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पर्दे के पीछे BCCI-UPCA ही उत्तराखंड का बॉस!

चयनकर्ता मनोज मुद्गल की बीच में छुट्टी का राज क्या?

नए CAU अध्यक्ष जोत गुनसोला:हमारे सारे फैसले BCCI ने लिए

BCCI चुनाव में वोट का अधिकार अध्यक्ष की जगह सचिव को

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट को उसका असली हक मिल गया है लेकिन ये खतरा अभी से मंडराने लगा है कि इस पर BCCI और UPCA का गहरा कब्जा पर्दे के पीछे से जारी रहेगा। इसकी वजह भी है। उतराखंड स्वतंत्र और स्वायत्त है। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड इसकी बॉस है। उसको ही बीसीसीआई की मान्यता है। चुनाव भी हो गए। जोत सिंह गुनसोला इसके अध्यक्ष और माहिम वर्मा को सचिव बनाया गया है। भले चुनाव के जरिये। इसके बावजूद उत्तराखंड क्रिकेट में चंद दिनों के भीतर ही कई उथल-पुथल मचाने वाली और पारदर्शिता से दूर तक का वास्ता न रखने वाली बातें हो चुकी हैं।

CAU के पहले निर्वाचित अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला:BCCI चुनाव में वोट का अधिकार नहीं

जो अहम सवाल उठ रहे हैं, उनमें सीईओ के तौर पर अमृत माथुर की नियुक्ति, चयनकर्ताओं का चयन, जितने भी चयन इन दिनों हुए या हो रहे, उनको ले कर शिकायतें, चयनकर्ता मनोज मुद्गल का बीच में ही ज़िम्मेदारी छोड़ के चला जाना, बाबु को परिवहन, होटल, ऑब्जर्वर की ज़िम्मेदारी दिया जाना, 24 समितियों के गठन के बारे में सोचा न जाना, सीईओ का अभी तक सक्रिय न दिखना शामिल हैं। इसके साथ ही बीसीसीआई-यूपीसीए और सियासत के उस्तादों में शुमार राजीव शुक्ल का उत्तराखंड में जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी लिया जाना और सक्रिय दिखना,यूपी के एक बदनाम चयनकर्ता को सम्मानित किया जाना,अंडर-19 टीम में यूपी को अपनी कप्तानी में चैंपियन बनाने वाले खिलाड़ी को उत्तराखंड में कप्तानी न सौंपने के सवाल भी उठ रहे हैं।

CAU के पहले निर्वाचित अध्यक्ष गुनसोला ने `Newsspace’ से इन मामलों में बात की। काँग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ककड़ी-रायता पार्टी में मिले। उन्होंने कहा कि जो भी फैसले अभी तक उत्तराखंड को ले के हुए हैं, उसमें किसी की कोई भूमिका हम में से नहीं रही। सभी फैसले बीसीसीआई ने किए। चाहे वह अमृत माथुर की नियुक्ति का हो या फिर चयनकर्ताओं की नियुक्ति का। चयनकर्ता मुद्गल क्यों बीच में चले गए, इसकी जानकारी उनको भी नहीं है। अगर चयन में धांधली या खेल की शिकायत आधिकारिक तौर पर मिलती है तो उस पर कार्रवाई जरूर करेंगे। पारदर्शिता न होने के बाबत उन्होंने कहा कि अभी शुरुआत है। आगे इसका पूरा ख्याल रखेंगे। मुद्गल के बारे में `Newsspace’ के पास सूचना है कि वह विजय हज़ारे ट्रॉफी चयन के दौरान किसी के दबाव में नहीं आ रहे थे। वह साफ-सुथरे चयन के हक में थे। इसलिए उनकी छुट्टी हो गई।

खास बात ये है कि चार दशक तक उत्तराखंड और देहरादून में क्रिकेट की लौ में तेल-घी डालते रहे पूर्व मंत्री और काँग्रेस नेता हीरा सिंह बिष्ट को भी कुछ पता नहीं था। कल तक वही CAU अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा था-जो फैसले उत्तराखंड क्रिकेट में हो रहे हैं, उसके बारे में कोई भी जानकारी मेरे पास नहीं है। न ही मेरे से कोई राय-मशविरा इस बारे में किया गया। इसका साफ संदेश ये है कि उत्तराखंड को आजादी से काम करने का मौका न BCCI न ही UPCA देना चाहती है। इसका मतलब क्या उत्तराखंड अभी भी क्रिकेट फैसले लेने को आजाद-स्वतंत्र नहीं है? BCCI के चुनावों में वोटिंग का अधिकार भी सचिव माहिम को CAU ने दे दिया है। ये हक तो अध्यक्ष के पास होते हैं। गुनसोला आखिर इतना अहम हक क्यों छोड़ेंगे खुद? इसका मतलब ये समझा जा रहा है कि उन पर इसके लिए किसी का दबाव रहा होगा। आने वाले दिनों में इसका खुलासा भी हो सकता है।

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