐसे विवादित पूर्व चयनकर्ता को भी सम्मानित किया गया, जिस पर पिछले सीजन में पैसे ले कर चयन करने के गंभीर आरोप थे। इन नियुक्तियों में वित्त की अहम भूमिका रहेगी, और वित्तीय मामलों में CBI-विजिलेन्स जांच भी क्रिकेट में जल्द बैठने की मिसालें हैं।

इस बारे में बिष्ट से `Newsspace’ ने संपर्क किया। उनसे सभी सवालों के जवाब मांगे। उन्होंने साफ कहा-`मैं चुनाव नतीजे आने तक सीएयू के अध्यक्ष हूँ। साथ ही ये भी सच है कि अध्यक्ष होने के बावजूद ये तमाम फैसले न तो मैंने लिए न ही मेरी जानकारी में लाए गए। फैसले बिना कोई बैठक बुलाए किसने किए, मैं भी नहीं जानता। मुझको भी नहीं पता कि नियुक्तियाँ आखिर हुई कैसे? इसके लिए क्या आधार-मानक अपनाए गए?’पिछले दिनों CAU की एक सेलिब्रेशन पार्टी में बिष्ट-गुनसोला दोनों की गैर मौजूदगी भी चर्चाओं में हैं।  

उत्तराखंड क्रिकेट में बीसीसीआई और यूपीसीसी के पदाधिकारी तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ला का दखल बहुत ज्यादा दिखाई दे रहा है। रणजी सीजन की शुरुआत के मौके पर उत्तराखंड के अहम किरदार स्टेडियम में नहीं थे। शुक्ला और उनकी टीम की सक्रियता को देख के ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे वही उत्तराखंड क्रिकेट को भी खुल के संभालेंगे-चलाएँगे। पहले ही तमाम विवादों और अन्य एसोसिएशनों के साथ कोर्ट-कचहरी में उलझी उत्तराखंड क्रिकेट इस तरह की खराब मिसालों से आगे विकास की रफ्तार पकड़ पाएगी, इसमें शक जताने वाले सामने आने लगे हैं।

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