पर्दे के पीछे-Chetan Gurung

काफी साल हो गए..दो वरिष्ठ नौकरशाह हुआ करते थे..वैसे तो कमाल के थे..ज्ञान-काम में..बस अपना हिस्सा अलग से..जरूर चाहिए होता था..दोनों ही दुर्दशा के शिकार हुए..कैरियर उनका बुझे दीपक सरीखा खत्म हुआ..उनसे सबक जरूर लेना चाहिए..नए-युवा नौकरशाह को..खास तौर पर प्रतिभावानों को..कुछ ने तो आँखें ही मूँद ली है..कान बंद किए हैं..गांधी जी से प्यार तो हम भी करते हैं..उनके विचारों से प्रभावित सभी हैं..प्यार का मतलब सिर्फ लाल कागज या उनकी तस्वीर वाले कागज नहीं..उनके मूल विचारों-सिद्धांतों को आत्मसात करें..

एक जुम्मा-जुम्मा चंद दिनों वाले सचिव इन दिनों खूब गुल खिला रहे..उनके मातहत जो नौकरशाह हैं..बहुत परेशान हैं..एक बहुत साफ-सुथरे हैं..दूसरे कुछ खुद भी तेज वाले हैं..दोनों का काम-धाम छीना हुआ है..खुद ही सारी डील कर रहे..यहाँ तक कि जो काम अपना नहीं..वह भी खुद कर रहे..मातहतों को पैदल किया हुआ है..छोटी-छोटी डील तक पर कब्जा..भाई ऐसा होगा तो फिर नीचे वाले क्या करेंगे? राम धुन गाएँगे? गलत बात..

जीरो टालरेंस सरकार में ये सब! इस गज़ब नौकरशाह के मातहत एक नौकरशाह से बात हो रही थी मेरी..वह बेहद दुखी थे-बोल रहे थे, सारा काम यहाँ तक कि ट्रांसफर-पोस्टिंग तक बड़े साहब ने अपने पास रख लिया है..ये तो मेरा काम है..एक चीज और कर रहे ये साहब..जिस भी बंदे को महकमे की जानकारी है..चलता कर रहा..अब आप सोच रहे होंगे..ईमानदारी और भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के अगुवा हैं ये..गलत..एकदम गलत..जनाब के खिलाफ बहुत बड़े भ्रष्टाचार पर ही कार्रवाई हो चुकी है..अब कई अहम महकमे लिए बैठे हैं..जिल्ले ईलाही को जरूर ये तथ्य किसी सलाहकार ने नहीं बताए होंगे..इस नौकरशाह के बारे में..उनको पता होता तो जनाब पाताल लोक में विचरण कर रहे होते..अब हर चीज तो हुजूरे आला को पता नहीं हो सकती न..?

सबसे बदनाम-आलोकप्रिय नौकरशाहों की सूची बनाएँ तो जनाब शीर्ष पर होंगे..एक भी साथी या वरिष्ठ नौकरशाह की सूची तक में नहीं..एक बार एक जिले में कलेक्टर बना के भेजे जा रहे थे..कई साल हो गए..नाम फ़ाइनल..मुख्य सचिव को चार्ज लेने जाने से पहले शुक्रिया करने..शिष्टाचार भेंट करने पहुंचे..नंबर-1 बॉस ने मुसकुराते हुए कहा था-अरे भाई अब यहीं रहो..कलेक्टरी का आदेश रद्द हो गया है..समझाया-ऐसा क्या है कि कोई भी तुमसे खुश नहीं..सरकार तो तुमको कलेक्टर बनाना चाहती है..लोग विरोध कर देते हैं..अपना रवैय्या बदलो..ढंग बदलो..आज तक जनाब वैसे ही हैं..सॉरी..और उस्ताद हो गए..इतिहास से सबक नहीं लिया..देखते हैं..आगे और क्या गुल खिलाते हैं..

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here